दीपावली 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, लक्ष्मी-गणेश मंत्र और आरती

दीपावली हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। इसे प्रकाश, सुख-समृद्धि और खुशियों का पर्व माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

इस लेख में जानिए दीपावली 2026 की तिथि, लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, संपूर्ण पूजा विधि, मंत्र, आरती और क्षमा-याचना मंत्र।

दीपावली 2026 कब है ?

दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक अमावस्या के अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

Diwali 2026 लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त

दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। आगरा के लिए पूजा का समय स्थानीय पंचांग से मिलाकर ही प्रकाशित करें। पूजा के मुहूर्त में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है।

  • दीपावली: रविवार, 8 नवंबर 2026
  • लक्ष्मी-गणेश पूजा मुहूर्त: शाम 5:53 से 7:50 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त 11:43 AM से 12:26 PM
  • वृषभ काल 5:54 PM से 7:50 PM
  • प्रदोष काल 05:30 PM से 08:00 PM
  • निशिता काल 11:39 PM से 12:31 AM (09 नवंबर)
  • अमावस्या तिथि: 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे से 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे तक।
  • पूजा का समय: स्थानीय पंचांग के अनुसार जाँचें
  • पूजा: माता लक्ष्मी और भगवान गणेश
  • नोट – दीवाली पर माता लक्ष्मी की पूजा के लिए वृषभ काल और निशिता काल के मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। इस दीवाली स्वाती नक्षत्र, आयुष्मान और सौभाग्य योग का भी खास संयोग रहेगा।

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दीपावली का धार्मिक महत्व

दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व माना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं और घर को स्वच्छ करके सजाया जाता है।

माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। भगवान गणेश को विघ्नों का नाश करने वाला और शुभ कार्यों का आरंभ कराने वाला देवता माना जाता है। इसलिए दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी का पूजन भी किया जाता है।

दीपावली पूजा सामग्री

  • माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र
  • पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
  • कलश, जल और आम के पत्ते
  • रोली, कुमकुम, चंदन और अक्षत
  • पुष्प और फूलों की माला
  • धूप, दीपक, घी या तेल और रूई की बत्ती
  • फल, मिठाई और नैवेद्य
  • पान, सुपारी, इलायची और लौंग
  • दक्षिणा, कपूर और आरती की थाली
  • गंगाजल और पूजा के लिए आवश्यक अन्य सामग्री

दीपावली पूजा की तैयारी

Diwali के दिन घर और पूजा स्थल की सफाई करें। पूजा की चौकी पर साफ वस्त्र बिछाएँ। उस पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएँ स्थापित करें। पूजा की सभी सामग्री व्यवस्थित रखें। इसके बाद शांत मन से पूजा आरंभ करें। पूजा के समय दीपक जलाएँ और भगवान का स्मरण करें। पूजा में अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि का पालन करें।

पूजा से पहले शुद्धिकरण

पूजा से पहले हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर बैठकर अपने आराध्य देव का स्मरण करें। इसके बाद आचमन और संकल्प करें। संकल्प में अपना नाम, स्थान, तिथि और पूजा का उद्देश्य बोलें। संवत्सर तथा पंचांग संबंधी विवरण स्थानीय पंचांग के अनुसार रखें।

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश का स्मरण करें। परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करते हुए संकल्प लें। संकल्प पूरा होने पर जल नीचे छोड़ दें।

भगवान गणेश का पूजन

किसी भी शुभ कार्य और पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से की जाती है। दीपावली पर भी सबसे पहले गणेश जी का ध्यान और पूजन करें। हाथ में पुष्प लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें।

गणेश जी का ध्यान मंत्र

खर्वं स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं।
प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम्॥
दन्ताघातविदारितारिरुधिरैः सिन्दूरशोभाकरं।
वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। ध्यानं समर्पयामि।

ॐ गजाननं भूतगणादिसेवितं।
कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्॥
उमासुतं शोकविनाशकारकम्।
नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

गणपति आवाहन मंत्र

ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे वसो मम।
आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्॥

एह्येहि हेरम्ब महेशपुत्र समस्तविघ्नौघविनाशदक्ष।
माङ्गल्यपूजाप्रथमप्रधान गृहाण पूजां भगवन् नमस्ते॥

ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय गणपतये नमः। गणपतिमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि।

