नवरात्रि 2026 सातवां दिन: माँ कालरात्रि पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती और दुर्भाग्य नाशक उपाय

नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के सप्तम स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है।
माता कालरात्रि को काल का नाश करने वाली देवी माना जाता है।
इनकी पूजा से भय, संकट और दुर्भाग्य का नाश होता है।

माँ कालरात्रि पूजा मुहूर्त 2026

  • तिथि: चैत्र शुक्ल सप्तमी
  • तारीख: 25 मार्च 2026
  • दिन: बुधवार
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:53 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:19 तक

Must Read 

माता कालरात्रि स्वरूप एवं पौराणिक महात्म्य

माँ दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है। ये काल का नाश करने वाली देवी हैं।
नवरात्रि के सातवें दिन इनकी पूजा की जाती है।

इनका शरीर अंधकार के समान काला है। बाल बिखरे हुए हैं।
गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है।

माँ के तीन नेत्र हैं। इनसे तेजस्वी किरणें निकलती हैं।
इनकी श्वास से अग्नि की ज्वालाएँ निकलती हैं।

माता का वाहन गर्दभ (गधा) है।
दाहिना ऊपर का हाथ वरद मुद्रा में है।
दाहिना नीचे का हाथ अभय मुद्रा में है।

बाएं हाथों में खड्ग और लोहे का कांटा है।
भयानक स्वरूप होने के बावजूद माता सदैव शुभ फल देने वाली हैं।
इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।

माँ कालरात्रि पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • सबसे पहले कलश और गणेश जी की पूजा करें।
  • इसके बाद नवग्रह और देवी परिवार की पूजा करें।
  • माँ कालरात्रि का ध्यान करें।
  • धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
  • मंत्र और स्तोत्र का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें।

माँ कालरात्रि शप्तशती मंत्र

1. ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।

जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तु ते।।

2. धां धीं धूं धूर्जटे: पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी

क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु।।

बीज मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
(3, 7 या 11 माला जप करें)

माँ कालरात्रि ध्यान मंत्र

करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।

कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥

दिव्यं लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।

अभयं वरदां चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम॥

महामेघ प्रभां श्यामां तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।

घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥

सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।

एवं सचियन्तयेत् कालरात्रिं सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

माँ कालरात्रि स्तोत्र

हीं कालरात्रि श्री कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।

कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥

कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।

कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥

क्लीं हीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।

कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

माँ कालरात्रि कवच

ऊँ क्लीं मे हृदयं पातु पादौ श्रीकालरात्रि।

ललाटे सततं पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥

रसनां पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।

कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी॥

वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।

तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

भगवती कालरात्रि का ध्यान, कवच, स्तोत्र का जाप करने से ‘भानुचक्र’ जागृत होता है। इनकी कृपा से अग्नि भय, आकाश भय, भूत पिशाच स्मरण मात्र से ही भाग जाते हैं। कालरात्रि माता भक्तों को अभय प्रदान करती है।

माँ कालरात्रि पार्वती काल अर्थात् हर तरह के संकट का नाश करने वाली है इसीलिए कालरात्रि कहलाती है। देवी की पूजा के बाद शिव और ब्रह्मा जी की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए।

दुर्भाग्य नाशक उपाय

  • मृत्यु भय से मुक्ति के लिए माँ को काले चने का भोग लगाएं।
  • लाल वस्त्र में नारियल बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें।
  • दुर्गा सप्तशती के सातवें और दसवें अध्याय का पाठ करें।
  • पाशुपतास्त्र स्तोत्र का 21 बार पाठ करने से शत्रु बाधा दूर होती है।
  • उड़द और दीपक का विशेष प्रयोग सौभाग्य बढ़ाता है।

माँ कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली।

काल के मुह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।

महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।

महाकाली है तेरा पसारा॥

खडग खप्पर रखने वाली।

दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।

सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।

गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।

कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी।

ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें।

महाकाली माँ जिसे बचाबे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।

कालरात्रि माँ तेरी जय॥

माँ दुर्गा की आरती

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…

कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।

भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…

Must Read नवरात्रि सन्धिकाल विशेष: श्री जगन्मंगल कवचम हिंदी अर्थ सहित 

निष्कर्ष

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा करने से भय, रोग और संकट दूर होते हैं।
माता की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

Must Read दुर्गा हवन मंत्र व हवन विधि | दुर्गाष्टमी / नवमी के लिए हवन मंत्र विधि

FAQ

Q1. माँ कालरात्रि की पूजा कब होती है ?

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है।

Q2. माँ कालरात्रि का वाहन क्या है ?

माँ कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) है।

Q3. माँ कालरात्रि की पूजा से क्या लाभ होता है ?

माँ कालरात्रि की पूजा से भय, संकट और दुर्भाग्य दूर होते हैं।

⚠️ डिसक्लेमर

इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है।

विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं।

हमारा उद्देश्य केवल सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दी जा सकती।

कृपया किसी भी प्रकार के उपयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।