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दुर्गा स्तोत्रम् | माँ दुर्गा का चमत्कारी स्तोत्र पाठ, जप विधि और लाभ

Durga Stotram | माँ दुर्गा का चमत्कारी स्तोत्र (पाठ, जप विधि और लाभ) 

दुर्गा स्तोत्रम् माँ दुर्गा की स्तुति में रचा गया एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भय, रोग, शत्रु और नकारात्मकता से रक्षा करता है। इसका पाठ साधक को मानसिक बल, साहस और आत्मशक्ति प्रदान करता है।

दुर्गा स्त्रोतम | Durga Stotram 

(श्री व्यास जी द्वारा रचित)

📖 फलश्रुति

जो साधक इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक, शुद्ध मन से नित्य पाठ करता है, उसके घर में माँ भगवती का सदैव वास होता है और सब प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।

शिव कृत दुर्गा स्तोत्र 

(भगवान शंकर द्वारा रचित)

रक्ष रक्ष महादेवि दुर्गे दुर्गतिनाशिनि ।

मां भक्तमनुरक्तं च शत्रुग्रस्तं कृपामयि ॥

विष्णुमाये महाभागे नारायणि सनातनि।

ब्रह्मस्वरूपे परमे नित्यानन्दस्वरूपिणि ॥

त्वं च ब्रह्मादिदेवानामम्बिके जगदम्बिके ।

त्वं साकारे च गुणतो निराकारे च निर्गुणात् ॥

मायया पुरुषस्त्वं च मायया प्रकृतिः स्वयम् ।

तयोः परं ब्रह्म परं त्वं विभर्षि सनातनि ॥

वेदानां जननी त्वं च सावित्री च परात्परा ।

वैकुण्ठे च महालक्ष्मीः सर्वसम्पत्स्वरूपिणी ॥

मर्त्यलक्ष्मीश्च क्षीरोदे कामिनी शेषशायिनः ।

स्वर्गेषु स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं राजलक्ष्मीश्च भूतले ॥

नागादिलक्ष्मीः पाताले गृहेषु गृहदेवता ।

सर्वशस्यस्वरूपा त्वं सर्वैश्वर्यविधायिनी ॥

रागाधिष्ठातृदेवी त्वं ब्रह्मणश्च सरस्वती ।

प्राणानामधिदेवी त्वं कृष्णस्य परमात्मनः ॥

गोलोके च स्वयं राधा श्रीकृष्णस्यैव वक्षसि ।

गोलोकाधिष्ठिता देवी वृन्दावनवने वने ॥

श्रीरासमण्डले रम्या वृन्दावनविनोदिनी ।

शतशृङ्गाधिदेवी त्वं नाम्ना चित्रावलीति च ॥

दक्षकन्या कुत्र कल्पे कुत्र कल्पे च शैलजा ।

देवमातादितिस्त्वं च सर्वाधारा वसुन्धरा ॥

त्वमेव गङ्गा तुलसी त्वं च स्वाहा स्वधा सती ।

त्वदंशांशांशकलया सर्वदेवादियोषितः ॥

स्त्रीरूपं चापिपुरुषं देवि त्वं च नपुंसकम् ।

वृक्षाणां वृक्षरूपा त्वं सृष्टा चाङ्कररूपिणी ॥

वह्नौ च दाहिकाशक्तिर्जले शैत्यस्वरूपिणी ।

सूर्ये तेज: स्वरूपा च प्रभारूपा च संततम् ॥

गन्धरूपा च भूमौ च आकाशे शब्दरूपिणी ।

शोभास्वरूपा चन्द्रे च पद्मसङ्गे च निश्चितम् ॥

सृष्टौ सृष्टिस्वरूपा च पालने परिपालिका ।

महामारी च संहारे जले च जलरूपिणी ॥

क्षुत्त्वं दया तवं निद्रा त्वं तृष्णा त्वं बुद्धिरूपिणी ।

तुष्टिस्त्वं चापि पुष्टिस्त्वं श्रद्धा त्वं च क्षमा स्वयम् ॥

शान्तिस्त्वं च स्वयं भ्रान्तिः कान्तिस्त्वं कीर्तिरेवच ।

लज्जा त्वं च तथा माया भुक्ति मुक्तिस्वरूपिणी ॥

सर्वशक्तिस्वरूपा त्वं सर्वसम्पत्प्रदायिनी ।

वेदेऽनिर्वचनीया त्वं त्वां न जानाति कश्चन ॥

सहस्रवक्त्रस्त्वां स्तोतुं न च शक्तः सुरेश्वरि ।

वेदा न शक्ताः को विद्वान न च शक्ता सरस्वती ॥

स्वयं विधाता शक्तो न न च विष्णु सनातनः ।

किं स्तौमि पञ्चवक्त्रेण रणत्रस्तो महेश्वरि ॥

॥ कृपां कुरु महामाये मम शत्रुक्षयं कुरु ॥

॥ कृपां कुरु महामाये मम शत्रुक्षयं कुरु ॥

फलश्रुति

इस स्तोत्र का पाठ करने से शत्रु नष्ट होते हैं, रोग-दरिद्रता दूर होती है और साधक को परम कृपा मिलती है।

दुर्गा स्तोत्र के लाभ (Durga Stotra Benefits) 

भय, शत्रु और रोगों से रक्षा

मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति

नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा

जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य

माँ दुर्गा की विशेष कृपा

दुर्गा स्तोत्रम जप विधि (How to Chant)

1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें

2. माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएँ

3. लाल चंदन की माला से पाठ करें

4. कम से कम 11 या 21 बार स्तोत्र का पाठ करें

5. नवरात्रि में इसका जप विशेष फलदायक होता है

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FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

Q1. दुर्गा स्तोत्रम् का जाप किस समय करें ?

👉 प्रातःकाल या संध्या के समय शांत वातावरण में करें।

Q2. क्या यह स्तोत्र घर में पढ़ा जा सकता है ?

👉 हाँ, इसे घर में श्रद्धा से पढ़ा जा सकता है।

Q3. क्या स्त्रियाँ भी इसका पाठ कर सकती हैं ?

👉 बिल्कुल, स्त्रियाँ और पुरुष दोनों पाठ कर सकते हैं।

Call To Action (CTA) 

क्या आप प्रतिदिन दुर्गा स्तोत्रम् का पाठ करते हैं ? नीचे कमेंट में जय माता दी लिखें और अपने अनुभव साझा करें!

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