ॐ गं गणपतये इहागच्छ इह तिष्ठ।

आसन अर्पण

अनेकरत्नसंयुक्तं नानामणिगणान्वितम्।
कार्तस्वरमयं दिव्यमासनं परिगृह्यताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। आसनार्थे पुष्पं समर्पयामि।

स्नान और जल अर्पण

मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। पाद्यं, अर्घ्यं, आचमनीयं च स्नानं समर्पयामि। पुनः आचमनीयं जलं समर्पयामि।

वस्त्र अर्पण

सर्वभूषादिके सौम्ये लोके लज्जानिवारणे।
मयोपपादिते तुभ्यं गृह्यतां वाससी शुभे॥

ॐ गं गणपतये नमः। वस्त्रोपवस्त्रं समर्पयामि। आचमनीयं जलं समर्पयामि।

यज्ञोपवीत

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥

यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वा यज्ञोपवीतेनोपनह्यामि।

नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्।
उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर॥

ॐ गं गणपतये नमः। यज्ञोपवीतं समर्पयामि।

चंदन अर्पण

ॐ श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्।
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। चन्दनं समर्पयामि।

अक्षत अर्पण

अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कुमाक्ताः सुशोभिताः।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥

ॐ गं गणपतये नमः। अक्षतान् समर्पयामि।

पुष्प अर्पण

माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि भक्तितः।
मयाहृतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। पुष्पं बिल्वपत्रं च समर्पयामि।

दूर्वा अर्पण

दूर्वाङ्कुरान् सुहरितानमृतान् मङ्गलप्रदान्।
आनीतांस्तव पूजार्थं गृहाण गणनायक॥

ॐ गं गणपतये नमः। दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि।

सिंदूर अर्पण

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। सिन्दूरं समर्पयामि।

धूप अर्पण

वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो सुमनोहरः।
आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। धूपमाघ्रापयामि।

दीप अर्पण

साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। दीपं दर्शयामि।

नैवेद्य अर्पण

शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च।
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। नैवेद्यं निवेदयामि। नानाऋतुफलानि च समर्पयामि। आचमनीयं जलं समर्पयामि।

ताम्बूल अर्पण

पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्।
एलालवङ्गसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥

ॐ गं गणपतये नमः। ताम्बूलं समर्पयामि।

दक्षिणा अर्पण

हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः।
अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥

ॐ गं गणपतये नमः। कृतायाः पूजायाः सद्गुण्यार्थे द्रव्यदक्षिणां समर्पयामि।

आरती

कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्।
आरार्तिकमहं कुर्वे पश्य मां वरदो भव॥

ॐ गं गणपतये नमः। आरार्तिकं समर्पयामि।

मंत्रपुष्पांजलि

नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च।
पुष्पाञ्जलिर्मया दत्तो गृहाण परमेश्वर॥

ॐ गं गणपतये नमः। मन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामि।

प्रदक्षिणा

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥

ॐ गं गणपतये नमः। प्रदक्षिणां समर्पयामि।

विशेष अर्घ्य

रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षक।
भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्॥

द्वैमातुर कृपासिन्धो षाण्मातुराग्रज प्रभो।
वरदस्त्वं वरं देहि वाञ्छितं वाञ्छितार्थद॥

अनेन सफलार्घ्येण वरदोऽस्तु सदा मम॥

ॐ गं गणपतये नमः। विशेषार्घ्यं समर्पयामि।

गणेश जी की प्रार्थना

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

भक्तार्तिनाशनपराय गणेश्वराय सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय।
विद्याधराय विकटाय च वामनाय भक्तप्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते॥

नमस्ते ब्रह्मरूपाय विष्णुरूपाय ते नमः।
नमस्ते रुद्ररूपाय करिरूपाय ते नमः॥

विश्वरूपस्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मचारिणे।
भक्तप्रियाय देवाय नमस्तुभ्यं विनायक॥

त्वां विघ्नशत्रुदलनेति च सुन्दरेति भक्तप्रियेति सुखदेति फलप्रदेति।
विद्याप्रदेत्यघहरेति च ये स्तुवन्ति तेभ्यो गणेश वरदो भव नित्यमेव॥

ॐ गं गणपतये नमः। प्रार्थनापूर्वकं नमस्कारान् समर्पयामि।

गणेश पूजन समर्पण

गणेशपूजने कर्म यन्न्यूनमधिकं कृतम्।
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोऽस्तु सदा मम॥

