
पिताजी जब तक पिताजी ज़िंदा होते हैं ना, मानो दुनिया का हर बोझ हल्का लगता है। न नींद में खलल आता है, न फैसले लेने की टेंशन रहती है। क्योंकि जब कोई परेशानी सामने आती है, दिमाग अपने आप कहता है कोई बात नहीं पापा हैं ना
ज़िम्मेदारियाँ होती हैं, लेकिन दिल फिर भी हल्का रहता है क्योंकि पता होता है पीछे एक साया खड़ा है, जो हर तूफान को चुपचाप रोक लेता है। लेकिन जिस दिन वो साया चला जाता है उस दिन से रातें जागकर कटती हैं। ज़रा सी आहट भी डराने लगती है। क्योंकि तब एहसास होता है पापा सिर्फ हमारे पिता नहीं थे, वो तो घर के चौकीदार भी थे।
जब जेब खाली होती है, तो याद आता है -पापा तो चलते-फिरते बैंक थे।
जब मन टूटने लगता है, तो समझ आता है -वो ही तो हिम्मत थे, हौसला थे, आधार थे।
पिताजी… एक ऐसा रिश्ता, जिसकी अहमियत हमें तब समझ आती है, जब वो साथ नहीं होते।
पिताजी सिर्फ एक नाम नहीं, जीवन की प्रेरणा होते हैं, ये पेज सिर्फ पोस्टों का संग्रह नहीं है, बल्कि उन अनकहे एहसासों की आवाज़ है जो आज भी हमारे लिए जीते हैं, पर खुद के लिए कभी कुछ कहते नहीं
पिताजी.. अब लिखने का मन नहीं करता।
जो भी लिखता हूँ, वो आपके लिए लिखता हूँ…
आपकी यादों में, आपके साए में,
दिल के टुकड़ों से शब्द जोड़कर।
लेकिन अब… मेरे जज़्बात भी चोरी होने लगे हैं।
लोग मेरे आँसुओं पर अपने नाम के तमगे लगा लेते हैं।
पिताजी… ये लोग क्या जानें,
कि एक बेटा जब अपने बाप पर लिखता है,
तो हर लाइन में उसकी टूटी हुई रूह बोलती है।
ये सिर्फ़ पोस्ट नहीं हैं ये मेरे घाव हैं,
जो अब दूसरों के नाम से बिकने लगे हैं।
दिल टूटा है पिताजी…
अब लिखने से पहले हाथ काँपते हैं।

दिमाग़ में दुनिया भर की टेंशन,
और दिल में सिर्फ अपने बच्चों की फ़िक्र..
ऐसा होता है पिता
वो बाहर से सख़्त लगता है,
मगर अंदर से टुकड़ों में बंटा होता है…
हर रोज़ अपने सपनों को मारकर
बस तुम्हारे लिए जीता है।
कभी ऑफिस की टेंशन, कभी पैसों की किल्लत, कभी घर की ज़िम्मेदारियाँ…
लेकिन जब तुम मुस्कुराते हो,
तो सब भूल जाता है।
क्योंकि उसके लिए
“सुकून” का मतलब बस तुम्हारी हँसी होती है।

पिता का संघर्ष उस रनवे का निर्माण करता है जहाँ से उसकी औलाद अपने सपनों की उड़ान भरती है

खुद ने कमाया तब समझ आया पिता ने अपना फ़र्ज कैसे निभाया..

बाप को किस उम्र तक कमाना पड़ेगा ये औलाद का रवैया तय करता है उम्र नहीं..

कभी सोचा है…?
जो इंसान आपकी हर छोटी-बड़ी ज़रूरत बिना कहे पूरी कर देता है, वो बाप एक-एक पाई जोड़ने के लिए क्या-क्या सहता है ? अपने सपने मार देता है, थकावट छुपा देता है, खुद की ज़रूरतें टाल देता हैं ताकि आप किसी चीज़ की कमी महसूस न करें।

मुसीबत में साथ माँ बाप ही देते हैं दुनियावाले तो सिर्फ ताना देते हैं

भाग्य का खेल तो माता-पिता की मृत्यु हो जाने के बाद शुरू होता है क्योंकि जब तक माता पिता जीवित है, तब तक उनका आशीर्वाद और उनकी प्रार्थना ही हमारा भाग्य बदल देती है..

कमाना तो पड़ेगा मेरे भाई क्योंकि हमसे ज्यादा हमारे माता पिता को हमारी कामयाबी का इंतजार है

सुन सखी
एक पिता को बुढ़ापा उतना कमजोर नहीं करता, जितना उसकी औलाद का रवैया कमजोर कर देता है

पिताजी के लिये परिवार ही उनका स्वर्ग होता है..

ज़िन्दगी में जैसे जैसे आगे बढ़ोगे, वैसे वैसे माँ बाप की कही हुई बाते, सच नज़र होती आएगी

माता-पिता उस वृक्ष के समान होते हैं, जिससे भूख लगे तो फल मिलता है, और धूप लगे तो छाया.. 
पिता ने अपने पीड़ाओं को कहा नहीं इसका मतलब ये नहीं था कि उन्हें पीड़ा थी नहीं बस उनकी क्षमता ग़ज़ब रही इस को सहन करने की.

