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Ashada Amavasya जानें आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि महत्व और उपाय

आषाढ़ अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या और आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है. आषाढ़ अमावस्या का दिन दान-पुण्य व पितरों की आत्मा की शांति के लिये किये जाने वाले धार्मिक कर्मों के लिए विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन पवित्र नदी और तीर्थ स्थलों पर स्नान का कई गुना फल मिलता है। अमावस्या पर चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं, ऐसा करने से पाप कर्मों का प्रायश्चित होगा और अच्छे कर्मों का फल मिलता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है ।

आषाढ़ अमावस्या का महत्व‌ Significance of Ashada Amavasya 

अमावस्या का दिन महीने में एक बार आता है जब चंद्रमा आकाश में कहीं दिखाई नहीं देता है। हिंदू धर्म के अनुसार यह दिन कई कारणों से बहुत ही शुभ है। हालांकि हर अमावस्या का अलग उद्देश्य होता है, ऐसा माना जाता है कि सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या अत्यधिक शुभ होती है क्योंकि यह भगवान शिव को बहुत प्रिय होती है। हालांकि हर अमावस्या अपने पूर्वजों को प्रसन्न करने और उनके लिए तर्पण करने के लिए महत्वपूर्ण होती है।

आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि Ashada Amavasya Puja Method 

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले भगवान विष्णु को प्रणाम करें। इसके बाद सभी कार्यों से निवृत होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें। अगर सुविधा है, तो गंगा स्नान करें। फिर आचमन कर पूजा संकल्प लें। अब सर्वप्रथम सूर्य देव का जलाभिषेक करें। इसके पश्चात, भगवान विष्णु की श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करें। पूजा समापन के बाद बहते हुए पानी में तिल प्रवाहित करें। इस समय सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करें। इस दिन पिंड दान का भी विधान है। अतः व्यक्ति विशेष अपने पूर्वजों का पिंड दान कर सकते हैं। साथ ही गरीबों और ब्राह्मणों को खाना खिलाएं। अंत में यथा शक्ति तथा भक्ति के भाव से दान करें।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये करें ये काम

धार्मिक शास्त्रों में पूर्णिमा की तरह की अमावस्या पर भी स्नान-दान को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए आषाढ़ अमावस्या के दिन जल्दी उठें और किसी पवित्र नदी में स्नान करें। इसके बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन तर्पण जरूर करें। इसके अलावा यदि आपकी कुंडली में पितृदोष है, तो आषाढ़ अमावस्या पर यज्ञ कराना चाहिए। इससे पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।

आषाढ़ अमावस्या पितृ दोष उपाय 

पितृ दोष से मुक्ति का उपाय यह है कि आप सुबह स्नान के बाद पितरों को जल से तर्पण दें. उनके देव अर्यमा की पूजा करें पितरों के निमित्त वस्त्र, अन्न आदि का दान किसी गरीब ब्राह्मण को करें.

आषाढ़ अमावस्या कालसर्प दोष के ज्योतिष उपाय

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो आषाढ़ अमावस्या को भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करें. यह पूजा राहुकाल में करनी होती है क्योंकि कुंडली में राहु और केतु की विशेष स्थिति के कारण कालसर्प दोष पैदा होता है.

आषाढ़ अमावस्या भाग्य मजबूत करने के उपाय

आषाढ़ अमावस्या को आप आटे में चीनी मिलाकर काली चींटियों को खिला दें. इससे आपके पाप नष्ट होंगे और पुण्य के बढ़ने से भाग्यप्रबल होगा.

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शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ी/ हलहारिणी अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए किए गए कार्य शुभ माने जाते हैं। इसी दिन सूर्य ग्रहण भी लगेगा। आइए जानें आषाढ़ अमावस्या पर आपकी राशि के अनुसार कौन सा दान शुभ रहेगा

आइए जानें आषाढ़ अमावस्या पर आपकी राशि के अनुसार कौन सा दान शुभ रहेगा 

मेष- चादर एवं तिल का दान करें तो शीघ्र ही हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

वृषभ- वस्त्र एवं तिल का दान करें तो शुभ रहेगा।

मिथुन- चादर एवं छाते का दान करें तो बहुत लाभदायक सिद्ध होगा।

कर्क- साबूदाना, चावल एवं वस्त्र का दान करना शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा।

सिंह- कंबल एवं चादर का दान अपनी करना अति शुभदायी रहेगा।

कन्या- तेल तथा उड़द दाल का दान करें।

तुला- रुई, वस्त्र, राई, सूती वस्त्रों के साथ ही चादर आदि का दान करें।

वृश्चिक- खिचड़ी का दान करें साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार कंबल का दान भी शुभ फलदायी सिद्ध होगा।

धनु- चने की दाल का दान करें तो विशेष लाभ होने की संभावना बनती है।

मकर- कंबल और पुस्तक का दान करें तो हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

कुंभ- साबुन, वस्त्र, कंघी व अन्न का दान करें।

मीन- साबूदाना,कंबल सूती वस्त्र तथा चादर का दान करें।

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डिसक्लेमर इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।

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