updesh
नवरत्न की जड़े और धारण करने की सम्पूर्ण विधि
नवरत्न की जड़े धारण करने की सम्पूर्ण विधि प्राचीन काल से नवग्रह की अनुकूलता के लिये रत्न पहनने का प्रचलन रहा है। सम्पन्न लोग महंगे से महंगे रत्न धारण कर
गरुड़ पुराण: जानिये आत्मा नए शरीर में कैसे जाती है ?
जानिये आत्मा नए शरीर में कैसे जाती है ? गरुड़ ने भगवान श्री विष्णु से प्रश्न किया मृत्यु के बाद आत्मा कैसे शरीर के बाहर जाता है ? कौन प्रेत
रात में खाना खाने के नुकसान : जानें रात्रि भोजन गलत कैसे ?
रात्रि भोजन गलत कैसे ? रात में खाना खाने के नुकसान हमने देखा होगा की सूर्य की पहली किरणो से सूर्यमुखी और कमल जैसे पुष्प खिलते है और सूर्यास्त के
जानें मौली मंत्र, तिलक मंत्र, पान का पत्ता, स्वस्तिक मंत्र, करवा, सुपारी, अक्षत, दूर्वा का महत्व
मौली मंत्र, तिलक मंत्र, पान का पत्ता, स्वस्तिक मंत्र, करवा, सुपारी, अक्षत, दूर्वा का महत्व 1. मौली मंत्र का महत्व येन बध्दो बली राजा दानवेन्दो महाबलः । तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे
कांवड़ यात्रा: जानें किसने किया था सबसे पहले शिवलिंग का जल अभिषेक और कहां किया ?
काँवड यात्रा से जुड़े रोचक रहस्य किसने किया था सबसे पहले शिवलिंग का जल अभिषेक और कहां किया ? श्रावण का महीना आते ही हर कोई शिव की भक्ति में
घर के किस दिशा में रखें लडडू गोपाल की मूर्ति ? भोग में चढ़ाएं यह चीज, होगी हर मन्नत पूरी
घर के किस दिशा में रखें लड्डू गोपाल की मूर्ति ? भोग में चढ़ाएं यह चीज, होगी हर मन्नत पूरी पश्चिम दिशा में रखना चाहिए लडडू गोपाल की प्रतिमा. इसके
राधा रानी के अट्ठाईस नाम: राधा रानी के इन 28 नाम को जपके जो मांगोगे वही मिलेगा
राधा रानी के अट्ठाईस नाम राधा रानी के इन 28 नाम को जपके जो मांगोगे वही मिलेगा राधा वृषभानु की पुत्री थी। पद्म पुराण ने इसे वृषभानु राजा की कन्या
वेदमाता गायत्री जन्मोत्सव: गायत्री मन्त्र जाप का महत्व गायत्री जन्मोत्सव पूजन विधि गायत्री पूजा उपासना का विधि माँ गायत्री का आवाहन एवं वेदमाता गायत्री की संक्षिप्त उत्पत्ति कथा
वेदमाता गायत्री जन्मोत्सव गायत्री मन्त्र जाप का महत्व गायत्री जन्मोत्सव पूजन विधि गायत्री पूजा उपासना का विधि माँ गायत्री का आवाहन एवं वेदमाता गायत्री की संक्षिप्त उत्पत्ति कथा हिंदू धार्मिक
यज्ञीय पदार्थ तथा पात्र परिचय हिंदी में
यज्ञीय पदार्थ तथा पात्र परिचय (Introduction to sacrificial material and utensils in Hindi) श्रौत-स्मार्त्त यज्ञों में विविध प्रयोजनों के लिये पात्रों की आवश्यकता होती है । जिस प्रकार कुण्ड बनाया