देके दर्शन कर दो पूरी प्रभु मेरे मन की तृष्णा कब तक तेरी राह निहारु अब तो आ जाओ कृष्णा
देके दर्शन कर दो पूरी प्रभु मेरे मन की तृष्णा
देके दर्शन कर दो पूरी प्रभु मेरे मन की तृष्णा
जब परिस्थितियां बदलना हमारे वश में ना हो तब मन
जो मनुष्य जिस प्रकार से ईश्वर का स्मरण करता है
ईश्वर की न्याय की चक्की थोड़ी धीमी जरूर चलती है
आपके सिवा हम किसी और के कैसे हो सकते हैं,
दुनिया उम्मीद तोड़ सकती है पर दुनिया बनाने वाला नहीं
चल जिंदगी कुछ नया करते हैं जो उम्मीद दूसरों से