अनया पूजया गणेशः प्रीयताम्। न मम।

माता महालक्ष्मी का पूजन

भगवान गणेश के पूजन के बाद माता महालक्ष्मी का ध्यान और आवाहन करें। इसके बाद क्रम से आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, चंदन, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

माता लक्ष्मी का ध्यान मंत्र

पद्मासनां पद्मकरां पद्ममालाविभूषिताम्।
क्षीरसागरसम्भूतां हेमवर्णसमप्रभाम्॥

क्षीरवर्णसमं वस्त्रं दधानां हरिवल्लभाम्।
भावये भक्तियोगेन भार्गवीं कमलां शुभाम्॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये विष्णुवक्षःस्थलालये।
आवाहयामि देवि त्वां क्षीरसागरसम्भवे॥

पद्मासने पद्मकरे सर्वलोकैकपूजिते।
नारायणप्रिये देवि सुप्रीता भव सर्वदा॥

माता लक्ष्मी का आवाहन

सर्वलोकस्य जननीं सर्वसौख्यप्रदायिनीम्।
सर्वदेवमयीमीशां देवीमावाहयाम्यहम्॥

ॐ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥

ॐ महालक्ष्म्यै नमः। महालक्ष्मीमावाहयामि। आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।

आसन

अनेकरत्नसंयुक्तं नानामणिगणान्वितम्।
इदं हेममयं दिव्यमासनं परिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। आसनार्थे पुष्पं समर्पयामि।

पाद्य

गङ्गादिसर्वतीर्थेभ्य आनीतं तोयमुत्तमम्।
पाद्यार्थं ते प्रदास्यामि गृहाण परमेश्वरि॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। पाद्यं समर्पयामि।

अर्घ्य

गन्धपुष्पाक्षतैर्युक्तमर्घ्यं सम्पादितं मया।
गृहाण त्वं महादेवि प्रसन्ना भव सर्वदा॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। अर्घ्यं समर्पयामि।

आचमन

कर्पूरेण सुगन्धेन वासितं स्वादु शीतलम्।
तोयमाचमनीयार्थं गृहाण परमेश्वरि॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। आचमनं समर्पयामि।

स्नान

मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्।
तदिदं कल्पितं देवि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। स्नानार्थं जलं समर्पयामि।

वस्त्र

सर्वभूषादिके सौम्ये लोकलज्जानिवारणे।
मयोपपादिते तुभ्यं गृह्यतां वाससी शुभे॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। वस्त्रोपवस्त्रं समर्पयामि। आचमनीयं जलं समर्पयामि।

चंदन

श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्।
विलेपनं सुरश्रेष्ठे चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। चन्दनं समर्पयामि।

कुमकुम

कुङ्कुमं कामदं दिव्यं कामिनीकामसम्भवम्।
कुङ्कुमेनार्चिता देवी कुङ्कुमं प्रतिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। कुङ्कुमं समर्पयामि।

सिंदूर

सिन्दूरमरुणाभासं जपाकुसुमसन्निभम्।
अर्पितं ते मया भक्त्या प्रसीद परमेश्वरि॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। सिन्दूरं समर्पयामि।

अक्षत

अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कुमाक्ताः सुशोभिताः।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरि॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। अक्षतान् समर्पयामि।

आभूषण

हारकङ्कणकेयूरमेखलाकुण्डलादिभिः।
रत्नाढ्यं हीरकोपेतं भूषणं प्रतिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। आभूषणानि समर्पयामि।

पुष्प

माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि भक्तितः।
मयाहृतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। पुष्पं समर्पयामि।

दूर्वा

तृणकान्तमणिप्रख्यहरिताभिः सुजातिभिः।
दूर्वाभिराभिर्भवतीं पूजयामि महेश्वरि॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि।

माता लक्ष्मी की अंग पूजा

  • ॐ चपलायै नमः। पादौ पूजयामि।
  • ॐ चञ्चलायै नमः। जानुनी पूजयामि।
  • ॐ कमलायै नमः। कटिं पूजयामि।
  • ॐ कात्यायन्यै नमः। नाभिं पूजयामि।
  • ॐ जगन्मात्रे नमः। जठरं पूजयामि।
  • ॐ विश्ववल्लभायै नमः। वक्षःस्थलं पूजयामि।
  • ॐ कमलवासिन्यै नमः। हस्तौ पूजयामि।
  • ॐ पद्माननायै नमः। मुखं पूजयामि।
  • ॐ कमलपत्राक्ष्यै नमः। नेत्रत्रयं पूजयामि।
  • ॐ श्रियै नमः। शिरः पूजयामि।
  • ॐ महालक्ष्म्यै नमः। सर्वाङ्गं पूजयामि।

