धार्मिक ग्रंथों में निर्जला एकादशी पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, छाता, पंखा, जूते, शक्कर तथा दक्षिणा का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से जल से भरे कलश का दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
निर्जला एकादशी मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।
निर्जला एकादशी का फल
- समस्त पापों का नाश होता है।
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य मिलता है।
श्री भगवान जगदीश्वर जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे। करुणा हाथ बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
Must Read Shri Narayan Kavach समस्त मनोकामना को पूरा करने के लिए करें नारायण कवच का जाप, जिंदगी से खत्म होगी सभी बाधाएं
निर्जला एकादशी 2026 FAQ
Q1. निर्जला एकादशी 2026 कब है ?
निर्जला एकादशी 25 जून 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
Q2. निर्जला एकादशी का पारण कब होगा ?
पारण 26 जून 2026, शुक्रवार को प्रातः 5:25 बजे से 8:13 बजे तक किया जाएगा।
Q3. निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहा जाता है ?
महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर यह व्रत किया था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाता है।
Q4. निर्जला एकादशी में क्या जल पी सकते हैं ?
परंपरागत नियमों के अनुसार इस व्रत में जल का भी त्याग किया जाता है। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार श्रद्धालु निर्णय ले सकते हैं।
Q5. निर्जला एकादशी पर कौन सा दान श्रेष्ठ माना गया है ?
जल से भरा कलश, वस्त्र, छाता, जूते, शक्कर, अन्न और दक्षिणा का दान विशेष पुण्यदायक माना गया है।
Must Read एकादशी व्रत 2026 कैलेंडर | सभी एकादशी तिथि और दिन सूची | Ekadashi 2026 Dates
निष्कर्ष
निर्जला एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना का अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी पर्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस एक व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की भक्ति, दान-पुण्य, जप और संयम के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
⚠️ डिसक्लेमर
इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दी जा सकती। कृपया किसी भी प्रकार के उपयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
Nirjala Ekadashi व्रत का पौराणिक महत्व अत्यंत विशेष माना गया है। महाभारत काल में जब महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाले एकादशी व्रत का उपदेश दिया, तब युधिष्ठिर ने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के महत्व के विषय में प्रश्न किया। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इस एकादशी का विस्तृत वर्णन महर्षि वेदव्यास करेंगे क्योंकि वे वेदों और शास्त्रों के महान ज्ञाता हैं। महर्षि वेदव्यास ने बताया कि कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों एकादशियों में अन्न ग्रहण करना वर्जित माना गया है। द्वादशी के दिन स्नान कर भगवान केशव का पूजन करके ब्राह्मणों को भोजन कराने के पश्चात स्वयं भोजन करना चाहिए। यह सुनकर भीमसेन ने कहा कि वे अत्यधिक भूख के कारण सभी एकादशी व्रत नहीं कर सकते। उनके उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है,
इसलिए उनसे उपवास नहीं हो पाता। उन्होंने ऐसा कोई एक व्रत बताने का निवेदन किया जिससे उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो सके। तब महर्षि वेदव्यास ने भीमसेन को ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का निर्जल व्रत करने का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक जल का त्याग करके यह व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। व्यासजी ने कहा कि जो श्रद्धापूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत समय में विष्णुदूत उसे भगवान विष्णु के धाम ले जाते हैं। महर्षि वेदव्यास की आज्ञा से भीमसेन ने यह व्रत आरंभ किया। तभी से यह व्रत भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
निर्जला एकादशी व्रत नियम
- एकादशी के दिन अन्न एवं जल का त्याग करें।
- भगवान विष्णु का स्मरण एवं नाम जप करें।
- क्रोध, निंदा और असत्य वचन से बचें।
- सात्विक विचार और आचरण रखें।
- द्वादशी के दिन विधिपूर्वक पारण करें।
निर्जला एकादशी पर विशेष दान
धार्मिक ग्रंथों में निर्जला एकादशी पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, छाता, पंखा, जूते, शक्कर तथा दक्षिणा का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से जल से भरे कलश का दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
निर्जला एकादशी मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।
निर्जला एकादशी का फल
- समस्त पापों का नाश होता है।
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य मिलता है।
श्री भगवान जगदीश्वर जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे। करुणा हाथ बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
Must Read Shri Narayan Kavach समस्त मनोकामना को पूरा करने के लिए करें नारायण कवच का जाप, जिंदगी से खत्म होगी सभी बाधाएं
निर्जला एकादशी 2026 FAQ
Q1. निर्जला एकादशी 2026 कब है ?