लोग पत्थर में बसे भगवान को पूजते हैं लेकिन भगवान के रूप में, मिले अपने माँ बाप को भूल जाते हैं
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वो तरक्की किस काम की जो बुढ़ापे में माँ-बाप का सहारा ना बन सके

बाप मना नहीं करता बेटी को ऊँची उड़ानो से बस वो डरता है क्योंकि आसमान में बाज़ बहुत है

मुझको मेरा हक दो पापा, बहुत कुछ कर दिखलाऊँगी जी लेने दो खुली हवा में सांसे, बेटे से ज्यादा फर्ज निभाऊंगी..

पिताजी वो रनवे है जहां से जिंदगी उड़ान भरती है

“पिता” नाम की ताकत
जब तक आप पीछे खड़े रहते हैं,
तब तक हम बिना डरे रह सकते हैं।
क्योंकि हम जानते हैं
“क्या ये मेरे पिता नहीं हैं वह एक नज़र लेगा! “
1. पिता अभिमान है
2. पिता ताकत है
3. पिता एक योद्धा होता है
4. बाप राजा होता है
5. पिता ही पहचान है
6. पिता ताकत है
7. पिता जीवन की नींव है
8. पिता घर की शान होते हैं
9. पिता सुख दुःख का सागर है
10. पिता माँ की सुन्दरता की सभ्य छाया है
11. पिता बच्चों का सहारा होता है
बाप कोई भी हो, शब्द कम पड़ जायेंगे वर्णन करते करते…
लेकिन यह आवश्यक है क्योंकि यह हमारे अस्तित्व की नींव है।
जब तक एक पिता है, घर में एक छत है …
पिता नहीं है तो घर है लेकिन उसमें बोरियत नहीं है

वो कभी शिकायत नहीं करते,
कभी थकान नहीं जताते…
हर दर्द को मुस्कान में छुपाकर
हमें साया देते हैं।
तो आइए…
उनके त्याग को एक शब्द में समेटने की कोशिश करें
क्या वो प्रेम है ?
संघर्ष है ?
बलिदान है ?
या फिर छाया ?
💬 अपना जवाब Comment में जरूर बताएं।

जब ज़िंदगी उलझने देती है,
और सारे दरवाज़े बंद लगते हैं,
तब दिल सबसे पहले
जिस नाम को पुकारता है…
वो है ‘पिता’
हर मुश्किल का टोल फ्री नंबर।
ना नेटवर्क चाहिए, ना कोई बैलेंस, ना ही कोई समय तय करना होता है,
बस एक कॉल दिल से जाता है…
और उस तरफ से आता है
“बोल बेटा, क्या हुआ ?”
जब जेब खाली हो और सपने भारी,
जब दुनिया मुंह फेर ले और दोस्त भी न साथ दें,
तब वो कहते हैं
“मैं हूँ ना… तू बस चल…”
न टाइमटेबल, न ही शिकायत की फुर्सत…
लेकिन फिर भी,
वो हमेशा “Available” रहते हैं,
हर दर्द, हर चिंता के लिए।
उनकी आवाज़ में वो जादू है,
जो आँसुओं को रोक देती है,
और उनके कंधे…
मानो पूरी दुनिया से मज़बूत हैं।
“पिता” वो टोल फ्री नंबर है,
जो कभी व्यस्त नहीं होता,
जो हर बार जवाब देता है…
चुपचाप लेकिन पूरे दिल से।

एक उम्र तक हमें लगता है पिताजी सिर्फ डांटते हैं। पर असलियत ये है कि उन्होंने जिंदगी भर खुद को डांटा. ताकि हमें खुशी मिल सके।
हर बात में रोकना, टोचना, देर से आने पर सवाल,
खर्च करने से मना…
हमें लगता रहा कि वो हमारी आज़ादी छीन रहे हैं।
लेकिन जब बड़े हुए
तो समझ आया कि
वो खुद को हर दिन डांटते थे,
ताकि हमें मुस्कुराने की वजह मिलती रहे।
उन्होंने खुद के शौक छोड़े
ताकि हम अपने सपने पूरे कर सकें।
उन्होंने थकान नहीं दिखाई
ताकि हमें कभी चिंता ना हो।
उन्होंने ख्वाहिशें रोकीं
ताकि हमारी हर फरमाइश पूरी हो सके।
जो पापा बचपन में हमें टोकते थे,
वही पापा आज हमारी एक कॉल का इंतज़ार करते हैं।
और हम अब भी सोचते हैं कि
“वो तो बहुत सख़्त थे।”
लेकिन सख़्ती तो उनका तरीका था…
वरना वो तो रातों को खुद रोते थे,
ताकि हम चैन से सो सकें।”

दिमाग़ में दुनिया भर की टेंशन, और दिल में सिर्फ अपने बच्चों की फ़िक्र.. ऐसे होते है पिताजी

जब बेटा ऊँचाइयों को छूता है, तब असल में वो सिर्फ़ अपनी नहीं, अपने बाप की मेहनत, त्याग और संघर्षों का फल पा रहा होता है।
पिता जो दिन-रात बिना थके बस एक सपना लिए चलता है मेरा बेटा मुझसे बेहतर जीवन जिए। उस सपने की पूर्ति ही होती है बेटे की सफलता और यही होती है उस संघर्षशील बाप के जीवन की सबसे कीमती कमाई उसका “रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट”।
बेटे की Success, बाप के संघर्षों का
‘रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट’ होता है

