Chaitra Navratri 2026 Day 1 Puja: माँ शैलपुत्री पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती और व्रत कथा
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना होती है और पहला स्वरूप शैलपुत्री का है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी को शैलपुत्री कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करने से साधक के मूलाधार चक्र का जागरण होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
Table of Contents
- माँ शैलपुत्री का स्वरूप
- शैलपुत्री ध्यान मंत्र
- माता शैलपुत्री की व्रत कथा
- नवरात्रि में कलश स्थापना विधि
- माँ शैलपुत्री पूजा विधि
- माँ शैलपुत्री को प्रिय भोग
- शैलपुत्री स्तोत्र
- शैलपुत्री कवच
- नवरात्रि के पहले दिन के उपाय
- माँ शैलपुत्री की आरती
- माँ दुर्गा की आरती
- FAQ
माँ शैलपुत्री का स्वरूप
माँ शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और तेजस्वी माना जाता है।
- वाहन – वृषभ (बैल)
- दाहिने हाथ में – त्रिशूल
- बाएँ हाथ में – कमल का पुष्प
- मस्तक पर – अर्धचंद्र
इनकी पूजा से जीवन में सुख, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
चैत्र नवरात्रि 2026 पहले दिन का पूजन मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च 2026, गुरुवार से होगा। इसी दिन नवरात्रि के पहले दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन कलश स्थापना करके देवी की आराधना प्रारंभ की जाती है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
- तिथि: 19 मार्च 2026 (गुरुवार)
- प्रातः मुहूर्त: 06:10 AM – 08:35 AM
- अभिजित मुहूर्त: 12:05 PM – 12:53 PM
नवरात्रि की पूजा और माँ शैलपुत्री का पूजन कलश स्थापना के बाद किया जाता है। इस समय देवी की विधि-विधान से पूजा करने से सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
प्रतिपदा तिथि
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 19 मार्च 2026 सुबह 06:52 बजे
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च 2026 सुबह 04:52 बजे
इस शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना और माँ शैलपुत्री की पूजा करने से नवरात्रि व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है।
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शैलपुत्री ध्यान मंत्र
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रर्धकृत शेखराम्।
वृशारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्वनीम्॥
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥
प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥
माता शैलपुत्री की व्रत कथा
पुराणों के अनुसार एक बार प्रजापति दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने सभी देवताओं को निमंत्रण दिया लेकिन भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया।
जब माता सती को यह पता चला तो वे अपने पिता के यज्ञ में जाने के लिए व्याकुल हो गईं। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि बिना निमंत्रण जाना उचित नहीं है, लेकिन सती वहाँ चली गईं।
यज्ञ स्थल पर भगवान शिव का अपमान होते देखकर माता सती बहुत दुखी हुईं और उन्होंने योगाग्नि में अपने शरीर का त्याग कर दिया।
अगले जन्म में उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया और शैलपुत्री के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
नवरात्रि में कलश स्थापना विधि
- सबसे पहले पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ बो दें।
- उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें।
- कलश में सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें।
- ऊपर नारियल रखकर लाल कपड़ा बांधें।
- इसके बाद माँ दुर्गा का आह्वान करें।
माँ शैलपुत्री पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- कलश स्थापना करें।
- माँ शैलपुत्री की प्रतिमा स्थापित करें।
- रोली, अक्षत, चंदन और पुष्प अर्पित करें।
- धूप और दीप जलाएं।
- माता को भोग लगाएं।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- अंत में आरती करें।
माँ शैलपुत्री को प्रिय भोग
नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री को घी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- घी
- खीर
- दूध से बनी मिठाई
- फल
- शक्कर
मान्यता है कि घी का भोग लगाने से आरोग्य और रोगों से मुक्ति मिलती है।
शैलपुत्री स्तोत्र
प्रथम दुर्गा त्वंहिभवसागर: तारणीम्।
धन ऐश्वर्यदायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहिमहामोह: विनाशिन।
मुक्तिभुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्॥
शैलपुत्री कवच
ॐकारः में शिरः पातु मूलाधार निवासिनी।
हींकारः पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥
श्रींकारः पातु वदने लावण्य महेश्वरी।
हुंकारः पातु हृदयं तारिणी शक्ति स्वघृत॥
फट्कारः पातु सर्वांगे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥
नवरात्रि के पहले दिन के उपाय
यदि भूमि, भवन या वाहन की प्राप्ति में बाधा आ रही हो तो नवरात्रि के पहले दिन यह उपाय करें।
- रात्रि में लाल कपड़ा बिछाएं।
- उस पर दुर्गा यंत्र स्थापित करें।
- घी का दीपक जलाएं।
- “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप करें।
माँ शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
माँ दुर्गा की आरती
जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…
कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…
पूजन के बाद श्री दुर्गा सप्तशती पाठ एवं निर्वाण मन्त्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का यथा सामर्थ जप अवश्य करें।
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FAQ
Q1. नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है ?
नवरात्रि के पहले दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
Q2. माँ शैलपुत्री को क्या भोग लगाना चाहिए ?
माँ शैलपुत्री को घी, खीर और दूध से बने प्रसाद का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
Q3. माँ शैलपुत्री का वाहन क्या है ?
माँ शैलपुत्री का वाहन वृषभ (बैल) है।
Q4. शैलपुत्री पूजा का क्या महत्व है ?
माँ शैलपुत्री की पूजा से मूलाधार चक्र जागृत होता है और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
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⚠️ डिसक्लेमर
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