अष्टसिद्धि पूजन

  • ॐ अणिम्ने नमः।
  • ॐ महिम्ने नमः।
  • ॐ गरिम्णे नमः।
  • ॐ लघिम्णे नमः।
  • ॐ प्राप्त्यै नमः।
  • ॐ प्राकाम्यै नमः।
  • ॐ ईशितायै नमः।
  • ॐ वशितायै नमः।

अष्टलक्ष्मी पूजन

  • ॐ आद्यलक्ष्म्यै नमः।
  • ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः।
  • ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नमः।
  • ॐ अमृतलक्ष्म्यै नमः।
  • ॐ कामलक्ष्म्यै नमः।
  • ॐ सत्यलक्ष्म्यै नमः।
  • ॐ भोगलक्ष्म्यै नमः।
  • ॐ योगलक्ष्म्यै नमः।

धूप

वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो सुमनोहरः।
आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। धूपमाघ्रापयामि।

दीप

साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
दीपं गृहाण देवेशि त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। दीपं दर्शयामि।

नैवेद्य

शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च।
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। नैवेद्यं निवेदयामि। पुनः आचमनीयं जलं समर्पयामि।

ऋतुफल

इदं फलं मया देवि स्थापितं पुरतस्तव।
तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। ऋतुफलानि समर्पयामि।

ताम्बूल

पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्।
एलालवङ्गसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। ताम्बूलं समर्पयामि।

दक्षिणा

हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः।
अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। दक्षिणां समर्पयामि।

कपूर आरती

कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्।
आरार्तिकमहं कुर्वे पश्य मां वरदो भव॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। आरार्तिकं समर्पयामि।

शांति मंत्र

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथ्वी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः।
सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

मंत्रपुष्पांजलि

नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च।
पुष्पाञ्जलिर्मया दत्ता गृहाण परमेश्वरि॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। मन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामि।

माता लक्ष्मी की प्रार्थना

सुरासुरेन्द्रादिकिरीटमौक्तिकैर्युक्तं सदा यत्तव पादपङ्कजम्।
परावरं पातु वरं सुमङ्गलं नमामि भक्त्याखिलकामसिद्धये॥

भवानि त्वं महालक्ष्मीः सर्वकामप्रदायिनी।
सुपूजिता प्रसन्ना स्यान्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्त्वदर्चनात्॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। प्रार्थनापूर्वकं नमस्कारान् समर्पयामि।

महालक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥

जप समर्पण

ॐ गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम्।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादान्महेश्वरि॥

श्री लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय॥

दुर्गारूप निरंजनि, सुख-संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय॥

जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता॥ ॐ जय॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता॥ ॐ जय॥

महालक्ष्मी जी की आरती जो कोई नर गाता।
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय॥

क्षमा-याचना मंत्र

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥

श्री महालक्ष्म्यै नमः। क्षमायाचनां समर्पयामि।

हे परमेश्वरी! मुझे न तो आवाहन करना आता है, न विसर्जन और न ही विधिपूर्वक पूजा करना आता है। पूजा में हुई त्रुटियों के लिए मुझे क्षमा करें। मैंने जो मंत्रहीन, क्रियाहीन और भक्तिहीन पूजन किया है, वह आपकी कृपा से पूर्ण हो।

ॐ तत्सद् ब्रह्मार्पणमस्तु।

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दीपावली 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. दीपावली 2026 कब है ?

दीपावली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी।

Q2. दीपावली पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है ?

दीपावली पर मुख्य रूप से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

Q3. दीपावली पूजा में किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है ?

पूजा में लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, दीपक, धूप, पुष्प, अक्षत, कुमकुम, चंदन, फल, मिठाई और नैवेद्य जैसी सामग्री रखी जाती है।

Q4. दीपावली पर लक्ष्मी मंत्र कौन-सा है ?

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

Q5. दीपावली पर पूजा किस समय करनी चाहिए ?

परंपरानुसार प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा करना शुभ माना जाता है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त की पुष्टि करें।

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निष्कर्ष

दीपावली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान से करें। घर में दीपक जलाएँ और परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा के समय स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।