पिता को गले लगाना,
ईश्वर की गोद में सिर रखने जैसा सुकून देता है…
क्योंकि उस एक पल में
ना कोई शर्त होती है,
ना कोई अपेक्षा…
बस एक खामोश सुरक्षा की दीवार होती है
जो कहती है
“जब तक मैं हूँ, तुझे कुछ नहीं होने दूँगा।”
पिता को गले लगाना
सिर्फ एक भावना नहीं…
वो वो रिश्ता है
जिसमें ना कोई शिकायत होती है,
ना कोई हिसाब…
बस एक निस्वार्थ प्रेम जो उम्रभर आपके पीछे खड़ा रहता है।
कभी वक़्त निकालिए…
बस एक बार उन्हें गले लगाकर कहिए
‘आप ही मेरी ताकत हो पापा।’
देखना दिल भीग जाएगा, और आशी
र्वाद बरस जाएगा

पिताजी की ‘कद्र’ करनी है तो जीते जी करो…
क्योंकि मरने के बाद तो वो लोग भी आंसू बहा जाते हैं जो उन्हें जानने तक का दावा नहीं करते।
हम अक्सर कहते हैं कि हमें अपने पिताजी से बहुत प्यार है लेकिन क्या वो प्यार , वो इज्ज़त, वो सम्मान हम रोज़ उनके सामने दिखा पाते हैं ?
पिता वो इंसान होता है जो खुद भूखा रहकर भी तुम्हारे लिए खाने का बंदोबस्त करता है। जो पुराने जूते पहनकर भी तुम्हारे लिए नए जूते खरीद लाता है। जो दिनभर की थकावट के बावजूद, तुम्हारा चेहरा देखकर मुस्कुरा देता है।
वो कभी शिकायत नहीं करता, कभी आंसू नहीं दिखाता।
क्योंकि उसे सिखाया गया है ‘पिता कभी थकता नहीं, कभी रोता नहीं’।
पर हक़ीक़त ये है कि वो भी इंसान है।
वो भी थकता है, टूटता है, पर कहता नहीं।
क्योंकि वो नहीं चाहता कि उसके बच्चे उसकी कमजोरी देखें।
आज जब तुम उनसे ऊँची आवाज़ में बात करते हो,
या उनकी सलाह को अनसुना करते हो,
तब तुम्हें लगता है कि तुम सही हो।
पर क्या तुम जानते हो ?
हर रात वो सोते वक्त यही सोचते हैं
“मैंने कहां गलती की कि मेरा बच्चा आज मेरी बात नहीं सुनता ?”
हम वक्त के साथ बदल जाते हैं…
पर पिता वही रहते हैं
हर रोज़ तुम्हारे पीछे खड़े होकर तुम्हें संभालते हुए।
जब वो नहीं रहेंगे तब शायद तुम्हें याद आएगा कि…
उनकी डांट में भी प्यार था,
उनकी चुप्पी में भी फिक्र थी,
और उनके हर त्याग में तुम्हारा कल सुरक्षित था।
मत करना वो गलती जो कई लोग कर चुके हैं
‘कद्र’ करने में देर कर दी।
जीते जी उन्हें वो प्यार, वो सम्मान दो जो वो हक़दार हैं।
रोज़ उनसे बात करो, उनकी बातें सुनो,
उन्हें एहसास दिलाओ कि वो अकेले नहीं हैं।
क्योंकि जब वो चले जाएंगे,
तब न सिर्फ तुम्हें उनका साथ याद आएगा,
बल्कि वो अधूरी बातें भी जो तुम कभी कह नहीं पाए।
इसलिए आज, जाकर अपने पिताजी को गले लगाओ,
और कहो “आप मेरे लिए सबकुछ हैं।”
क्योंकि
पिताजी की ‘कद्र’ करनी है तो जीते जी करो…
मरने के बाद तो पराए भी रो देते हैं।”

“माँ-बाप के फैसले कभी-कभी गलत हो सकते हैं,
लेकिन उनके फैसलों के पीछे की मंशा
हमेशा सिर्फ हमारी भलाई की होती है।
वो डाँटते हैं…
क्योंकि उन्हें फिक्र होती है।
वो रोकते हैं…
क्योंकि वो हमें गलतियों से बचाना चाहते हैं।
वो सपनों पर भी सवाल उठाते हैं
क्योंकि उन्हें हकीकत का डर होता है।
कई बार लगता है
वो हमारी भावनाएँ नहीं समझते,
लेकिन हक़ीक़त ये है
इस दुनिया में हमें सबसे ज़्यादा समझने वाले वही होते हैं।
क्योंकि माँ-बाप का प्यार ‘शर्तों’ पर नहीं,
बल्कि हमारे उज्जवल भविष्य के लिए ‘निर्ष्वार्थ’ होता है।

