Hari Charan हरि चरण दुःख हरण श्री हरी चरण दुःख हरण, चरन-कमल बंदौ हरि राई ।जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै आंधर कों सब कछु दरसाई॥
श्री हरी चरण दुःख हरण, चरन-कमल बंदौ हरि राई ।
श्री हरी चरण दुःख हरण, चरन-कमल बंदौ हरि राई ।
मुझसे ज़्यादा तुझे मेरी आँखें चाहती हैं.. जब भी तुझे
दुःख हर इंसान के जीवन मे कभी ना कभी जरूर
जिस चीज का डर लगता है वही चीज करो, डर
मेरे सांवरिया बस तेरे चरणों का हो दीदार। तेरी शरण
अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है, देर करने
प्रेम का अर्थ किसी को पाना नहीं किन्तु उसमें खो
हे सांवरिया आपके ख्यालो का तकिया जब सिराहने लगाते हैं,
यथा धेनु सहस्रेषु वत्सो विन्दति मातरम्। एवं पूर्वकृतं कर्म कर्तारमनुगच्छति