
पापमोचिनी एकादशी 2026 कब है ? शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, कथा और महत्व
पापमोचिनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत पापों के नाश और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
📅 पापमोचिनी एकादशी 2026 तिथि शुभ मुहूर्त
- व्रत तिथि: 15 मार्च 2026 (रविवार)
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 मार्च 2026 रात्रि लगभग 08:45 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 15 मार्च 2026 रात्रि लगभग 09:10 बजे
- पारण समय: 16 मार्च 2026 प्रातः 06:20 से 08:45 बजे तक
पापमोचिनी एकादशी व्रत विधि
- दशमी तिथि को एक समय सात्विक भोजन करें।
- एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा करें।
- उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें।
- 11 पीले फल, 11 फूल और 11 पीली मिठाई चढ़ाएं।
- पीला चंदन और जनेऊ अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम या भगवत कथा का पाठ करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन करें और जागरण करें।
- द्वादशी को ब्राह्मण भोजन करवाकर व्रत का पारण करें।
📖 पापमोचिनी एकादशी कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार इस व्रत की कथा श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद में वर्णित है। राजा मान्धाता ने लोमश ऋषि से पूछा कि पापों से मुक्ति कैसे मिले।
लोमश ऋषि ने बताया कि चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। महर्षि मेधावी और अप्सरा मञ्जुघोषा की कथा इस व्रत से जुड़ी है। व्रत के प्रभाव से दोनों को पापों से मुक्ति मिली।
✨ पापमोचिनी एकादशी का महत्व
- महापापों का नाश
- आत्मिक शांति
- मानसिक शुद्धि
- मोक्ष की प्राप्ति
- स्वर्गलोक की प्राप्ति
🪔 भगवान जगदीश जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥
🙇 क्षमायाचना मंत्र
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे॥
क्षमायाचना शुद्ध अर्थ:
हे प्रभु! मैं आपका आवाहन करना नहीं जानता।
न ही आपको विधि से विसर्जित करना जानता हूँ।
मुझे आपकी पूजा करने की सही विधि भी नहीं आती।
कृपा करके मेरी भूलों को क्षमा करें।
हे भगवान! न मुझे मंत्रों का पूरा ज्ञान है,
न ही मैं शास्त्रीय क्रियाओं में निपुण हूँ।
मैं तो केवल सच्चे मन से आपकी भक्ति कर रहा हूँ।
जो पूजा मैंने अपनी सामर्थ्य अनुसार की है,
उसे पूर्ण मानकर स्वीकार करें।
यदि मुझसे कोई त्रुटि हुई हो,
तो कृपा करके उसे क्षमा करें।
हे दयालु प्रभु!
मेरे अहंकार को दूर करें।
मुझे सद्बुद्धि दें।
मैं आपकी शरण में हूँ।
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❓ FAQ
पापमोचिनी एकादशी किस माह में आती है ?
यह चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
क्या महिलाएं यह व्रत कर सकती हैं ?
हाँ, स्त्री और पुरुष दोनों यह व्रत कर सकते हैं।
व्रत का पारण कब करें ?
द्वादशी तिथि में प्रातःकाल पारण करना चाहिए।
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