पिता है तो होली में गुलाल है पिता है तो दिवाली में पटाके है
पिता है तो घर में उजियाला है पिता है तो नये नये कपड़ों की अलमारी है। पिता है तो बच्चों के खिलौने है पिता है तो जेब में पैसे है पिता है तो नौकरी की चिंता कम है पिता है तो घर में मुस्कुराता आँगन है। असल में पिता हर घर की खिड़की में आया पूनम का चाँद है, पिता के बिना जीवन में केवल अमावस्या ही है।

ये किताबे उतनी भी पसंद नहीं लेकिन पढ़ लेंगे सुना है मां बाप का सपना यही पूरा करेंगी।

लोग मानते हैं कि उनकी पहचान ब्रांडेड कपड़ों से होती है लेकिन पिता के नाम से बड़ा कोई ब्रांड नहीं होता

कभी इतना भी मत बदल जाना
कि पिताजी कुछ कहने से पहले सोचने लगें
उनकी डांट में प्यार है,
उनकी चुप्पी में चिंता है,
उनके हाथों की पकड़ में दुआएँ है
दूर जाओ, लेकिन अजनबी मत बनो।
क्योंकि पिताजी सिर्फ खून से नहीं…
तुम्हारे हर संघर्ष के भी साथी होते हैं।
पिताजी “पिता से चाहे जितना भी दूर चले जाना लेकिन उतना पास हमेशा रहना कि वो बेझिझक तुम्हें डांट सकें, बेहिचक गले लगा सकें, तुमसे रुठ सकें, तुम्हें मना सकें, तुम्हें रोक सकें…
और तुम्हारे साथ कहीं भी जा सकें।”

सुर्य और पिता की गर्मी को सहन करना सीखो क्योंकि ये दोनो जब डूबते है, तो चारों ओर अंधेरा छा जाता है।

वक़्त सब कुछ ले जाता है
आख़िर में माँ-बाप की बस
यादें ही रह जाती हैं।

मां हमेशा अकेले में याद आई पिता खाली जेबों में।

लग जाते है कई हिस्से, पिता की तनख्वाह आते ही, बेटे के तनख्वाह में माता-पिता का हिस्सा नहीं होता।

मेरे मध्यमवर्गीय पिता ने मुझे बस एक महामंत्र सिखाया “पढ़ाई मेरे पैसों से करो, ऐश अपने पैसों से करना”

पिता के बाद में पिता तो बन गया हूं पर पिता जैसा कभी नहीं बन पाया…!

प्रेरणा के लिए पिता का संघर्ष देखना ही पर्याप्त है

जो मांगू वहीं दे दिया कर ऐ जिंदगी, तू कभी तो मेरे पापा जैसी बनकर दिखा..

अपने घर के हालात देखकर पढ़ाई करो मेरे भाई ज़िन्दगी बीत जातीं हैं, तुम्हारे मां-बाप की तुम्हें कुछ बनाने के लिए

शहर से अच्छा तो अपना गाँव है, जहाँ हम मकान नम्बर से नहीं ‘पिता’ के नाम से पहचाने जाते हैं

चर्चाएं हो रही थी कि शादी में व्यवस्था ठीक नहीं थी,
उधर एक बाप डायरी में लिख रहा था किसका कितना उधार है

पिताजी ने कहा किसी से कभी दबना मत बेटा नौकरी है, ज़िन्दगी थोड़ी है ज़मीर और खुद्दारी से बड़ा कुछ नहीं।

कभी मां-बाप की याद आए तो भाई बहन मिलकर बैठा करो किसी के चेहरे पर मां मुस्कुराती नजर आएगी तो किसी के लहजे में बाप

असल में पिता हर घर की खिड़की में आया पूनम का चाँद है, पिता के बिना जीवन में केवल अमावस्या ही है।

बुढ़ापा तो केवल शरीर को थकाता है लेकिन औलाद का बेरुखा व्यवहार माता-पिता की आत्मा को थका देता है औलाद के लिए बाप वहां भी हाथ फैला देता है, जहां वों पांव रखना भी पसंद नहीं करता

संगत का जरा ध्यान रखना यदि संगत आपकी खराब हुई तो बदनाम आपके मां-बाप के संस्कार होंगे।।

मां बाप एक ऐसा मेडिकल स्टोर है
जहां हर दर्द की दवा मुफ़्त मिलती हैं

मर्द को दुख तब नहीं होता जब वो मेहनत करके अपने घर को चलाने की कोशिश करता है, मर्द को दर्द तो तब होता है जब उसे पता चलता है जिसके लिए वो दिनरात मेहनत कर रहा है वही लोग उसे दो कौड़ी के बराबर समझते है

घर में छोटे-बड़े पौधों को अपनी छांव में बड़ा करने वाला नीम का पेड़ होता है एक पिता, उसके पास हमारे हर घाव, हर पीड़ा का उपचार होता है लेकिन उसकी कड़वाहट हमें जीवन-भर उसके गुणों से दूर रखती है।

बाप के गुजरने के बाद आपको पता चलेगा कि वो ढाल था, कवच था, वो छत था, मकान था, वो रोटी था, कपड़ा था, वो नींद था, सुकून था

