Hariyali Amavasya: पितृ दोष के चलते यदि आपके काम बनते-बनते बिगड़ जा रहें हैं तो हरियाली अमावस्या पर यह उपाय जरूर करें. पितृ दोष के संकट से छुटकारा मिल जायेगा. 

Hariyali Amavasya: सावन मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा का विधान है। इस दिन सुहागिनें श्रृंगार का सामान बांटती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन पीपल के मूल भाग में जल, दूध चढ़ाने से पितृ तृप्त होते हैं। शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनिदेव शांत होते हैं। जानिए हरियाली अमावस्या का महत्व, कथा पूजन विधि

हरियाली अमावस्या की पूजा विधि 

सुबह जल्दी उठकर स्नान करके भगवान शिव और पार्वती की पूजा करनी चाहिए। सुहागन महिलाओं को माता पार्वती की पूजा करने के बाद सुहाग सामग्री बांटनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन जो भी महिला सुहाग सबंधी सामग्री जैसे हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी बांटती है उसके सुहाग की आयु लंबी होती है और घर में खुशहाली बनी रहती है। हरियाली अमावस्या के दिन पीपल और तुलसी के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और प्रसाद में मालपुआ का भोग लगाना चाहिए। जो लोग इस दिन उपवास रखते हैं वो शाम को भोजन ग्रहण करके अपना व्रत खोलते हैं।

पार्वतीजी की परीक्षा का दिन है हरियाली अमावस्या 

जानें, कैसे भगवान शंकर व पार्वती के विवाह के प्रसंग से जुड़ा है हरियाली अमावस्या का पर्व ? इस शुभ दिन की क्या महिमा है ? 

श्रावण का पूरा महीना ही भगवान शंकर व पार्वती से जुड़ा है । ऐसा ही श्रावण मास का एक पवित्र दिन है कृष्ण पक्ष की अमावस्या, जिसे ‘हरियाली अमावस्या’ कहते हैं ।

जानें क्यों मनाई जाती है हरियाली अमावस्या ? 

इस पर्व को मनाने के पौराणिक व पर्यावरणीय दो कारण हैं पौराणिक कारण भगवान शंकर व पार्वतीजी के विवाह से जुड़ा है 

पर्यावरणीय कारण श्रावण मास में भूमि पर हरियाली ऐसे बिछ जाती है मानो किसी ने घास का गद्दा बिछा दिया हो । प्रकृति की सुन्दरता का जश्न मनाने के लिए बाग-बगीचों में पेड़ों पर झूला झूलने का व इस दिन वृक्षारोपण कर पर्यावरण की रक्षा करने का संदेश दिया गया है । वर्तमान समय में जबकि पर्यावरण के असंतुलन से चारों तरफ भीषण प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल रही हैं, हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह ज्यादा-से-ज्यादा नए वृक्ष लगाकर इस पर्व को जोर-शोर से मनाए

‘व्रज’ प्रेम की भूमि है और उसकी भाषा मन को मिश्री की डली के समान मिठास प्रदान करने वाली है। ऐसी व्रजभूमि में जब सावन पदार्पण करता है तो आकाश में श्याम घटाएं घिरने लगती हैं, बादल झुक-झुक कर पृथ्वी को चूम लेने के लिए आतुर हो उठते हैं, बिजली चमकने लगती है, रिमझिम फुहारों व सीरी-सीरी बयार की शीतलता शरीर को आनन्दित करती है, यमुना अपने कूल-कछारों (तटों) को तोड़ी-फोड़ती तीव्र गति से बहती चली जाती है, लता-पताएं हरी-भरी और पुष्ट होकर वृक्षों से लिपटकर झूलने लगती हैं, मोर कूकने लगते हैं, पपीहा पीउ-पीउ कर अपनी प्रियतमा को बुलाते हैं, कोयल कुहू कुहू की मीठी तान छेड़ देती है, सरोवरों में हंस अठखेलियाँ करते हैं, दादुर, मोर, पपीहे की आवाजों से सारा ब्रज क्षेत्र आनन्दित हो जाता है, बादल भी जोर-जोर से गर्जना करते हैं।

