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देवापराध क्षमापन स्तोत्र PDF | पूजा में हुई अशुद्धि हेतु क्षमा प्रार्थना

देवापराध क्षमापन स्तोत्र PDF | पूजा में हुई अशुद्धि हेतु क्षमा प्रार्थना

सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान शुद्धता, विधि और भाव का विशेष महत्व बताया गया है।

मानव स्वभाव के कारण मंत्र, उच्चारण या विधि में त्रुटि होना स्वाभाविक है।

ऐसी ज्ञात-अज्ञात भूलों और अपराधों से मुक्ति के लिए देवापराध क्षमापन स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

यह स्तोत्र देवी से विनम्र क्षमा प्रार्थना का अत्यंत प्रभावी माध्यम है।

इसमें साधक अपनी सीमाओं को स्वीकार करता है और माता की करुणा पर विश्वास रखता है।

देवापराध क्षमापन स्तोत्र के पाठ से पूजा की अपूर्णता दूर होती है।

साधना को पूर्ण फल और देवी की कृपा प्राप्त होती है।

देवापराध क्षमापन स्तोत्र

पूजा में हुई किसी भी प्रकार की अशुद्धि, त्रुटि या अपराध के लिए
इस स्तोत्र द्वारा देवी से विनम्र क्षमा याचना की जाती है।

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो
न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः।
न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं
परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्॥

विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत्।
तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति॥

पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरलाः
परं तेषां मध्ये विरलतरलोऽहं तव सुतः।
मदीयोऽयं त्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति॥

जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता
न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया।
तथापि त्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति॥

नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः
किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभिः।
श्यामे त्वमेव यदि किञ्चन मय्यनाथे
धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव॥

आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं
करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि।
नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः
क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति॥

जगदम्ब विचित्रमत्र किं परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि।
अपराधपरम्परापरं न हि माता समुपेक्षते सुतम्॥

मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि।
एवं ज्ञात्वा महादेवि यथा योग्यं तथा कुरु॥

📥 देवापराध क्षमापन स्तोत्र PDF

पूजा में हुई सभी ज्ञात-अज्ञात त्रुटियों की क्षमा हेतु देवापराध क्षमापन स्तोत्र PDF डाउनलोड करें।

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पाठ का लाभ

इस स्तोत्र के श्रद्धापूर्वक पाठ से पूजा-पाठ में हुई भूल-चूक शांत होती है।
देवी की कृपा प्राप्त होती है और साधना पूर्ण मानी जाती है।

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⚠️ डिसक्लेमर

इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है।

विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं।

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