जब एक पिता ने अपने बेटी से पूछा बेटी तेरा बाप हमेशा सर उठाकर चलता है पर तु सर झुकाकर क्यो चलती है..?
इसपर बेटी बोली.. पिता जी मै सर झुकाकर इसलिए चलती हु ताकि आप सर उठाकर चल सके। पिता ने बेटी को गले लगा लिया

बेटे की कामयाबी के लिए बाप को सख्त बनना पड़ता है और विडम्बना देखिये यही सख्ती पिता के प्यार को छुपा देती है, बेटा सिर्फ पिता के शब्दों की कठोरता देखता है उनके पीछे की परवाह और प्यार नहीं देख पाता। जब बेटा बाप की उम्मीदों तले दबकर कामयाब हो जाता है तब दोनों के बीच बन्द हुआ संवाद, दूरी को और बढ़ा देता है वक्त के साथ जिम्मेदारियों की दूरी और बढ़ जाती है बचपन में बेटा बाप के बिना अधूरा था, और बुढ़ापे में बाप बेटे के बिना अधूरा रह जाता है और यह क्रम सदियों से चलता आ रहा है, दुनिया में बहुत कम ऐसे बाप बेटे होंगे जो एक उम्र के बाद गले मिलते होंगे। जहाँ ऐसा होता है वो दृश्य सचमुच ब्रह्मांड की सबसे सुंदर घटनाओं में से एक किसी स्वर्ग से कम न होता होगा

जब माँ छोडकर जाती है तब दुनिया में कोई दुआ देने वाला नहीं होता और जब पिता छोड़ कर जाता है, तब कोई हौसला देने वाला नहीं रहता। भाग्य का खेल तो माता पिता की मृत्यु हो जाने के बाद शुरू होता है क्योंकि जब तक माता पिता जीवित है तब तक उनका आशीर्वाद और उनकी प्रार्थना ही हमारा भाग्य बदल देती है

बाप से डरने वाली हम आखिरी नस्ल हैं और औलाद से डरने वाली “हम पहली”

ये सोच कर ही पुरुषो ने पूरी उम्र गुज़ार दी, मैं कैसे भी रहूं..
मगर मेरा परिवार सुकून से रहे ।।

पिता की इच्छा को अगर सबसे अधिक महत्व किसी ने दिया है इस दुनिया में, तो वो हैं कुंवारी बेटियां

बुजर्ग पिता अगर कोई सलाह दे तो उनका मान रख लिया करो “ठीक है पापा” ये दो शब्द बूढ़े बाप को फिर से जवान कर देते है..

बाप की बातें गौर से सुनो ताकि दूसरों की सुननी ना पड़े !!

सब कुछ मिल जाता है इस दुनिया में, मगर माँ-बाप दोबारा नहीं मिलते जो मुरझा कर एक बार गिर जाएं डालियों से, ऐसे फूल दोबारा नहीं खिला करते

बाप को किस उम्र तक कमाना है,
ये उसके बेटे तय करते है, उम्र नहीं
पिता थक चुके होते हैं…
पर बच्चों की ज़रूरतें उन्हें थकने नहीं देतीं।
उम्र उनके शरीर को झुका देती है,
लेकिन जिम्मेदारियाँ उन्हें
हर सुबह फिर से खड़ा कर देती हैं।
रिटायरमेंट सिर्फ कागज़ पर होता है,
घर के हालात और बच्चों की ख्वाहिशें
उन्हें फिर से वही पुराना संघर्ष
जीने को मजबूर कर देती हैं।
कभी सोचा है कब तक ?
कब तक वो कमाते रहेंगे ?
कब तक वो अपने सपनों को मारते रहेंगे…
ताकि हम अपने सपने पूरे कर सकें ?
पिता ने कहाँ तक कमाना है,
ये उनकी उम्र नहीं…
उनकी संतान तय करती है।
अब समय है कि हम ये तय करें
अब उन्हें कमाने नहीं जीने देना चाहिए।
“पिता ने कहाँ तक कमाना है, ये उनकी उम्र नहीं
उनकी संतान तय करती है”

जिन मूर्तियों को हम बनाते हैं, हम उनकी तो पूजा करते हैं, पर जिन्होंने हमें बनाया हम उन माता-पिता की पूजा क्यों नहीं करते

संस्कार ही अपराध खत्म कर सकते हैं, सरकार नहीं, और ये किसी दुकान में नहीं परिवार के बुजुर्गों से ही मिलते है..

बचपन में जिन हाथों ने संभाला, अब उनके कांपते हाथों को थाम लीजिए.. क्योंकि थकना अब उनका हक़ है, और थामना अब हमारी ज़िम्मेदारी।
वो जो कभी थकते नहीं थे,
अब अक्सर साँसें लंबी लेते हैं,
जो सुबह सबसे पहले उठते थे,
अब चुपचाप खिड़की से बाहर देखते हैं।
जो हमारे हर आँसू को पढ़ लेते थे,
अब खुद की नमी छुपा जाते हैं,
जो हमें उंगली पकड़कर चलना सिखाते थे,
अब धीरे-धीरे लड़खड़ाते हैं।
वो अब कम बोलते हैं,
कम माँगते हैं, कम चलते हैं,
पर अब भी…
सबसे ज़्यादा सोचते हैं हमारे बारे में।
उन्हें अब दौड़ नहीं लगानी,
ना कुछ साबित करना है,
उन्हें चाहिए अब सिर्फ़
थोड़ा वक़्त, थोड़ा आदर, थोड़ा साथ।
क्योंकि थकना अब उनका हक़ है,
और थामना… अब हमारी ज़िम्मेदारी।
अब हमें उनकी उंगली थामनी है,
जिसे उन्होंने कभी हमारी नाजुक हथेली में रखा था,
अब हमें उनके कंधे के नीचे अपना कंधा देना है,
जिन्होंने कभी हमें उचाईयों पर बैठाया था।
अब सवाल ये नहीं कि उन्होंने कितना किया,
सवाल ये है क्या हम उनके लिये कुछ कर रहे हैं ?

