यशोदा जयंती 2026 | माता यशोदा जन्मोत्सव, पूजा विधि, मंत्र, महत्व
हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों के लिए व्रत करती हैं और उनके सुख की मंगलकामनाएं करती हैं। यह त्यौहार गुजरात, महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारतीय राज्यों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन मां यशोदा का ध्यान करते हुए भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के समक्ष दीपक जलाएं। कलश स्थापित कर मां यशोदा जी के नाम की लाल चुनरी पूजा स्थल पर रखें और मां को मिष्ठान और भगवान कृष्ण को मक्खन का भोग लगाएं। इस दिन संतान सुख से वंचित लोग यदि माता यशोदा का व्रत रखकर विधिपूर्वक पूजन करते हैं, तो उन्हें संतान सुख प्राप्त होता है।
आइए जानते हैं —
यशोदा जयंती का महत्व, पूजा विधि, मंत्र और विशेष उपाय।
क्या है यशोदा जयंती ?
यशोदा जयंती भगवान श्रीकृष्ण की पालनकर्ता माता — माता यशोदा के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। माता यशोदा ने श्रीकृष्ण का पालन-पोषण किया। उनका स्नेह, त्याग और मातृत्व असीम प्रेम का प्रतीक है।
यशोदा जयंती का महत्व
यह दिन मातृत्व प्रेम का पावन उत्सव है। माँ और बच्चे के अटूट संबंध का प्रतीक है।
👩👦 मातृत्व की महिमा
यशोदा ने कृष्ण को जन्म नहीं दिया। फिर भी प्रेम सच्ची माँ जैसा था। माँ का रिश्ता हृदय से होता है।
💖 निष्काम प्रेम
यशोदा को कृष्ण की दिव्यता का ज्ञान नहीं था। फिर भी स्नेह असीम था। यह निःस्वार्थ प्रेम की मिसाल है।
🕉️ भक्ति का सरल मार्ग
भगवान प्रेम से मिलते हैं। यशोदा का वात्सल्य भाव भक्ति का श्रेष्ठ रूप है।
🏡 परिवार में सुख-शांति
इस दिन पूजा से संतान सुख, शांति और सौभाग्य की कामना की जाती है।
🌟 दामोदर लीला संदेश
भगवान भी प्रेम के बंधन में बंध जाते हैं। प्रेम सबसे बड़ी शक्ति है।
माता यशोदा जयंती 07 फरवरी 2026
🌅 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शुभ मुहूर्त (पूजा करने के श्रेष्ठ समय)
📌 यशोदा जयंती का दिन सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सामान्यतः पूजा ब्रह्म मुहूर्त (सुबह जल्दी) से शुरू करें — इससे मन शांत होता है और भक्ति-भाव गहरा होता है।
💡 सुझाव:
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा तब करे जब तिथि और सूर्यास्त का समय शुभ हो (स्थान-अनुसार पंचांग देखें)।
🪔 पूजा सामग्री
- माता यशोदा और श्रीकृष्ण की प्रतिमा/चित्र
- लाल या पीला कपड़ा
- कलश, गंगाजल
- रोली, चंदन, हल्दी, कुमकुम
- फूल, दीप, धूप
- माखन-मिश्री, फल, मिष्ठान
- तुलसी पत्ते
यशोदा जयंती पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- पूजा चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ।
- माता यशोदा व बाल गोपाल की स्थापना करें।
- रोली, कुमकुम, फूल, तुलसी अर्पित करें।
- माखन-मिश्री का भोग लगाएँ।
- संतान गोपाल मंत्र का जप करें।
- आरती करें और प्रसाद बाँटें।
- गाय को हरा चारा खिलाएँ।
📿 मंत्र
ॐ यशोदे नमः
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
📖 यशोदा जयंती की पौराणिक कथा
माता यशोदा जी गोकुल के नंद बाबा की धर्मपत्नी थीं।
वह अत्यंत सरल, दयालु और मातृ-स्नेह से भरी हुई थीं।
भगवान विष्णु ने जब श्रीकृष्ण रूप में अवतार लिया, तब वे देवकी के गर्भ से जन्मे।
लेकिन कंस के भय से वसुदेव जी उन्हें गोकुल ले आए।
वहीं माता यशोदा ने श्रीकृष्ण का पालन-पोषण किया।
यशोदा जी को यह ज्ञात नहीं था कि उनका लालन-पालन किया हुआ बालक स्वयं भगवान है।
उनका प्रेम निष्कपट मातृत्व का प्रतीक है।
🌟 प्रसिद्ध लीला — दामोदर लीला
एक दिन बाल कृष्ण ने माखन चुरा लिया।
माता यशोदा ने उन्हें पकड़कर ऊखल से बाँध दिया।
भगवान, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं,
माँ के प्रेम के बंधन में बंध गए।
यह लीला बताती है —
👉 भक्ति और प्रेम से भगवान भी वश में हो जाते हैं।
👶 संतान प्राप्ति के लिए विशेष
षष्ठी तिथि को यह व्रत विशेष माना जाता है। महिलाएं संतान सुख और सुरक्षा के लिए व्रत रखती हैं।
✨ विशेष उपाय
- माखन-मिश्री का भोग लगाएँ
- 11 बार “ॐ यशोदे नमः” जपें
- तुलसी अर्पित करें
- 108 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जपें
- कन्याओं को मिष्ठान दान करें
🌼 आध्यात्मिक संदेश
ईश्वर को पाने का मार्ग ज्ञान नहीं, प्रेम है। माँ का हृदय सबसे पवित्र मंदिर है।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. यशोदा जयंती 2026 कब है ?
यशोदा जयंती 7 फरवरी 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।
Q2. यशोदा जयंती क्यों मनाई जाती है ?
यह दिन माता यशोदा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने श्रीकृष्ण का पालन-पोषण किया।
Q3. यशोदा जयंती पर क्या करना चाहिए ?
माता यशोदा और बाल गोपाल की पूजा करें, माखन-मिश्री का भोग लगाएँ और “ॐ यशोदे नमः” मंत्र का जप करें।
Q4. क्या यशोदा जयंती पर व्रत रखा जाता है ?
हाँ, कई महिलाएँ संतान सुख, सुरक्षा और दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं।
Q5. यशोदा जयंती का मुख्य संदेश क्या है ?
यह पर्व मातृत्व प्रेम, भक्ति और निःस्वार्थ स्नेह का प्रतीक है।
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⚠️ डिसक्लेमर
इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है।
विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं।
हमारा उद्देश्य केवल सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दी जा सकती।
कृपया किसी भी प्रकार के उपयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।



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