नवरात्रि 2026 पांचवें दिन: माँ स्कंदमाता पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती और समृद्धि के उपाय

नवरात्रि के पांचवें दिन माँ दुर्गा के पांचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है।

माँ स्कंदमाता पूजा मुहूर्त 2026

  • तिथि: चैत्र शुक्ल पंचमी
  • तारीख: 23 मार्च 2026
  • दिन: सोमवार
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:19 बजे तक

इस शुभ मुहूर्त में माँ स्कंदमाता की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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माँ स्कंदमाता का स्वरूप

आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा का पंचम रूप स्कंदमाता है।
माता सिंह पर सवार रहती हैं और कमल के आसन पर विराजमान होती हैं।

माँ की चार भुजाएँ होती हैं।
एक भुजा में भगवान स्कंद को गोद में धारण करती हैं।
दो हाथों में कमल पुष्प होता है और एक हाथ वरमुद्रा में होता है।

माँ स्कंदमाता का वर्ण शुभ्र है। इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

स्कंदमाता पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • सबसे पहले कलश और भगवान गणेश की पूजा करें।
  • माँ स्कंदमाता का ध्यान करें और कमल का फूल अर्पित करें।
  • धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • मंत्र और स्तोत्र का पाठ करें।
  • अंत में माता की आरती करें।

माँ स्कंदमाता मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

शप्तशती मंत्र

सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया ।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ।।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

माँ स्कंदमाता ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्वनीम्।।

धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।

अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥

प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।

कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥

श्री स्कन्दमाता स्तोत्र पाठ

नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।

समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥

शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।

ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रीन्तिभास्कराम्॥

महेन्द्रकश्यपार्चिता सनंतकुमाररसस्तुताम्।

सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलादभुताम्॥

अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।

मुमुक्षुभिर्विचिन्तता विशेषतत्वमुचिताम्॥

नानालंकार भूषितां मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।

सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेन्दमारभुषताम्॥

सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्रकौरिघातिनीम्।

शुभां पुष्पमालिनी सुकर्णकल्पशाखिनीम्॥

तमोन्धकारयामिनी शिवस्वभाव कामिनीम्।

सहस्त्र्सूर्यराजिका धनज्ज्योगकारिकाम्॥

सुशुध्द काल कन्दला सुभडवृन्दमजुल्लाम्।

प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरं सतीम्॥

स्वकर्मकारिणी गति हरिप्रयाच पार्वतीम्।

अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥

पुनःपुनर्जगद्वितां नमाम्यहं सुरार्चिताम्।

जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवीपाहिमाम्॥

 श्री स्कन्दमाता कवच

ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा।

हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥

श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।

सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥

वाणंवपणमृते हुं फ्ट बीज समन्विता।

उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥

इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी।

सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥

वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए और माता को अलसी चढ़ाकर प्रसाद में रूप में ग्रहण करना चाहिए । शास्त्रों में कहा गया है कि इस चक्र में अवस्थित साधक के मन में समस्त बाह्य क्रियाओं और चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है और उसका ध्यान चैतन्य स्वरूप की ओर होता है, समस्त लौकिक, सांसारिक, मायाविक बन्धनों को त्याग कर वह पद्मासन माँ स्कन्धमाता के रूप में पूर्णतः समाहित होता है। साधक को मन को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।

माँ स्कंदमाता कथा

पौराणिक कथा के अनुसार ताड़कासुर नामक राक्षस ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था।
उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही संभव था।

तब भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ।
कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध करके देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया।

कार्तिकेय की माता होने के कारण देवी पार्वती को स्कंदमाता कहा जाने लगा।

नवरात्रि पंचमी के विशेष उपाय

  • विवाह में बाधा हो तो लौंग और कपूर से हवन करें।
  • संतान प्राप्ति के लिए लौंग, कपूर और अनार के दाने से आहुति दें।
  • व्यापार वृद्धि के लिए लौंग और पीले फूल से हवन करें।
  • विदेश यात्रा में बाधा हो तो मूली के टुकड़े हवन सामग्री में मिलाएं।

बाधा निवारण उपाय

यदि जीवन में बार-बार बाधाएँ आ रही हों तो 800 ग्राम चावल दूध से धोकर रखें।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे
ॐ स्कन्दमाता देव्यै नमः

इस मंत्र की एक माला जप करें।
फिर चावल को अपने ऊपर से 11 बार उतारकर जल में प्रवाहित करें।

माँ स्कंदमाता की आरती

नवरात्रि में पञ्चम स्कन्द माँ महारानी।

इनके ममता स्वरूप को ध्याये ध्यानी ग्यानी।।

कार्तिकेय को गोद के करती अनोखा प्यार।

अपनी शक्ति देकर करे रक्त संचार।।

भूरे सिंह पर बैठकर मंद-मंद मुस्काये।

कमल के आसन बैठी शोभा वरणी ना जाए।।

आशीर्वाद की मुद्रा मन में भरे उमंग।

कीर्तन करता दास से छोड़ के नाम का रंग।।

जैसे रूठे बालक की सुनती आप पुकार।

मुझको भी वो प्यार दो मत करना इन्कार।।

श्री जय जय स्कन्दा माँ

माँ दुर्गा की आरती

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…

कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।

भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।

>मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…

निष्कर्ष

नवरात्रि के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
माँ की कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

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FAQ

Q1. माँ स्कंदमाता की पूजा कब की जाती है ?

नवरात्रि के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है।

Q2. माँ स्कंदमाता का वाहन क्या है ?

माँ स्कंदमाता का वाहन सिंह है।

Q3. माँ स्कंदमाता की पूजा से क्या लाभ होता है ?

माँ स्कंदमाता की पूजा से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

Q4. माँ स्कंदमाता किसकी माता हैं ?

माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं।

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