आपके “संस्कार” में आपके साथ-साथ आपके माँ-बाप की भी झलक दिखती है कोशिश करे वो “सुन्दर” दिखें

माता पिता वो हस्ती है जिनकी छाया में, उनके बच्चे,
कड़ी से कड़ी धूप को, भी सहन कर लेते है।।

प्रिय पिताजी
मेरा विश्वास करो मुझे धन नहीं चाहिए
मुझे जीवन के अंत तक
बस आपकी छाया चाहिए।

पिताजी गलत करने से टोकते है
डरते है इसलिए रोकते है
फिक्र उनके उसूलो की नहीं हैं
तू सलामत रहे यहीं सोचते है
और तू नाराज़ है उनपे
सोच तुझपे किंतनी जान झोकते है

पिताजी की कोई प्रेम भाषा नहीं होती,
वे बस पूछते हैं पैसे हैं या और चाहिए

असफलता के बाद भी विश्वास करने वाले माँ बाप ही होते हैं

जिस ज्ञान में माँ-बाप की इज्ज़त न हो वो ज्ञान नहीं, एक अभिशाप है। और जो सफलता माँ-बाप से दूरी बढ़ा दे, वो असफलता का सबसे सुंदर भ्रम है।”
कितना भी बड़ा बन जाओ…
कितनी भी ऊँचाई छू लो…
अगर वो ऊँचाई तुम्हें झुकने नहीं देती माँ-बाप के सामने
तो समझ लो, तुमने शिक्षा नहीं, अहंकार सीखा है।
जिस ज्ञान में माँ-बाप की इज्ज़त न हो…
वो ज्ञान नहीं, एक अभिशाप है। और
जो सफलता माँ-बाप से दूरी बढ़ा दे,
वो असफलता का सबसे सुंदर भ्रम है।
आज भी वक़्त है…
पढ़ाई, नौकरी, पैसा सब मिलेगा
पर माँ-बाप दोबारा नहीं मिलते!

बेटा बड़ा तब नहीं होता जब वो कमाता है… बल्कि तब होता है
जब वो पिताजी की कदर करना सीखता है!”
कमाई से बड़ा नहीं होता बेटा…
वो तब बड़ा कहलाता है,
जब वो उस कंधे का दर्द समझने लगे
जिसने उसे पूरी ज़िंदगी ढोया।
पिता ने जो नाम मेहनत से बनाया,
जिसकी एक-एक ईंट में त्याग,
पसीना और ख़ामोशी भरी थी
उसे बचा लेना, उसे आगे ले जाना…
बेटे की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है।
क्योंकि कमाना आसान है…
लेकिन जो नाम पिता ने पीछे छोड़ा है,
उसकी कदर करना
यही असली कमाई होती है।


वक्त रुक सकता है, पर पिताजी की ज़िम्मेदारी नहीं
घड़ी की सूइयाँ थम सकती हैं,
बारिशें रुक सकती हैं,
दुनिया बदल सकती है…
लेकिन एक पिता की जिम्मेदारी कभी नहीं रुकती।
वो बीमार हो, थका हो या टूटा हो
फिर भी सुबह सबसे पहले उठता है,
कंधों पर बोझ लिए, चेहरे पर मुस्कान लिए।
उसे कोई छुट्टी नहीं मिलती,
न भावनाओं से, न फर्ज़ से।
क्योंकि उसके लिए “बाप” होना एक पद नहीं,
एक आजीवन जिम्मेदारी है ,
जो वक़्त से नहीं,
दिल से निभाई जाती है।

गिरा हूं कई बार थका भी हू हर मोड़ पर लेकिन हर बार खुद को उठाया क्योंकि कुछ सपने पापा के अभी भी अधूरे हैं”
कभी हालात ने गिराया…
कभी अपनों ने हिम्मत तोड़ी…
और कभी खुद की थकान ने रुकने को मजबूर किया।
पर हर बार एक ही वजह से फिर उठ खड़ा हु..
“क्योंकि कुछ सपने पापा के अभी भी अधूरे हैं।”
उनके चेहरे पर जो एक उम्मीद थी,
वो आज भी मेरे रास्तों में रौशनी बनकर साथ चलती है।
आज जो कुछ भी कर रहा हूं…
वो सिर्फ अपनी पहचान के लिए नहीं,
बल्कि उस इंसान के लिए है
जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी मेरी नींव मजबूत करने में लगा दी।