निर्जला एकादशी 25 जून 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
Q2. निर्जला एकादशी का पारण कब होगा ?
पारण 26 जून 2026, शुक्रवार को प्रातः 5:25 बजे से 8:13 बजे तक किया जाएगा।
Q3. निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहा जाता है ?
महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर यह व्रत किया था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाता है।
Q4. निर्जला एकादशी में क्या जल पी सकते हैं ?
परंपरागत नियमों के अनुसार इस व्रत में जल का भी त्याग किया जाता है। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार श्रद्धालु निर्णय ले सकते हैं।
Q5. निर्जला एकादशी पर कौन सा दान श्रेष्ठ माना गया है ?
जल से भरा कलश, वस्त्र, छाता, जूते, शक्कर, अन्न और दक्षिणा का दान विशेष पुण्यदायक माना गया है।
Must Read एकादशी व्रत 2026 कैलेंडर | सभी एकादशी तिथि और दिन सूची | Ekadashi 2026 Dates
निष्कर्ष
निर्जला एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना का अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी पर्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस एक व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की भक्ति, दान-पुण्य, जप और संयम के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
⚠️ डिसक्लेमर
इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दी जा सकती। कृपया किसी भी प्रकार के उपयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
निर्जला एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, दान एवं आरती
एकादशी व्रत हिन्दुओं में सबसे अधिक प्रचलित व्रत माना जाता है। वर्ष में चौबीस एकादशियाँ आती हैं, किन्तु इन सब एकादशियों में ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी सबसे बढ़कर फल देने वाली समझी जाती है क्योंकि इस एक एकादशी का व्रत रखने से वर्ष भर की एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी का व्रत अत्यन्त संयम साध्य माना गया है।
निर्जला एकादशी 2026 कब है ?
- निर्जला एकादशी: 25 जून 2026, गुरुवार
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जून 2026, सायं 6:12 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून 2026, रात्रि 8:09 बजे
- पारण समय: 26 जून 2026, शुक्रवार प्रातः 5:25 बजे से 8:13 बजे तक
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है।
निर्जला एकादशी का महत्व
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। निर्जला अर्थात बिना जल ग्रहण किए उपवास रखना। इसलिए यह व्रत कठिन तप और साधना के समान महत्व रखता है। इस व्रत को भीमसेनी एकादशी तथा पांडव एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भोजन संयम न रखने वाले पांडव भीमसेन ने इस व्रत का पालन कर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की थी। इसलिए इसका नाम भीमसेनी एकादशी पड़ा। हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व ही नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष महत्व है। यह व्रत मन को संयम और आत्मबल प्रदान करता है।
निर्जला एकादशी पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- विष्णु सहस्रनाम अथवा नारायण कवच का पाठ करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करें।
- द्वादशी तिथि में दान-पुण्य करके पारण करें।
निर्जला एकादशी के दान
इस एकादशी का व्रत करके यथा सामर्थ्य अन्न, जल, वस्त्र, आसन, जूता, छाता, पंखा तथा फलादि का दान करना चाहिए। इस दिन विधिपूर्वक जल कलश का दान विशेष पुण्यदायक माना गया है।
- जल कलश दान
- वस्त्र दान
- छाता दान
- जूता दान
- फल एवं अन्न दान
- दक्षिणा दान
निर्जला एकादशी व्रत के लाभ
- वर्षभर की एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- पापों का नाश होता है।
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी व्रत की कथा
