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विष्णु सहस्रनाम | पूर्ण पाठ, pdf, महत्व, लाभ, और फलश्रुति

Vishnu Sahasranama pdf विष्णु सहस्रनाम सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इसमें भगवान श्रीहरि विष्णु के एक हजार दिव्य नामों का वर्णन है। यह स्तोत्र महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को उपदेश स्वरूप प्रदान किया गया है। नियमित पाठ से मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि होती है।

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विष्णु सहस्रनाम का महत्व

यह स्तोत्र सभी वेदों और पुराणों का सार माना गया है।

कलियुग में इसे सर्वसुलभ साधना कहा गया है।

नाम-स्मरण से भगवान विष्णु की कृपा सहज प्राप्त होती है।

विष्णु सहस्रनाम फलश्रुति

Vishnu Sahasranama की फलश्रुति में इसके पाठ से प्राप्त होने वाले लाभों का विस्तार से वर्णन है। नियमित पाठ करने वाला व्यक्ति भय, रोग, शोक और पाप से मुक्त होता है। उसे यश, ऐश्वर्य, विद्या और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

विष्णु सहस्रनाम के लाभ

मानसिक शांति प्राप्त होती है।

नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

रोगों से मुक्ति मिलती है।

जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता आती है।

अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

विष्णु सहस्रनाम पाठ के नियम

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. विष्णु सहस्रनाम का पाठ कब करना चाहिए ?

प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या संध्या काल सर्वोत्तम है।

Q2. क्या बिना दीक्षा के पाठ कर सकते हैं ?

हाँ, श्रद्धा ही इसकी सबसे बड़ी दीक्षा है।

Q3. क्या महिलाएँ विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकती हैं ?

हाँ, सभी वर्ग के लोग इसका पाठ कर सकते हैं।

⚠️ डिसक्लेमर

इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है।

विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं।

हमारा उद्देश्य केवल सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दी जा सकती।

कृपया किसी भी प्रकार के उपयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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