पैसे देकर कर्ज उतर सकता हैं पर माँ-बाप का ऋण नही
कर्ज चुकाने के लिए EMI होती है”
ब्याज होता है,
और एक तय तारीख भी होती है…
पर जो ऋण माँ-बाप का होता है ना
वो ना तारीख पूछता है, ना रकम…
बस एहसास माँगता है।
हम बड़े हो जाते हैं,
कमाने लगते हैं,
और सोचते हैं
अब हम बहुत कुछ कर सकते हैं…
पर जो माँ-बाप ने हमें देने के लिए छोड़ा
अपने सपने, अपनी ज़रूरतें, अपनी नींद,
अपना स्वास्थ्य…
क्या वो सब कभी लौटाया जा सकता है?
हम उन्हें गिफ्ट दे सकते हैं,
पैसे भेज सकते हैं…
पर क्या वो समय लौटा सकते हैं,
जो उन्होंने हमारी एक मुस्कान के लिए खोया था?
माँ-बाप का ऋण कोई आर्थिक कर्ज़ नहीं होता,
वो तो एक जीवनभर की सेवा और सम्मान से ही थोड़ा बहुत चुकाया जा सकता है

पुराने कपड़े पहनकर मैंने उनको पैसे बचाते हुए देखा है इसलिए मैं उनके पैसे की इज्जत करता हूं क्योंकि मैंने पापा को कड़ी धूप में भी कमाते देखा है।

हम खुद को क्या समझते हैं ये ज़रूरी नहीं,
हमारा पिता हमें क्या समझता है
बस वही सबसे ज़्यादा मायने रखता है।”
“दुनिया भले हमें पहचानने में वक्त ले ले,
लेकिन पिता तो तब भी यकीन कर चुका होता है
जब हमने खुद कुछ शुरू भी नहीं किया होता।
उसने कभी हमारे सपनों पर शक नहीं किया…
कभी हमारे गिरने पर मुंह नहीं मोड़ा।
उसके लिए हम हमेशा ‘उसकी शान’ रहे हैं।
अगर इस दुनिया में सबसे पहले
किसी की नज़रों में इज्ज़त कमानी है
तो वो सिर्फ और सिर्फ पिता होना चाहिए।

मां बाप से बढ़कर कोई अपना नही होता जो अपने मां बाप का नही होता वो दुनिया में किसी का नही होता

जब भी अपने पिता से मिलना, झुकके मिलना, क्योंकि तुम्हारी जिंदगी में उससे बडा आदमी कोई और नहीं आएगा..

साया बनकर तो सिर्फ मां-बाप ही साथ निभाते हैं, वरना, इस दुनिया में हर रिश्ता किसी ना किसी मतलब से जुड़ा है

हर तूफान में अगर कोई छाया बनकर साथ खड़ा रहता है तो वो सिर्फ माँ-बाप होते हैं.. दुनिया बस तमाशा देखती है

पिता बस रिश्ता नहीं वो एक अभिमान है जो खून में बहता है, और पीठ पर हिम्मत बनकर टिकता है

पिता वो स्तंभ होता है जिस पर पूरे घर का बोझ होता है और वो उसे बिना शिकायत के उठाये रहता है..

औरत थककर मायके जा सकती है, किंतु पुरुष थककर कहां जाएं पुरुष को निरंतर चलते रहने का श्राप मिला है.

वृद्ध मां-बाप के बुढापे का आसरा एक अच्छी बहू होती है ना कि पुत्र।

काश कोई व्रत माँ बाप के लिए भी होता जिसे रखने से सात जन्म तक यही माँ बाप मिलते..

कभी गौर किया है माँ बाप एक उम्र के बाद थप्पड़ मारना क्यों बंद कर देते हैं क्योंकि उन्हें पता है हमसे ज्यादा जोर के थप्पड़ तो अब इसे जिंदगी मारने वाली है..

एक वादा हर बेटे-बेटी का होना चाहिए..
जैसे बचपन में माँ-बाप ने हमारी देखभाल की, वैसे ही अब हम उनका सहारा बनें उम्र भर, ना छोड़ें, ना थकें, ना बहाना बनाएं।
क्योंकि माँ-बाप की सेवा कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है
। 
बाजार से गुजरते वक्त अपनी जेब में पैसे होते हुए भी खुद की ख्वाहिशे पूरी न करने वाला वो कंजूस नहीं हैं साहब एक बाप होता है..

न जाने तुम कहां चले गए पापा इस दुनिया की भीड़ में मुझे अकेला कर गए पापा अब किस की शहजादी कहलाऊंगी तुम्हारे बिना न जाने कैसे जी पाऊंगी

पिताजी वो एहसास हैं जो शब्दों से नहीं, हर रोज़ छोटे-छोटे ख्यालों से प्यार जताते हैं।
पिताजी वो सिर्फ़ इंसान नहीं, एक एहसास हैं। ऐसा एहसास जो कभी ऊँचे शब्दों में नहीं आता, बल्कि हर दिन छोटे-छोटे ख्यालों में, परवाह की खामोश ज़ुबान में, और दूर बैठकर भी “ख़्याल रखने” के तरीके में ज़ाहिर होता है। उनका प्यार लाउड नहीं होता लेकिन सबसे सच्चा होता है। वो कभी ‘आई लव यू’ नहीं कहते, पर हर रोज़ ये जताते हैं मैं हमेशा तेरे साथ हूँ, बेटा

जीते जी कर लेना सेवा माँ बाप की फिर श्राद्ध कितनी भी श्रद्धा से किया जाए वो कहा लौटकर देखने आते है..

