updesh
Shri Durga Saptashati जानें श्री दुर्गासप्तशती पाठ छठा अध्याय अर्थ सहित
श्री दुर्गासप्तशती पाठ छठा अध्याय अर्थ सहित (हिंदी अनुवाद सहित सम्पूर्ण) ।।ॐ नमश्चण्डिकायै।। षष्ठोऽध्यायः इस अध्याय का पाठ किसी भी प्रकार की तंत्र बाधा हटाने के लिए किया जाता है।इसके
Shri Durga Saptashati जानें श्री दुर्गासप्तशती पाठ पांचवा अध्याय अर्थ सहित
श्री दुर्गासप्तशती पाठ पांचवा अध्याय अर्थ सहित (हिंदी अनुवाद सहित सम्पूर्ण) (पंचमोध्याय) पांचवे अध्याय के प्रभाव से हर प्रकार के भय का नाश होता है। चाहे वो भूत प्रेत की
Kanya Pujan Vidhi : जानें नवरात्रि में कन्या पूजन करने की विधि,
जानें नवरात्रि पर्व कन्या पूजन विधान विशेष नवरात्र पर्व के दौरान कन्या पूजन का बडा महत्व है। नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिविंब के रूप में पूजने के बाद
चैत्र पूर्णिमा व्रत: जानें चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक महत्व, व्रत विधि कथा और इस दिन की विशेषताएं
चैत्र मास में आने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है, चैत्र पूर्णिमा को चैती पूनम के नाम से भी जाना जाता है । चैत्र मास हिन्दू वर्ष का
Shri Durga Saptashati जानें श्री दुर्गासप्तशती पाठ चतुर्थ अध्याय अर्थ सहित
श्री दुर्गासप्तशती पाठ चतुर्थ अध्याय अर्थ सहित (हिंदी अनुवाद सहित सम्पूर्ण) दुर्गा सप्तशती का चौथा अध्याय माँ की भक्ति प्राप्त करने के लिए उनकी शक्ति उनकी ऊर्जा को प्राप्त करने
चामुंडा देवी: जानें इक्यावन शक्ति पीठों में से एक चामुंडा देवी की कथा।
जानें इक्यावन शक्ति पीठों में से एक चामुंडा देवी की कथा। हिमाचल प्रदेश को देव भूमि भी कहा जाता है। इसे देवताओं के घर के रूप में भी जाना जाता
Shri Durga Saptashati जानें श्री दुर्गासप्तशती पाठ तृतीय अध्याय (हिंदी अनुवाद अर्थ सहित सम्पूर्ण)
श्री दुर्गासप्तशती पाठ तृतीय अध्याय (हिंदी अनुवाद अर्थ सहित सम्पूर्ण) तीसरे अध्याय का पाठ शत्रुओं से छुटकारा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। दोस्तों शत्रुओं का भय व्यक्ति के
Shri Durga Saptashati जानें श्री दुर्गासप्तशती पाठ द्वितीय अध्याय (हिंदी अनुवाद अर्थ सहित सम्पूर्ण)
श्री दुर्गासप्तशती पाठ द्वितीय अध्याय (हिंदी अनुवाद अर्थ सहित सम्पूर्ण) दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय के पाठ से मुकदमे में विजय मीलती है। किसी भी प्रकार का आपका झगड़ा हो,
Shri Durga Saptashati Lesson जानें श्री दुर्गासप्तशती पाठ (हिंदी अनुवाद सहित सम्पूर्ण) (प्रथम अध्याय)
दुर्गा सप्तशती एक ऐसा वरदान है, एक ऐसा प्रसाद है, जो भी प्राणी इसे ग्रहण कर लेता है। वह प्राणी धन्य हो जाता है। जैसे मछली का जीवन पानी