Chaitra Navratri 2026 Day 3: माँ चंद्रघंटा पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती और व्रत कथा

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है।

नवरात्रि के तीसरे दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थित माना जाता है। माँ चंद्रघंटा की पूजा से भय, बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।


माँ चंद्रघंटा पूजा शुभ मुहूर्त 2026

  • तिथि: 21 मार्च 2026, शनिवार
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:45 से 05:33 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 तक
  • पूजा का श्रेष्ठ समय: प्रातः सूर्य उदय के बाद

नवरात्रि के तीसरे दिन प्रातःकाल माँ चंद्रघंटा की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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माँ चंद्रघंटा का स्वरूप

माँ चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है।

  • शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला
  • दस भुजाएँ
  • हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र
  • वाहन सिंह
  • मस्तक पर अर्धचंद्र

इनकी मुद्रा सदैव युद्ध के लिए तैयार रहने वाली होती है।


माँ चंद्रघंटा पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  3. माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  4. फूल, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें।
  5. धूप और दीप प्रज्वलित करें।
  6. माँ चंद्रघंटा का ध्यान कर मंत्र का जाप करें।
  7. प्रसाद अर्पित करें और आरती करें।

माँ चंद्रघंटा मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: हे माँ चंद्रघंटा! जो समस्त प्राणियों में विराजमान हैं, आपको बार-बार प्रणाम है।


माँ चंद्रघंटा ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।

सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥

मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।

खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥

प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।

कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥


माँ चंद्रघंटा स्तोत्र

आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।

अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥

चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।

धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥

नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।

सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥


माँ चंद्रघंटा व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध हुआ। असुरों के राजा महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया।

देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव से सहायता मांगी। तीनों देवों के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। यही शक्ति माँ दुर्गा के रूप में प्रकट हुई।

सभी देवताओं ने देवी को अपने अस्त्र-शस्त्र दिए। भगवान शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र और इंद्र ने वज्र प्रदान किया।

इसके बाद देवी ने महिषासुर और उसकी सेना का संहार कर देवताओं को पुनः स्वर्गलोक दिलाया।


माँ चंद्रघंटा को भोग

  • दूध
  • खीर
  • हलवा
  • दही

इस दिन देवी को दूध या खीर का भोग लगाने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है।


कर्ज से मुक्ति का उपाय

यदि किसी व्यक्ति पर अधिक कर्ज हो तो 108 गुलाब के पुष्प लेकर यह मंत्र बोलते हुए माँ चंद्रघंटा के चरणों में अर्पित करें।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं चं फट् स्वाहा

फिर घी का दीपक जलाकर इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं चंद्रघण्टे हुं फट् स्वाहा


माँ चंद्रघंटा की आरती

जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम।

पूर्ण कीजो मेरे काम॥

चन्द्र समाज तू शीतल दाती।

चन्द्र तेज किरणों में समाती॥

क्रोध को शांत बनाने वाली।

मीठे बोल सिखाने वाली॥

मन की मालक मन भाती हो।

चंद्रघंटा तुम वर दाती हो॥

सुन्दर भाव को लाने वाली।

हर संकट में बचाने वाली॥

हर बुधवार को तुझे ध्याये।

श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥

मूर्ति चन्द्र आकार बनाए।

शीश झुका कहे मन की बाता॥

पूर्ण आस करो जगत दाता।

कांचीपुर स्थान तुम्हारा॥

कर्नाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटू महारानी॥

भक्त की रक्षा करो भवानी।


माँ दुर्गा की आरती

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…

कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।

भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…


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FAQ

Q1. नवरात्रि के तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है ?

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।

Q2. माँ चंद्रघंटा का वाहन क्या है ?

माँ चंद्रघंटा का वाहन सिंह है।

Q3. माँ चंद्रघंटा को क्या भोग लगाया जाता है ?

माँ चंद्रघंटा को दूध, खीर, दही और हलवा का भोग लगाया जाता है।

Q4. माँ चंद्रघंटा किस चक्र से संबंधित हैं ?

नवरात्रि के तीसरे दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थित माना जाता है।

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