दुर्गा षष्ठी 2025 – शारदीय नवरात्रि में माँ कात्यायनी की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और विशेष उपाय 

मां कात्यायनी देवी दुर्गा का एक शक्तिशाली रूप हैं, जिन्हें विशेष रूप से नवरात्रि के छठे दिन पूजा जाता है। ये देवी साहस, शक्ति, बुद्धि और सुरक्षा की प्रतीक हैं। देवी कात्यायनी की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, वैवाहिक जीवन में सुख मिलता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

दुर्गा षष्ठी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त

📅 पूजा का दिन और तिथि

तिथि: षष्ठी (मां कात्यायनी पूजा)

तिथि: 28 सितंबर 2025 ( रविवार)

नवरात्रि का दिन: छठा दिन 

षष्ठी तिथि प्रारंभ 27 सितम्बर 12:03 pm 

षष्ठी तिथि समाप्त 28 सितम्बर 14.27 pm 

दुर्गा षष्ठी 2025 शुभ मुहूर्त

मां कात्यायनी पूजा के लिए विशेष शुभ मुहूर्त की जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, सामान्यतः पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:30 से 5:30 बजे) और अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 11:53 से 12:41 बजे) को शुभ माना जाता है। इन समयों में पूजा करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है 

अभिजित मुहूर्त 11:53 – 12:41 शुभ 

चर 07:48 09:18 शुभ

लाभ 09:18 10:48 शुभ

अमृत 10:48 12:17 शुभ 

शुभ 13:47 15:17 शुभ 

दुर्गा षष्ठी 2025 माँ कात्यायनी का स्वरूप और महत्व

माँ कात्यायनी महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री के रूप में जन्मी थीं। यह रूप शक्ति, साहस और समृद्धि का प्रतीक है। माँ का वाहन सिंह है और वे चन्द्रहास तलवार धारण करती हैं। उनकी पूजा से:

 1. सभी संकटों का नाश होता है

 2. मन आज्ञा चक्र में स्थित होता है

 3. योग साधना में विशेष लाभ मिलता है

 4. अर्थ, काम, धर्म और मोक्ष की प्राप्ति होती है

दुर्गा षष्ठी 2025 मां कात्यायनी पूजा विधि चरण दर चरण

1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. कलश की स्थापना करें और उसमें देवी देवताओं का आवाहन करें।

3. माता कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं।

4. फूल, चंदन, धूप, नैवेद्य अर्पित करें।

5. नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें।

6. मन को आज्ञा चक्र में केंद्रित कर ध्यान करें।

📜 माँ कात्यायनी का सामान्य मंत्र

चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

🧘 ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥

स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।

वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥

पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।

कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥

माँ कात्यायनी की कथा

देवी कात्यायनी से संबंधित एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा प्रचलित है। बताया जाता है कि एक समय कत नाम के महान ऋषि हुए थे, जिनके पुत्र ऋषि कात्य थे। उन्हीं के वंश से कात्य गोत्र प्रसिद्ध हुआ और आगे चलकर महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए। वे तपस्वी, धर्मनिष्ठ और परम भक्त थे।

जब महिषासुर नामक राक्षस का आतंक पूरे लोक में फैल गया, तब देवता और ऋषि घोर संकट में आ गए। संसार में अधर्म और अराजकता बढ़ती जा रही थी। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने-अपने तेज और दिव्य शक्ति का अंश देकर देवी को प्रकट किया ताकि वे असुरों का संहार कर लोक का कल्याण करें।

देवी कात्यायनी का जन्म महर्षि कात्यायन के आश्रम में हुआ। महर्षि कात्यायन ने देवी का पालन-पोषण किया और कठोर तपस्या तथा पूजा से उनकी आराधना की। महर्षि की मनोकामना थी कि देवी उनके घर पुत्री रूप में जन्म लें। उनकी प्रार्थना स्वीकार कर देवी ने अश्विन मास की कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लिया।

इसके बाद महर्षि कात्यायन ने तीन दिनों तक – शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी – देवी की पूजा की। अंततः विजय दशमी को देवी कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। तभी से देवी कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन बड़े श्रद्धा भाव से की जाती है।

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नवरात्रि षष्ठी तिथि को कार्य को कार्य सिद्धि के मंत्र

सर्व मंगल माँड़गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।

शरण्ये त्र्यम्बिके गौरी नारायणी नामोस्तुते।।

नवरात्रि षष्ठी के विशेष उपाय

1. फिल्म और ग्लैमर में सफलता के लिए – देशी घी का तिलक करें।

2. खेल में सफलता के लिए – सिन्दूर और शहद मिलाकर तिलक करें।

3. राजनीति में सफलता के लिए – लाल कपड़े में 21 चूड़ियाँ और अन्य सामग्री अर्पित करें।

4. प्रतियोगिता में सफलता के लिए – 7 प्रकार की दालों का चूरा बनाकर चींटियों को खिलाएं।

5. हर क्षेत्र में सफलता के लिए – कुमकुम, कपूर, सिन्दूर, मिश्री आदि का पेस्ट लगाएं।

6. कार्य सिद्धि के लिए – मिट्टी की गोलियाँ बनाकर सिन्दूर में चढ़ाकर नदी में विसर्जित करें।

माँ कात्यायनी की आरती:

जय जय अम्बे जय कात्यानी। 

जय जगमाता जग की महारानी।।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।

वहा वरदाती नाम पुकारा।।

कई नाम है कई धाम है।

यह स्थान भी तो सुखधाम है।।

हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी।

कही योगेश्वरी महिमा न्यारी।।

हर जगह उत्सव होते रहते।

हर मंदिर में भगत है कहते।।

कत्यानी रक्षक काया की।

ग्रंथि काटे मोह माया की।।

झूठे मोह से छुडाने वाली।

अपना नाम जपाने वाली।।

ब्रेह्स्पतिवार को पूजा करिए।

ध्यान कात्यानी का धरिये।।

हर संकट को दूर करेगी।

भंडारे भरपूर करेगी।।

जो भी माँ को ‘चमन’ पुकारे।

कात्यानी सब कष्ट निवारे।।

माँ दुर्गा की आरती:

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…

कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।

भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…

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