चम्पा, चमेली, मोगरा, मालती आदि पुष्पों की सुगन्ध व स्त्रियों के मधुरकंठों से मल्हार व कजरी का संगीत हवा में फैल जाता है। भूमि पर हरियाली ऐसे बिछ जाती है मानो किसी ने घास का गद्दा बिछा दिया हो। ऐसे मनभावन सावन में उमंगों की तरंगों में झूलता मन गांव-गली-बगीचों में पेड़ों पर पड़े झूलों पर चढ़ने को विवश हो जाता है।

हरियाली अमावस्या : पार्वतीजी के तप की परीक्षा का दिन 

भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए पार्वतीजी बड़ी कठिन तपस्या कर रही थीं । उस तपस्या से समाधिस्थ शिव भी विचलित हो गए । ऐसा माना जाता है कि हरियाली अमावस्या के दिन शंकरजी ने पार्वतीजी के तप की परीक्षा लेने के लिए सप्त ऋषियों को उनके पास भेजा था । सप्त ऋषि पार्वतीजी के निश्चय की परीक्षा करने के लिए भगवान शंकर के बारे में मिथ्या बातें करने लगे

शंकरजी लज्जा को छोड़कर नंग-धड़ंग कैलास पर्वत और श्मशान में भूत-प्रेतों के साथ रहते हैं, केशों को जटाजूट बना रखा है, कण्ठ में विष धारण किया हुआ है, मुण्डमाला पहनते हैं, अंगों में चिताभस्म व सर्प लपेटे रहते हैं, भांग-धतूरा आदि खाते हैं, उन्मत्त होकर ताण्डव नृत्य करते हैं, उनके कुल, खानदान माता-पिता, पितामह, गोत्र, जाति आदि का कोई पता नहीं है । वे खेती, व्यापार, अन्न, धन व गृह से शून्य हैं, तुम्हारा निर्वाह कैसे होगा ? वे तो उदासीन और काम के शत्रु हैं

पहले सती से विवाह किया और कुछ दिन साथ रहकर उस बेचारी को त्याग दिया और खुद स्वतन्त्र होकर ध्यान में रम गए । ऐसे वर को पाकर तुम्हें क्या सुख मिलेगा ? वर के रूप, कुल, धन आदि जो कुछ गुण देखे जाते हैं, वे उस शंकर में तो एक भी नहीं है ?

लोक में प्रसिद्ध है

कन्या वरयते रूपं माता वित्तं पिता श्रुतम् ।

बान्धवा: कुलमिच्छन्ति मिष्टान्न मितरे जना: ।। 

अर्थात वर के अंदर कन्या रूप, माता धन, पिता विद्या और बंधु-बान्धव अच्छा कुल देखना चाहते हैं किन्तु आम आदमी मिठाइयों पर नजर रखता है । अब तुम ही देखो उस विरुपाक्ष (तीन नेत्रों वाले) में इनमें से कौन-सी बात है ?

अत: तुम उनको छोड़ दो और लक्ष्मीपति भगवान विष्णु को जो वैकुण्ठ में रहते हैं, अपना पति चुन लो

पार्वतीजी ने हंसते हुए सप्त ऋषियों से कहा 

भगवान शंकर स्वयं अकिंचन हैं किन्तु संसार की समस्त सम्पत्तियां उन्हीं से उत्पन्न हुई हैं । वह भयंकर रूप हैं फिर भी कल्याणकारी कहे जाते हैं । महादेवजी तो विश्वेश्वर (विश्व के स्वामी) हैं, उन्हें खेती, व्यापार या नौकरी की क्या आवश्यकता है ?

वे नंगे रहें, गजचर्म पहनें, या रेशमी वस्त्र से सुसज्जित हों, शरीर में सांप लपेटें या रत्न-आभूषण; वे त्रिशूल, खप्पर आदि लें या उनके शीश पर चन्द्रमा चमकता रहे, इससे उनके विश्व के स्वामी होने में कोई अंतर नहीं आता है मैं आप लोगों की सीख नहीं सुनना चाहती हूँ, कृपया आप लोग अपने स्थान को पधारें मैं शंकरजी के सिवाय किसी और को अपना पति नहीं बनाऊंगी । प्रसन्न होकर सप्त ऋषियों ने दिया पार्वती को अटल सुहाग का वरदान

यह सुनकर सप्त ऋषि पार्वतीजी की जय-जयकार करने लगे और उन्हें अटल सुहाग का वरदान देकर शंकरजी के पास वापिस चले आए । वहां आकर उन्होंने पार्वतीजी की परीक्षा का पूरा विवरण सुनाया । यह सुनकर शंकरजी बहुत प्रसन्न हुए और सप्त ऋषियों को यह कहकर राजा हिमाचल के पास भेजा कि वे पार्वतीजी को घर लाकर विवाह की तैयारी करें ।

सप्त ऋषियों ने शंकरजी का समाचार राजा हिमाचल को सुनाया तो वे बहुत प्रसन्न हुए । राजा हिमाचल अपनी पत्नी व अन्य सुहागिन स्त्रियों के साथ सजधज कर नाचते गाते हुए पार्वतीजी के पास गए और उन्हें अपने घर ले आए । राजा हिमाचल के घर नित्य उत्सव होने लगे, खुशियां मनायी जाने लगीं व मिठाइयां बांटी जाने लगीं । तभी से हरियाली अमावस्या का त्यौहार मनाया जाने लगा

हरियाली अमावस्या पर्व का महत्व Importance of Hariyali Amavasya festival 

हरियाली अमावस्या पर शिव-पार्वतीजी की पूजा से कुंवारी कन्याओं को श्रेष्ठ वर प्राप्त होता है व विवाहित स्त्रियों के सौभाग्य की वृद्धि होती है

इस दिन किसी नदी या जलाशय में स्नान करके ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितृगण प्रसन्न होते हैं

इस दिन वृक्ष लगाने का भी अत्यन्त महत्व है । जिनके संतान नहीं हैं, उनके लिए वृक्ष ही संतान का रूप हैं ।

महाभारत के अनुशासनपर्व में कहा गया है ‘वृक्ष लगाने वाला पुरुष अपने पूर्वजों और भविष्य में होने वाली संतानों का तथा पिता के कुल का भी उद्धार कर देता है। जो वृक्ष लगाता है, उसके लिए वे वृक्ष पुत्ररूप होते हैं । उन्हीं के कारण परलोक में उसे स्वर्ग व अक्षयलोक प्राप्त होते हैं

वृक्षों में है देवताओं का वास

इस दिन अपनी कामना के अनुसार वृक्ष अवश्य लगाने चाहिए पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। इसको लगाने से सद्गति मिलती है । संतान प्राप्ति के लिए पीपल, नीम, गुड़हल और अश्वगंधा लगाना चाहिए । लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कदम्ब, आंवला, जामुन, व बेलपत्र, शोक दूर करने के लिए अशोक, ज्ञान व उत्तम पत्नी प्राप्त करने के लिए पाकड़, दीर्घायु के लिए बेलपत्र व रोगनाश के लिए शमी लगाना चाहिए

इस तरह लोगों को प्रकृति के करीब लाने व पर्यावरण की रक्षा के लिए यह पर्व मनाया जाता है

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हरियाली अमावस्या के उपाय

इस दिन पवित्र नदियो में स्नान, ब्राह्मण भोज,गौ दान, अन्नदान,वस्त्र,स्वर्ण आदि दान का विशेष महत्त्व माना गया है,इस दिन गंगा स्नान का भी विशिष्ट महत्त्व है।

माँ गंगा या किसी पवित्र सरोवर में स्नान कर शिव-पार्वती एवं तुलसी की विधिवत पूजा करें।

भगवान् शिव पर बेलपत्र, बेल फल,मेवा,मिठाई,जनेऊ का जोड़ा आदि चढ़ा कर ॐ नमः शिवाय की 11 माला करने से असाध्य कष्टो में भी कमी आती है।

