होली 2026 कब मनाई जाएगी ? होलिका दहन शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
होली का पर्व फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा और रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
📅 होली 2026 की तिथि
- होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
- धुलंडी (रंग वाली होली): 4 मार्च 2026 (बुधवार)
- तिथि: फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा
⏰ होलिका दहन 2026 शुभ मुहूर्त
होलिका दहन प्रदोष काल में किया जाता है, अर्थात सूर्यास्त के बाद का समय।
- भद्रा रहित समय में दहन करना श्रेष्ठ माना गया है।
- यदि भद्रा प्रदोष में हो तो भद्रा समाप्ति के बाद दहन करें।
- भद्रा मुख में होलिका दहन करना वर्जित है।
🪔 होलिका दहन पूजा विधि
- सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पूजन करें।
- मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- होलिका की 3 या 7 परिक्रमा करें।
- कच्चा सूत लपेटें।
- रोली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
- सप्तधान्य (गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल, मसूर) अर्पित करें।
- नई फसल की आहुति दें।
🔥 होलिका दहन का महत्व
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान की कृपा को दर्शाता है। इस दिन नकारात्मक शक्तियों के नाश और समृद्धि की कामना की जाती है।
📿 होलिका दहन मंत्र
अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्:
🔥 होलिका दहन में क्या चढ़ाएं ?
- ✔ कच्चे आम
- ✔ नारियल
- ✔ भुट्टा
- ✔ सप्तधान्य
- ✔ चीनी के खिलौने
- ✔ नई फसल
⚠️ होलिका दहन सावधानियां
- सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
- सिर ढककर रखें।
- कपड़ों का विशेष ध्यान रखें।
- काले तिल अग्नि में अर्पित करें।
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📖 पौराणिक कथा – भक्त प्रह्लाद और होलिका
होलिका दहन की कथा का वर्णन विष्णु पुराण में मिलता है।
दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या से वरदान पाया कि वह न दिन में मरेगा, न रात में; न घर में, न बाहर; न अस्त्र से, न शस्त्र से; न मनुष्य से, न पशु से।
वरदान पाकर वह अत्याचारी बन गया। उसने ईश्वर भक्ति पर प्रतिबंध लगा दिया।
उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए—सागर में फेंका, पर्वत से गिराया, हाथी से कुचलवाने की कोशिश की—परंतु हर बार भगवान ने उसकी रक्षा की।
अंत में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी। लेकिन वरदान का दुरुपयोग करने के कारण होलिका जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गया।
तब भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया।
📍 बिहार से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी प्रखंड के सिकलीगढ़ में होलिका दहन की घटना हुई थी।
कहा जाता है कि यहीं हिरण्यकश्यप का किला था और यहीं से नरसिंह भगवान खंभे से प्रकट हुए थे।
🌼 अन्य कथाएँ
वैदिक काल में इसे नवान्नेष्टि यज्ञ कहा जाता था।
एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने कामदेव को भस्म किया, उसी से होली की परंपरा जुड़ी।
तंत्र शास्त्र में यह रात्रि विशेष साधना के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है।
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❓ FAQ
1. होली 2026 कब मनाई जाएगी ?
होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी, जबकि होलिका दहन 3 मार्च 2026 को होगा।
2. होलिका दहन किस समय करना चाहिए ?
होलिका दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में और भद्रा रहित समय में करना चाहिए।
3. होलिका दहन में क्या चढ़ाया जाता है ?
सप्तधान्य, नारियल, कच्चे आम, नई फसल, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
⚠️ डिसक्लेमर
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विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं।
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