Bhakti

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हे अर्जुन… मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ, मैं अग्नि की ऊष्मा हूँ, सभी जीवित प्राणियों का जीवन और सन्यासियों का आत्मसंयम भी मैं ही हूँ। 

हे अर्जुन... मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ, मैं अग्नि

By |2021-02-24T18:05:49+05:30February 15th, 2021|Bhagavad Gita Quotes|1 Comment
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