Nirjala Ekadashi व्रत का पौराणिक महत्व अत्यंत विशेष माना गया है। महाभारत काल में जब महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाले एकादशी व्रत का उपदेश दिया, तब युधिष्ठिर ने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के महत्व के विषय में प्रश्न किया। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इस एकादशी का विस्तृत वर्णन महर्षि वेदव्यास करेंगे क्योंकि वे वेदों और शास्त्रों के महान ज्ञाता हैं। महर्षि वेदव्यास ने बताया कि कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों एकादशियों में अन्न ग्रहण करना वर्जित माना गया है। द्वादशी के दिन स्नान कर भगवान केशव का पूजन करके ब्राह्मणों को भोजन कराने के पश्चात स्वयं भोजन करना चाहिए। यह सुनकर भीमसेन ने कहा कि वे अत्यधिक भूख के कारण सभी एकादशी व्रत नहीं कर सकते। उनके उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है,
इसलिए उनसे उपवास नहीं हो पाता। उन्होंने ऐसा कोई एक व्रत बताने का निवेदन किया जिससे उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो सके। तब महर्षि वेदव्यास ने भीमसेन को ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का निर्जल व्रत करने का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक जल का त्याग करके यह व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। व्यासजी ने कहा कि जो श्रद्धापूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत समय में विष्णुदूत उसे भगवान विष्णु के धाम ले जाते हैं। महर्षि वेदव्यास की आज्ञा से भीमसेन ने यह व्रत आरंभ किया। तभी से यह व्रत भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
निर्जला एकादशी व्रत नियम
- एकादशी के दिन अन्न एवं जल का त्याग करें।
- भगवान विष्णु का स्मरण एवं नाम जप करें।
- क्रोध, निंदा और असत्य वचन से बचें।
- सात्विक विचार और आचरण रखें।
- द्वादशी के दिन विधिपूर्वक पारण करें।
निर्जला एकादशी पर विशेष दान
धार्मिक ग्रंथों में निर्जला एकादशी पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, छाता, पंखा, जूते, शक्कर तथा दक्षिणा का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से जल से भरे कलश का दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
निर्जला एकादशी मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।
निर्जला एकादशी का फल
- समस्त पापों का नाश होता है।
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य मिलता है।
श्री भगवान जगदीश्वर जी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे। करुणा हाथ बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
Must Read Shri Narayan Kavach समस्त मनोकामना को पूरा करने के लिए करें नारायण कवच का जाप, जिंदगी से खत्म होगी सभी बाधाएं
निर्जला एकादशी 2026 FAQ
Q1. निर्जला एकादशी 2026 कब है ?
निर्जला एकादशी 25 जून 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
Q2. निर्जला एकादशी का पारण कब होगा ?
पारण 26 जून 2026, शुक्रवार को प्रातः 5:25 बजे से 8:13 बजे तक किया जाएगा।
Q3. निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी क्यों कहा जाता है ?
महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर यह व्रत किया था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाता है।
Q4. निर्जला एकादशी में क्या जल पी सकते हैं ?
परंपरागत नियमों के अनुसार इस व्रत में जल का भी त्याग किया जाता है। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार श्रद्धालु निर्णय ले सकते हैं।
Q5. निर्जला एकादशी पर कौन सा दान श्रेष्ठ माना गया है ?
जल से भरा कलश, वस्त्र, छाता, जूते, शक्कर, अन्न और दक्षिणा का दान विशेष पुण्यदायक माना गया है।
Must Read एकादशी व्रत 2026 कैलेंडर | सभी एकादशी तिथि और दिन सूची | Ekadashi 2026 Dates
निष्कर्ष
निर्जला एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना का अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी पर्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस एक व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की भक्ति, दान-पुण्य, जप और संयम के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
⚠️ डिसक्लेमर
इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दी जा सकती। कृपया किसी भी प्रकार के उपयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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