भगवान आपकी परेशानी में हर जगह नहीं आ सकते है इसलिए उन्होंने पापा को बनाया है

माता-पिता ही जानते है की वो रह तो रहे है बेटों के घर मे, मगर वैसे नहीं जैसे बेटे रहते थे उनके घर मे..

जिस दिन बेटा ये समझ जाए कि माँ-बाप की डांट भी एक दुआ होती है उस दिन से वो बेटा नहीं, एक समझदार इंसान बन जाता है

पापा कभी डांटे तो सर झुका लेना पर कभी उनको आंखे मत दिखाना..

जिस बाप ने तुम्हें इतना बड़ा किया है। उनको जीने का तरीका मत सिखाना..

एक समय के बाद पिता के कन्धो का भार कम ना कर पाना, जीवन की सबसे बड़ी पराजय है

ये जो आज हम महके महके घूम रहे हैं, हक़ीक़त में तो हमारे पिता के पसीने की खुशबू हैं।

माता-पिता सिर्फ जन्मदाता नहीं होते,
वो तो वो जड़ें है जिनसे हमारा हर सपना जुड़ा होता है। वो थकते है पर जताते नहीं, वो टूटते हैं पर बिखरते नहीं, जब तक साथ हैं उन्हें समझो उन्हें संभालो और सबसे कीमती चीज़ दो
‘अपना समय’
वरना एक दिन ये छाया खो जाएगी,
और हम तन्हा धूप में खड़े होकर
सिर्फ यादें ढूंढते रह जाएंगे…

जो अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए खुद की भूख भूल जाए.. वो सिर्फ़ माता पिता ही हो सकते है।

अपने पिता के हर पल की कद्र करो। मेरे पिता हमेशा के लिए चले गए। मुझे हर दिन उनकी याद आती है।

क्या वक्त था जब मेरी हर मुश्किल में मेरे पापा साथ होते थे और आज रो रो कर पुकारने पर भी पापा आप नही आते

पापा, अगर आप आज यहाँ होते, तो ज़िंदगी कुछ और होती। घर रोशन होता, सबके चेहरों पर मुस्कान होती, सब कुछ सही होता! मुझे आपकी बहुत याद आती है पापा

देर हुई जीत कर जाने में तो हमें सीने से लगाएगा कौन, मां, बाप के जीते जी कुछ करना है यार वरना हमारी सफलता पर इतराएगा कौन…

घर में शादी वाले दिन सबसे सस्ता कपड़ा वो पहनता है जिसने, सबके महंगे कपड़ों का बिल चुकाया था.

बेटी मैं सबके लिए पराई हो सकती हूँ लेकिन मेरी बेटी कभी मेरे लिए पराई नहीं होगी वो मेरी पहचान है, मेरा हिस्सा है जिसमे मेरी पूरी दुनिया बसती है..

पिताजी, आपके साथ बिताया गया समय मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा था।
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एक पिता ही होता है,
जो अपने बच्चों के सपनों के लिए जीता है।
अपने अरमानों को भुलाकर,
उनकी छोटी-सी मुस्कान के
लिए सब कुछ कुर्बान करता है।
वो थकता है, टूटता है…
पर बच्चों के सामने कभी हारता नहीं।
उसका हर दिन, उसकी हर साँस
बस अपने बच्चों के बेहतर कल के लिए होती है।
पिता वो है, जो खुद तकलीफ़ में रहकर भी
अपने बच्चों को आराम देता है वो खामोश रहता है,
पर उसकी खामोशी में ही सबसे बड़ा प्यार छुपा होता है।
यह ब्लॉग पोस्ट वास्तव में प्रेरणादायक है
पापा ये एक शब्द नही एहसास है पिता हमारे जीवन में प्रेम, अनुशासन, मार्गदर्शन और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं।
पिताजी हमारे जीवन के पहले हीरो हैं। कंधे पर चढ़कर दुनिया देखते हैं, उनके हाथ पीढ़ियों तक संस्कार रखते हैं। इस पृष्ठ पर, हम पिताजी की यादें, उनकी प्रेरणादायक कहानियां और उनके जीवन समर्पण को पढ़ सकते हैं।
इस पेज का उद्देश्य पिता द्वारा दी गई अमूल्य शिक्षाओं और उनकी मेहनत के महत्व को कम करना है। पिता हमारे प्रत्येक जीवन में एक अनमोल रत्न है और उनकी उपलब्धियों को हमारी श्रद्धांजलि है।
आशा है पापा से प्रेरणा लेकर हम भी इनके जैसे बन सकें। जीवन के अनमोल पलों का अनुभव करते हुए उनकी यादों में चमक आएगी उनका आशीर्वाद हम सब पर हमेशा बना रहे।
इसे पढ़कर मन में सकारात्मकता का संचार होता है। धन्यवाद!
बहुत बहुत धन्यवाद