Chaitra Navratri 2026 Day 2: माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती और व्रत कथा
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के द्वितीय स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह स्वरूप तप, त्याग, संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि माँ ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से भक्तों को साहस, आत्मबल, संयम और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है। उनकी कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा शुभ मुहूर्त 2026
- तिथि: 20 मार्च 2026, शुक्रवार
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:46 से 05:34 तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:54 तक
- पूजा का श्रेष्ठ समय: प्रातः सूर्य उदय के बाद से दोपहर तक
नवरात्रि के दूसरे दिन प्रातःकाल माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय पूजा करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत, तेजस्वी और तपस्विनी है।
- दाहिने हाथ में जपमाला
- बाएं हाथ में कमंडल
- सफेद वस्त्र धारण
- मुख पर दिव्य तेज
मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या का साक्षात स्वरूप माना जाता है। इनके अन्य नाम तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा हैं।
माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि
- सबसे पहले कलश में विराजित देवी-देवताओं की पूजा करें।
- फूल, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें।
- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत स्नान कराएं।
- नवग्रह, दशदिक्पाल, ग्राम देवता और नगर देवता का पूजन करें।
- अब माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें।
प्रार्थना मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
इसके बाद देवी को फूल, अक्षत, कुमकुम और सिंदूर अर्पित करें। घी और कपूर से आरती करें।
क्षमा प्रार्थना
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरी॥
माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
माँ ब्रह्मचारिणी ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥
परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
ब्रह्मचारिणी स्तोत्र पाठ
तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।
ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥
ब्रह्मचारिणी की कवच
त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी।
अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥
पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥
षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।
अंग प्रत्यंग सतत पातुब्रह्मचारिणी।
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माँ ब्रह्मचारिणी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार माँ ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री थीं। देवर्षि नारद के कहने पर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की।
उन्होंने हजारों वर्षों तक फल, पत्तों और अंत में बिना भोजन के तप किया। इसी कारण उन्हें अपर्णा भी कहा जाता है। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान दिया कि उनका विवाह भगवान शिव से होगा।
जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करता है उसे सुख, आरोग्य और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
माँ ब्रह्मचारिणी को भोग
- शक्कर
- मिश्री
- पंचामृत
- दूध से बनी मिठाई
इस दिन देवी को शक्कर का भोग लगाने से आयु और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
माँ दुर्गा की आरती
जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…
कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…
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FAQ
Q1. नवरात्रि के दूसरे दिन किस देवी की पूजा होती है ?
नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के दूसरे स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
Q2. माँ ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाते हैं ?
माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और दूध से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है।
Q3. माँ ब्रह्मचारिणी किस चक्र से संबंधित हैं ?
माँ ब्रह्मचारिणी स्वाधिष्ठान चक्र से संबंधित मानी जाती हैं।
Q4. माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से क्या लाभ मिलता है ?
इस पूजा से संयम, साहस, तप और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
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