ईश्वर की न्याय की चक्की थोड़ी धीमी जरूर चलती है मगर पीसती बहुत बारीक है
ईश्वर की न्याय की चक्की थोड़ी धीमी जरूर चलती है
ईश्वर की न्याय की चक्की थोड़ी धीमी जरूर चलती है
शुभ प्रभात खिलखिलाती सुबह है ताजगी भरा है सवेरा फूलों
आपके सिवा हम किसी और के कैसे हो सकते हैं,
दुनिया उम्मीद तोड़ सकती है पर दुनिया बनाने वाला नहीं
चल जिंदगी कुछ नया करते हैं जो उम्मीद दूसरों से