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चाक्षुषी विद्या: जानें नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए चाक्षुषी विद्या प्रयोग
चाक्षुषी विद्या प्रयोग नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए हमारे जीवन में शरीर की आरोग्यता का होना बहुत महत्वपूर्ण है। आज की भौतिक व रासायनिक जीवन शैली ने शरीर में सूर्य
मूल नक्षत्र: जानें मूल नक्षत्र और नक्षत्र के अनुसार आपका भाग्शाली रत्न
सदैव घातक नहीं हैं मूल नक्षत्र जानें मूल नक्षत्र और आपका भाग्शाली रत्न राशि और नक्षत्र दोनों जब एक स्थान पर समाप्त होते हैं तब यह स्थित गण्ड नक्षत्र कहलाती
सर्वार्थ सिद्धि योग: जानें सर्वार्थ सिद्धि योग क्या होता है सर्वार्थ सिद्धि योग कब और कैसे बनता है
सर्वार्थ सिद्धि योग क्या होता है सर्वार्थ सिद्धि योग कब और कैसे बनता है जानें इस योग में ये काम नहीं किये जाते हैं शुभ कार्य तो हर समय होते
मार्गशीर्ष मास: जानें मार्गशीर्ष माह नाम कैसे पड़ा और मार्गशीर्ष (अहगन) मास का महत्त्व
मार्गशीर्ष (अहगन) मास का महत्त्व Significance of Margashirsha (Aghan) month चन्द्र माहों की श्रेणी में मार्गशीर्ष माह नवें स्थान पर आता है. यह माह अगहन माह के नाम से भी
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लग्न अनुसार अशुभ गुरु Ascendant inauspicious guru भारतीय ज्योतिष में, लग्न उस क्षण को कहते हैं जिस क्षण आत्मा धरती पर अपनी नयी देह से संयुक्त होती है। व्यक्ति के
Shri Krishna’s Rasleela जानें श्रीकृष्ण की रासलीला का अर्थ
श्रीकृष्ण की रासलीला का अर्थ Meaning of Shri Krishna's Rasleela श्रीमद् भागवत में रास पंचध्यायी का उतना ही महत्व है जितना हमारे शरीर में आत्मा का। श्रीमद् भागवत में रास
श्री गणेश नामावली हिंदी अर्थ सहित Shree Ganesh name with Hindi meaning
श्रीगणेश नामावली हिंदी अर्थ सहित Shree Ganesh name with Hindi meaning कलियुग का एक विशेष गुण है– कलियुग केवल नाम अधारा। कलिकाल में भगवान की आराधना की सारी पद्धतियों में
Kartik month Mahatmya thirty-two chapter कार्तिक माह महात्म्य बत्तीसवां अध्याय
कार्तिक माह महात्म्य बत्तीसवां अध्याय Kartik month Mahatmya thirty two chapter मुझे सहारा है तेरा, सब जग के पालनहार। कार्तिक मास के महात्म्य का बत्तीसवाँ विस्तार।। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे
Kartik month Mahatmya thirty first chapter कार्तिक माह महात्म्य इकतीसवां अध्याय
कार्तिक माह महात्म्य इकतीसवां अध्याय Kartik month Mahatmya thirty first chapter कार्तिक मास माहात्म्य का, यह इकत्तीसवाँ अध्याय। बतलाया भगवान ने, प्रभु स्मरण का सरल उपाय।। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा–