बात आंखों ही आंखों में कुछ यू हो गई वो मेरे हो गए मैं उनकी हो गई
बात आंखों ही आंखों में कुछ यू हो गई वो
बात आंखों ही आंखों में कुछ यू हो गई वो
पवित्र मन सबसे उत्तम तीर्थ है हरे कृष्णा
तेरी दिवानी हूं मुझे इंकार नहीं, कैसे कह दूं
जय श्री राधे कृष्णा सांस तो सिर्फ दिखाने के
निदा से घबराकर अपने लक्ष्य को ना छोड़ें क्योंकि
किसी का दर्द देखकर अगर आपको भी दर्द होता
यदि प्रेम को समझना है तो तन की नहीं मन
जिस नाम से कटती है सब बांधा वही नाम
कृष्णा जब कुछ अच्छा नहीं लगता तब तुमसे बाते
जय श्री राधे कृष्णा क्या पूछा, की तुम्हारा इंतजार क्यों