प्रातः काल शिव मंदिर में सवा किलो साबुत चांवल दान करे।

सूर्योदय के समय सूर्य को जल में लाल फूल,चन्दन डाल कर गायत्री मन्त्र जपते हुए अर्घ देने से दरिद्रता दूर होती है।

हरियाली अमावस्या को तुलसी के पौधे की ॐ नमो नारायणाय जपते हुए 108 बार परिक्रमा करने से दरिद्रता दूर होती है।

जीन लोग का सूर्य कमजोर है वो गाय को गुड़ में पकाए गेंहू और चांवल खिलाये अवश्य ही मानसिक शांति मिलेगी।

मन्त्र जप,साधना एवं दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

इस दिन स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी विवाद, आर्थिक परेशानियो और पति-पत्नी सम्बन्धि विवाद के समाधान के लिए किये गए उपाय अवश्य ही सफल होते है।

इस दिन धोबी-धोबन को भोजन कराने,उनके बच्चों को किताबे मिठाई फल और दक्षिणा देने से सभी मनोरथ पूर्ण होते है।

हरियाली अमावस्या को भांजा, ब्राह्मण, और ननद को मिठाई, फल,खाने की सामग्री देने से उत्तम फल मिलाता है।

इस दिन अपने आसपास के वृक्ष पर बैठे कौओं और जलाशयों की मछलियों को (चावल और घी मिलाकर बनाए गए) लडडू दीजिए। यह पितृ दोष दूर करने का उत्तम उपाय है।

हरियाली अमावस्या के दिन दूध से बनी खीर दक्षिण दिशा में (पितृ की फोटो के सम्मुख) कंडे की धूनी लगाकर पितृ को अर्पित करने से भी पितृ दोष में कमी आती है।

हरियाली अमावस्या के समय जब तक सूर्य चन्द्र एक राशि में रहे, तब कोई भी सांसरिक कार्य जैसे-हल चलाना, कसी चलाना, दांती, गंडासी, लुनाई, जोताई, आदि तथा इसी प्रकार से गृह कार्य भी नहीं करने चाहिए।

इस हरियाली अमावस्या पर राशि के अनुसार कौन सा पौधे लगाने से आपके संकट और पितृ दोष दूर होगा 

1-मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए इस अमावस्या पर आंवले का पौधा लगाना सबसे उत्तम है।

2- वृष राशि 

वृष राशि के जातक जामुन का पौधा लगाएं तो उनके सारे कष्ट समाप्त हो जाएंगे।

3- मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों को इस अमावस्या पर चंपा के फूलों का पौधा लगान चाहिए।

4- कर्क राशि 

कर्क राशि के जातक ज्योतिष के अनुसार पीपल का पौधा लगांए।

5- सिंह राशि 

सिंह राशि के जातकों को पितृ दोष से मुक्ति के लिए बरगद का पेड़ लगाना चाहिए।

6- कन्या राशि

कन्या राशि के जातके इस अमावस्या पर बेल का पेड़ लगाएं, भगवान शिव उन पर अवश्य कृपा करेंगे।

7- तुला राशि

तुला राशि वालों को अर्जुन का पेड़ लगाना चाहिए।

8- वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि के जातक इस अमावस्या पर नीम का पौधा लगाना चाहिए।

9- धनु राशि 

धुन राशि के जातक कनेर का पेड़ लगांए।

10- मकर राशि 

मकर राशि के जातकों को शमी का वृक्ष लगाना चाहिए।

11- कुंभ राशि

कुभं राशि के जातक इस अमावस्या पर आम का पौधा लगाएं।

12- मीन राशि 

मीन राशि के जातकों बेर का पौधा लगान चाहिए ।

राशि के अनुसार उपाय 

मेष : लाल राईं या सरसों का तेल किसी गरीब को दान में दें। (राशि ग्रह मंगल अनुसार)- पारस पीपल, लाल चंदन, केशर का पौधा लगाए।

