
श्री माँ ललिता महात्रिपुरसुन्दरी जयंती विशेष | कथा, मंत्र, साधना, श्रीविद्या रहस्य
माघ पूर्णिमा का दिन आद्याशक्ति श्री ललिता त्रिपुरसुन्दरी को समर्पित है।
इन्हें षोडशी महाविद्या, श्रीविद्या और राजराजेश्वरी भी कहा जाता है।
ये भोग और मोक्ष दोनों देने वाली देवी हैं।
मां ललिता प्राकट्योत्सव का पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है, इस दिन मां ललिता की पूजा की जाती है। इन्हें महात्रिपुरसुन्दरी, षोडशी, ललिता, लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी, तथा राजराजेश्वरी भी कहते हैं। इन्हें दस महाविद्याओं की तीसरी महाविद्या माना जाता है। ललिता प्राकट्योत्सव प्रत्येक वर्ष माघ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाती है। इस दिन मां ललिता की आराधना करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस दिन मां ललिता के साथ ही स्कंदमाता और भगवान शंकर की पूजा भी की जाती है। माता ललिता को राजेश्वरी, षोडशी, त्रिपुरा सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन माँ के मन्त्र ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः का जाप करना चाहिये।
🔱 माँ षोडशी कौन हैं ?
- दस महाविद्याओं में चौथा स्थान
- सोलह कलाओं से पूर्ण
- श्रीचक्र की अधिष्ठात्री
- शिव की पराशक्ति
🌞 दिव्य स्वरूप
माता का वर्ण उदीयमान सूर्य जैसा है।
तीन नेत्र हैं।
चार भुजाएँ — पाश, अंकुश, धनुष, बाण।
शांत मुद्रा में सदाशिव पर स्थित कमल आसन पर विराजमान।
📖 ललिता प्रादुर्भाव कथा
भण्डासुर नामक असुर ने देवताओं को कष्ट दिया।
देवताओं ने तांत्रिक महायज्ञ किया।
यज्ञ अग्नि से तेजस्विनी त्रिपुराम्बा प्रकट हुईं।
माता ललिता ने अपनी शक्तियों के साथ भण्डासुर का वध किया।
🔯 श्रीविद्या साधना का महत्व
यह साधना सर्वोच्च तांत्रिक साधना मानी गई है।
साधक को भोग और मोक्ष दोनों देती है।
✨ साधना के लाभ
- विवाह बाधा दूर
- गृहस्थ सुख
- संतान प्राप्ति
- ऐश्वर्य
- विद्या और कला सिद्धि
- कुण्डलिनी जागरण
- आध्यात्मिक उन्नति
🕉 षोडशी मंत्र
मुख्य मंत्र:
ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं
बीज मंत्र: ह्रीं
🪔 साधना नियम
- प्रारंभ पूर्णिमा से करें
- रात 9 से 1 बजे श्रेष्ठ समय
- दीपक जलाएँ
- सात्विक भोजन करें
- क्रोध त्यागें
- स्त्री सम्मान रखें
- श्री यंत्र के सामने जप उत्तम
🌸 ललिता पंचरत्न स्तोत्र का महत्व
आदि शंकराचार्य रचित यह स्तोत्र अत्यंत प्रभावशाली है।
प्रातः पाठ से विद्या, धन, सुख और कीर्ति मिलती है।
🧘 देवी ध्यान
तीन प्रमुख ध्यान बताए गए हैं
बाला त्रिपुरसुन्दरी, षोडशी और श्री ललिता।
ध्यान से मन शुद्ध होता है।
🔺 श्रीचक्र उपासना
श्रीचक्र को यंत्रराज कहा गया है।
इसमें सभी महाविद्याएँ स्थित हैं।
विग्रह न हो तो श्रीयंत्र ही पर्याप्त है।
🌕 जयंती तिथि
माघ मास की पूर्णिमा को ललिता जयंती मनाई जाती है।
इस दिन ललिता सहस्रनाम, खड्गमाला और श्रीसूक्त पाठ करें।
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❓ FAQ
ललिता त्रिपुरसुन्दरी कौन हैं ?
आद्याशक्ति का श्रीविद्या स्वरूप। भोग और मोक्ष देने वाली देवी।
जयंती कब मनाई जाती है ?
माघ पूर्णिमा।
कौन सा मंत्र जपें ?
षोडशी मंत्र या ‘ह्रीं’ बीज मंत्र।
क्या बिना गुरु के साधना कर सकते हैं ?
सामान्य स्तोत्र पाठ कर सकते हैं। मंत्र दीक्षा गुरु से लें।
श्रीचक्र का महत्व क्या है ?
यह देवी का यंत्र रूप है। सभी शक्तियाँ इसमें स्थित हैं।
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