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Nakshatr: जानें नक्षत्र का अर्थ क्या है ? जानें 27 नक्षत्रों के नाम
नक्षत्र का अर्थ क्या है ? जानें 27 नक्षत्रों के नाम नक्षत्र ज्योतिष शब्द विशेष रूप से वैदिक ज्योतिष में चंद्र भाग का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार,
गोस्वामी तुलसीदास जीवन परिचय: जानें गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर विशेष
तुलसीदास का जीवन परिचय (Tulsidas Ka Jeevan Parichay), विश्रुत राम भक्त, महाकवि, समन्वयी, समाज सुधारक और लोक-नायक गोस्वामी तुलसीदास भारत के महापुरुषों में अग्रगण्य हैं। उन्होंने राजा राम को लोक
नक्षत्र: जानें क्या सूचना देते हैं विविध नक्षत्र जानें नक्षत्रों का महत्व और कहानी
प्रभावी ज्योतिषीय विश्लेषण और सटीक भविष्यवाणियों के लिए वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों का अत्यधिक महत्व है। जन्म नक्षत्र ऐसा नक्षत्र है जो किसी व्यक्ति के जन्म के दौरान अस्तित्व में
Ratneshwar Mahadev Temple: महादेव की नगरी में 400 सालों से टेढ़ा है ये मंदिर, जानें रत्नेश्वर महादेव की कथा
भारत का वाराणसी शहर अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए मशहूर है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु गंगा घाट के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। कहने को तो
षष्ठी देवी: जानें वर्ण षष्ठी व्रत महिमा एवं षष्ठी देवी की कथा और षष्ठी देवी स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित
सुपोदन वर्ण षष्ठी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को की जाती है। एक पारंपरिक हिंदू कैलेंडर में छठे दिन को षष्ठी के रूप में जाना जाता है
कल्कि अवतार: जानें भगवान विष्णु के अंतिम अवतार की पूजा विधि, महत्व
कल्कि जन्मोत्सव 2026: तिथि, समय, महत्व, पूजा विधि और मंत्र कल्कि जन्मोत्सव 2026: हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के दशावतारों का विशेष महत्व है। पुराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु
मंत्र पुरश्चरण विधि: किसी मंत्र का प्रयोग करने से पहले उसका विधिवत सिद्ध होना आवश्यक है
हमारे सनातन धर्म में "पुरश्चरण" बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना गया है। मन्त्र जप की सामान्य विधि तो बहुत ही सरल है किन्तु उसी मन्त्र का पुरश्चरण एक कठिन कार्य है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर: पूरे साल में नाग पंचमी के दिन खुलते हैं इस मंदिर के पट, दर्शन से दूर होता है कालसर्प दोष
Nagchandreshwar Temple: हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में सांपों और नागों की पूजा प्राचीन समय से ही चली आ रही है। देवी-देवताओं के समान नाग को भी देवता माना जाता
रुद्राभिषेक पाठ: जाने रुद्राभिषेक पाठ एवं उसके भेद
हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो