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ब्रह्म मुहूर्त: जानें ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाला व्यक्ति सफल, सुखी और समृद्ध होता है, क्यों ? और ब्रह्म मुहूर्त में उठने की परंपरा क्यों
जानें ब्रह्म मुहूर्त में उठने की परंपरा क्यों ? रात्रि के अंतिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके
वैशाख मास: जानें वैशाख मास महात्म्य और वैशाख मास की श्रेष्ठता स्कन्द पुराण से
भारतीय पंचांग के अनुसार वैशाख वर्ष का दूसरा महीना होता है। विशाखा नक्षत्र से सम्बन्ध होने के कारण इसको वैशाख कहा जाता है, इस महीने में भगवान ब्रह्मा ने तिलों
Lord Hanuman: जानें श्री हनुमानजी पूजन की प्राचीन वैदिक विधि और चोला चढ़ाने की विधि
श्री हनुमानजी पूजन की प्राचीन वैदिक विधि सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री हनुमानजी पूजन का कलयुग मैं अत्यंत ही महत्त्व है। श्री हनुमानजी शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले एवं
Motivational Quotes: 100+ Best Radha Krishna Motivational Quotes
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जानें मकान की नींव में सर्प और कलश क्यों गाड़ा जाता है ?
जानें मकान की नींव में सर्प और कलश क्यों गाड़ा जाता है ? श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें स्कंद में लिखा है कि पृथ्वी के नीचे पाताल लोक है और इसके
Lord Hanuman: जानें पवन पुत्र हनुमान के जन्म की कहानी
जानें पवन पुत्र हनुमान के जन्म की कहानी ज्योतिषीयों के सटीक गणना के अनुसार हनुमान जी का जन्म 1 करोड़ 85 लाख 58 हजार 114 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को
जानें माँ लक्ष्मी का बिल्व स्वरूप जाने शिव को क्यों प्रिय है बेलपत्र
माँ लक्ष्मी का बिल्व स्वरूप शिव ने क्यों माना बिल्ववृक्ष को शिवस्वरूप ? नारदजी ने एक बार भोलेनाथ की स्तुति कर पूछा प्रभु आपको प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम
कनकधारा स्तोत्र: जानें कनकधारा स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित सिद्ध मंत्र होने के कारण कनकधारा स्तोत्र का पाठ शीघ्र फल देने वाला और दरिद्रता का नाश करने वाला
जानें कनकधारा स्तोत्र हिन्दी अनुवाद सहित कनकधारा स्तोत्र की रचना आदिगुरु शंकराचार्य जी ने की थी। कनकधारा का अर्थ होता है स्वर्ण की धारा, कहते हैं कि इस स्तोत्र के
प्रातः स्मरणीय मंत्र एवं स्तोत्र: सुबह उठते ही इन मंत्रों का जाप जरूर करें
जानें प्रातः स्मरणीय मंत्र एवं स्तोत्र ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुंडरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ । निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।। ब्रह्मानंदं