संत गुरु रविदास जी जयंती 2026 – भजन संग्रह, जीवन परिचय और संदेश

भारत संतों की भूमि है। जब भी समाज में भेदभाव बढ़ा, संतों ने मार्ग दिखाया। ऐसे ही महान संत थे गुरु रविदास जी। वे भक्ति, समानता और मानवता के प्रतीक थे।

🪔 गुरु रविदास जी का जीवन परिचय

विवरण जानकारी
नाम गुरु रविदास (रैदास)
जन्म माघ पूर्णिमा, 14वीं सदी के आसपास
जन्म तारीख 1377 ईस्वी से 1398 ईस्वी के बीच माना जाता है
जन्मस्थान गोवर्धनपुर, वाराणसी
पिता संतोख दास
माता कलसा देवी
गुरु स्वामी रामानंद
कार्य संत, समाज सुधारक, भक्त कवि
मृत्यु 1540 ईस्वी (वाराणसी)

✨ “मन चंगा तो कठौती में गंगा” कथा

रविदास जी ने एक ब्राह्मण को सुपारी देकर गंगा को अर्पित करने को कहा। गंगा मैया प्रकट हुईं और सोने का कंगन दिया। तभी कहावत प्रचलित हुई — मन चंगा तो कठौती में गंगा

🕉️ प्रसिद्ध वाणी

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती
प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा

⚖️ जाति प्रथा पर संदेश

जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात
रैदास मनुष ना जुड़ सके, जब तक जाति न जात


🎶 संत गुरु रविदास जी भजन संग्रह

भजन 1: प्रभु जी तुम चंदन हम पानी

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी,
जाकी अँग-अँग बास समानी॥
प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती,
जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा,
ऐसी भक्ति करै रैदासा॥

भजन 2: मन चंगा तो कठौती में गंगा

मन चंगा तो कठौती में गंगा।
भक्ति बिना सब सूना अंगा॥
जाति-पांति का छोड़ो फंदा,
नाम बिना जीवन है अंधा॥

भजन 3: ऐसी लाल तुझ बिनु कौनु करै

ऐसी लाल तुझ बिनु कौनु करै।
गरीब निवाजु गुसइयां मेरा माथै छत्र धरै॥

भजन 4: अब कैसे छूटे राम रट लागी

अब कैसे छूटे राम रट लागी।
सांस-सांस में नाम बसाऊँ॥

भजन 5: जाति-पांति पूछे न कोई

जाति-पांति पूछे न कोई।
हरि को भजे सो हरि का होई॥


🌼 रविदास जयंती का महत्व

  • भक्ति और सेवा का दिन
  • समानता का संदेश
  • भजन, कीर्तन, सत्संग
  • गरीबों की सेवा

💖 हमें क्या सीख मिलती है ?

  • मन की शुद्धता ही सच्ची पूजा
  • मानवता सबसे बड़ी जाति
  • सेवा ही भक्ति है

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❓ FAQ

Q1. गुरु रविदास जी का जन्म कब हुआ ?

माघ पूर्णिमा के दिन माना जाता है।

Q2. गुरु रविदास जी की मृत्यु कब हुई ?

1540 ईस्वी में वाराणसी में।

Q3. मुख्य संदेश क्या था ?

समानता, भक्ति और मानव सेवा।

Q4. मन चंगा तो कठौती में गंगा का अर्थ ?

मन शुद्ध हो तो ईश्वर हर जगह हैं।


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