वृषभ : गौशाला में गाय-बछड़ों के लिए हरा चारा दान करें। (राशि स्वामी शुक्र के लिये)- सुगंधित फूल, पारिजात, औषधीय पौधे, गुलर, शतावरी का पौधा लगाएं।

मिथुन : उड़द के आटे की गोलियां बनाकर मछलियों के लिए तालाब या नदी में डालें।

(राशि स्वामी बुध के लिये)- मेहंदी, नागपवित्री, तुलसी लटजीरा।

कर्क : काले पत्थर के शिवलिंग पर कच्चे दूध से अभिषेक करें। नि:शक्तों को मीठे चावल खिलाएं। (राशि स्वामी चंद्र के लिये)- सफेद फूल वाले पौधे, गन्ना, सफेद चंदन का पौधरोपण करें।

सिंह : गरीबों को गेहूं दान करें। दुर्गा देवी का पूजन लाल फूलों से करें। (राशि स्वामी सूर्य के लिये)- आंकड़ा, नारियल, बादाम, लाल फूल वाले पौधे लगाए।

कन्या : तुलसी के 11 पौधे भेंट करें। बरगद के पेड़ में जल अर्पित करें और पेड़ के नीचे बाजरा बिखेर दें। (राशि स्वामी बुध के अनुसार)- मेहंदी, नागपवित्री, तुलसी लटजीरा का पौधा लगाएं।

तुला : शिव या हनुमान मंदिर में दर्शन करें। गरीब कन्याओं को दूध और दही का दान दें। (राशि स्वामी शुक्र के लिये)- सुगंधित फूल, पारिजात, औषधीय पौधे, गुलर, शतावरी का पौधा लगाएं।

वृश्चिक : पीपल के पेड़ में जल चढ़ाकर पूजन करें। शाम को दीप दान करें। (राशि ग्रह मंगल अनुसार)- पारस पीपल, लाल चंदन, केशर का पौधा लगाए।

धनु : दृष्टिहीन बालक को मीठा दूध पिलाएं। गरीब परिवार में चने की दाल या बेसन से बनी मिठाई दान करें। (राशि स्वामी गुरु के लिये)- पीपल, नागरमोथा, पीली हल्दी, नीम, विष्णुकांता के पौधे लगाए।

मकर : पक्षियों को बाजरा डालें। शनिदेव का पूजन नीले पुष्पों से करें। (राशि स्वामी शनि के अनुसार)- बरगद, पलाश, महुआ,आंवला, शमी, तगर का पौधा लगाएं।

कुंभ : बहते पानी में सवा पाव चावल और 2 नारियल प्रवाहित करें। शनि मंदिर के बाहर बैठे भिखारियों को भोजन करवाएं।

(राशि स्वामी शनि के अनुसार)- बरगद, पलाश, महुआ,आंवला, शमी, तगर का पौधा लगाएं।

मीन : मिट्टी के पात्र में शहद भरकर मंदिर में रखकर आएं। चीटियों की बांबी में आटा रखें। (राशि स्वामी गुरु के लिये)- पीपल, नागरमोथा, पीली हल्दी, नीम, विष्णुकांता के पौधे लगाए।

विशेष कामना सिद्धि हेतु उपाय 

लक्ष्मी प्राप्त के लिए तुलसी, आंवला, बिल्वपत्र का वृक्ष लगाएं.

आरोग्य प्राप्त के लिए ब्राह्मी, पलाश, अर्जुन, आंवला, सूरजमुखी या तुलसी लगाएं.

सौभाग्य प्राप्त हेतु अशोक, अर्जुन, नारियल, वट का वृक्ष लगाएं.

संतान प्राप्‍ति के लिए पीपल, नीम, बिल्व, नागकेशर, गुड़हल, अश्वगंधा लगाएं.

मेधा वृद्धि प्राप्त हेतु आंकडा, शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी, तुलसी लगाएं.

सुख प्राप्ति के लिए नीम, कदम्ब, घनी छायादार वृक्ष लगाएं.

आनन्द प्राप्त के लिए पारिजात, रातरानी, मोगरा, गुलाब लगाएं।

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