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नवरात्रि 2026 चौथा दिन: माँ कूष्मांडा पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती और धन प्राप्ति के उपाय

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती और समृद्धि के उपाय

नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है।
माँ कूष्मांडा को सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि देवी ने अपनी मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी।

मंत्र

सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधानाहस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

मां कूष्मांडा पूजा मुहूर्त 2026

इन शुभ मुहूर्त में माँ कूष्मांडा की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
इस समय पूजा करने से सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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माँ कूष्मांडा का स्वरूप और महत्व

माँ दुर्गा का चौथा स्वरूप कूष्मांडा है। इनका निवास सूर्य मंडल के मध्य बताया गया है।
इनकी तेजस्विता सूर्य के समान मानी जाती है।

देवी के आठ हाथ हैं इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है।
इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला होती है।

माँ कूष्मांडा का वाहन सिंह है। देवी अपने भक्तों को स्वास्थ्य, आयु और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

मां कूष्मांडा पूजा विधि

माँ कूष्मांडा शप्तशती मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

माँ कूष्मांडा ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥

भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।

कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥ पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।

कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

माँ कूष्मांडा स्तोत्र

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।

जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।

चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्।

परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥

माँ कूष्मांडा की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार था, तब माँ कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की।

इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति कहा जाता है। देवी सूर्य मंडल के मध्य निवास करती हैं और पूरे ब्रह्मांड को ऊर्जा प्रदान करती हैं।

धन और समृद्धि पाने के उपाय

विशेष उपाय

यदि व्यापार में बाधा आ रही हो या सफलता नहीं मिल रही हो तो कद्दू का विशेष उपाय करें।

चार कद्दू लाल कपड़े पर रखें और माता की पूजा करें। इसके बाद मंत्र जप करके कद्दू को अपने ऊपर से 11 बार उतार लें।

फिर कद्दू के छोटे टुकड़े करके जल में प्रवाहित कर दें। इससे नकारात्मकता दूर होती है।

माँ कूष्मांडा की आरती

ॐ जय माँ कुष्मांडाचौथ जब नवरात्र हो, कुष्मांडा को ध्याते।

जिसने रचा ब्रह्माण्ड यह, पूजन है करवाते।।

ॐ जय माँ कुष्मांडा

आद्यशक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।

इस शक्ति के तेज से, कही छाँव कही धुप।।

ॐ जय माँ कुष्मांडा

कुम्हड़े की बलि करती है, तांत्रिक से स्वीकार।

पेठे से भी रजति, सात्विक करे विचार।।

ॐ जय माँ कुष्मांडा

क्रोधित जब हो जाए, यह उल्टा करे व्यवहार।

उसको रखती दूर माँ, देती दुःख अपार।।

ॐ जय माँ कुष्मांडा

सूर्य चंद्र की रौशनी, यह जग में फैलाये।

शरणागत में आया, माँ तू ही राह दिखाये।।

ॐ जय माँ कुष्मांडा।

माँ दुर्गा की आरती

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…

कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।

भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।

>मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…

निष्कर्ष

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा करने से रोग, शोक और दरिद्रता दूर होती है।
माँ की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।

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FAQ

Q1. माँ कूष्मांडा की पूजा कब की जाती है ?

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है।

Q2. माँ कूष्मांडा को कौन सा भोग प्रिय है ?

माँ कूष्मांडा को कद्दू (कूष्मांड) का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है।

Q3. माँ कूष्मांडा की पूजा से क्या लाभ होता है ?

माँ की पूजा से स्वास्थ्य, आयु, यश और धन की प्राप्ति होती है।

Q4. माँ कूष्मांडा का वाहन क्या है ?

माँ कूष्मांडा का वाहन सिंह है।

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