श्री ललिता पंचरत्न स्तोत्र | अर्थ, लाभ और पूजा विधि

माता ललिता त्रिपुरसुंदरी श्रीचक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। उन्हें षोडशी, राजराजेश्वरी और त्रिपुरा कहा जाता है। यह स्तोत्र अत्यंत शुभ माना जाता है। श्री ललिता पंचरत्न स्तोत्र का बहुत सुंदर पाठ साझा किया जा रहा है। यह सच में अत्यंत दिव्य स्तुति है। माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी की उपासना करने वालों के लिए यह रत्न समान माना जाता है।

यह स्तोत्र आदि शंकराचार्य रचित माना जाता है और इसमें देवी के रूप, करुणा, शक्ति और कृपा का अद्भुत वर्णन है। प्रातःकाल इसका पाठ विशेष फलदायी कहा गया है।

नीचे इसे व्यवस्थित रूप में समझ लेते हैं ताकि पूजा में उपयोग आसान हो:

श्री ललिता पंचरत्न स्तोत्र

🌺 श्रीललितापञ्चरत्नस्तोत्रम् 🌺

प्रातः स्मरामि ललितावदनारविन्दं

बिम्बाधरं पृथुलमुक्तिकशोभिनासम्।

आकर्णदीर्घनयनं मणिकुण्डलाढ्यं

मन्दस्मितं मृगमदोज्ज्वलफालदेशम्॥१॥

प्रातर्भजामि ललिताभुजकल्पवल्लीं

रक्ताङ्गुलीयलसदङ्गुलिपल्लवाढ्याम्।

माणिक्यहेमवलयाङ्गदशोभमानां

पुण्ड्रेक्षुचापकुसुमेषु सृणिं दधानाम्॥२॥

प्रातर्नमामि ललिताचरणारविन्दं

भक्तेष्टदाननिरतं भवसिन्धुपोतम्।

पद्मासनादिसुरनायकपूजनीयं

पद्माङ्कुशध्वजसुदर्शनलाञ्छनाढ्यम्॥३॥

प्रातः स्तुवे परशिवां ललितां भवानीं

त्रय्यन्तवेद्यविभवं करुणानवद्याम्।

विश्वस्य सृष्टिविलयस्थितिहेतुभूतां

विद्येश्वरीं निगमवाङ्मनसातिदूराम्॥४॥

प्रातर्वदामि ललिते तव पुण्यनाम

कामेश्वरीति कमलेति महेश्वरीति।

श्रीशाम्भवीति जगतां जननी परेति

वाग्देवतेति वचसा त्रिपुरेश्वरीति॥५॥

फलश्रुति

यः श्लोकपञ्चकमिदं ललिताम्बिकायाः

सौभाग्यदं सुललितं पठति प्रभाते।

तस्मै ददाति ललिता झटिति प्रसन्ना

विद्यां श्रियं विमलसौख्यमनन्तकीर्तिम्॥६॥

🙏 ॥ इति श्रीललितापञ्चरत्नस्तोत्रम् ॥

ललिता पंचरत्न स्तोत्र सरल अर्थ

  1. यह स्तोत्र माता के दिव्य सौंदर्य का ध्यान है।
  2. पहले श्लोक में उनके मुखमंडल का वर्णन है।
  3. दूसरे में उनके करकमलों का।
  4. तीसरे में उनके चरणों की महिमा है।
  5. चौथे में उन्हें ब्रह्मविद्या स्वरूप बताया गया है।
  6. पाँचवें में उनके पवित्र नामों का जप है।
  7. छठा श्लोक फल स्तुति है।
  8. देवी केवल रूप नहीं, बल्कि चेतना की शक्ति हैं।

श्री ललिता पंचरत्न स्तोत्र का महत्व

  • यह माँ ललिता के सौंदर्य और दिव्य स्वरूप का ध्यान है
  • साधक में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है
  • श्रीचक्र उपासना में विशेष उपयोगी
  • मनोकामना पूर्ति हेतु प्रभावी स्तोत्र माना जाता है
  • विद्या, सौभाग्य और यश देने वाला

ललिता पूजा विधि

  • प्रातः स्नान करें।
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
  • माँ ललिता या श्रीचक्र का चित्र रखें।
  • घी का दीपक जलाएँ।
  • लाल फूल अर्पित करें।
  • कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ।
  • पंचरत्न स्तोत्र का पाठ करें।
  • अंत में “श्री मातायै नमः” का 108 जप करें।

पाठ का श्रेष्ठ समय

  • ब्रह्ममुहूर्त
  • शुक्रवार
  • पूर्णिमा
  • नवरात्रि
  • श्रीचक्र स्थापना के समय

स्तोत्र के लाभ

  • ✔ सौभाग्य में वृद्धि
  • ✔ धन और समृद्धि
  • ✔ विद्या प्राप्ति
  • ✔ मानसिक शांति
  • ✔ विवाह सुख
  • ✔ यश और कीर्ति

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: ललिता पंचरत्न स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए ?

प्रातःकाल पढ़ना सर्वोत्तम है।

प्रश्न 2: क्या महिलाएँ भी पाठ कर सकती हैं ?

हाँ, यह स्तोत्र सभी के लिए है।

प्रश्न 3: क्या इससे मनोकामना पूर्ण होती है ?

भक्ति से पाठ करने पर शुभ फल मिलते हैं।

प्रश्न 4: क्या श्रीचक्र के बिना पाठ कर सकते हैं ?

हाँ, चित्र या मन में ध्यान करके भी कर सकते हैं।

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