नवरात्रि 2026 छठा दिन: माँ कात्यायनी पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती और सुख-समृद्धि के उपाय

नवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है।
महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया था।
इसी कारण इन्हें कात्यायनी कहा जाता है।

माँ कात्यायनी पूजा मुहूर्त 2026

  • तिथि: चैत्र शुक्ल षष्ठी
  • तारीख: 24 मार्च 2026
  • दिन: मंगलवार
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:19 बजे तक

इस शुभ मुहूर्त में माँ कात्यायनी की पूजा करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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माँ कात्यायनी का स्वरूप

माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और तेजस्वी है।
माता सिंह पर सवार रहती हैं और उनके चार हाथ होते हैं।

एक हाथ वरमुद्रा में, एक हाथ अभय मुद्रा में तथा अन्य हाथों में तलवार और कमल का फूल होता है।

इनकी उपासना से साधक के भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है।
योग साधना में इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित रहता है।

माँ कात्यायनी पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • सबसे पहले कलश और भगवान गणेश की पूजा करें।
  • माँ कात्यायनी का ध्यान करें।
  • धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
  • माता के मंत्र और स्तोत्र का पाठ करें।
  • अंत में आरती करके सुख-समृद्धि की कामना करें।

माँ कात्यायनी का सामान्य मंत्र

चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

शप्तशती मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

माँ कात्यायनी ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥

स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।

वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥

पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।

मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।

कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥

माँ कात्यायनी स्तोत्र पाठ

कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।

स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥

पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।

सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।

परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

माँ कात्यायनी कवच

कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।

ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥

कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥

माँ कात्यायनी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर नामक राक्षस ने देवताओं को अत्यंत परेशान कर दिया था।

तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने तेज से देवी को प्रकट किया।
महर्षि कात्यायन ने उनकी तपस्या की थी, इसलिए देवी ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया।

बाद में देवी कात्यायनी ने महिषासुर का वध करके देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया।

कार्य सिद्धि का मंत्र

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥

नवरात्रि षष्ठी के विशेष उपाय

  • ग्लैमर या फिल्म क्षेत्र में सफलता के लिए माँ को घी का दीपक जलाएं।
  • खेलकूद में सफलता के लिए सिन्दूर और शहद से तिलक करें।
  • राजनीति में सफलता के लिए लाल कपड़े में चूड़ी और गुड़हल अर्पित करें।
  • प्रतियोगिता में सफलता के लिए सात प्रकार की दाल चींटियों को खिलाएं।
  • सर्व सफलता के लिए कुमकुम, घी, मिश्री और शहद का तिलक माता को लगाएं।

माँ कात्यायनी की आरती

जय जय अम्बे जय कात्यानी।

जय जगमाता जग की महारानी।।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।

वहा वरदाती नाम पुकारा।।

कई नाम है कई धाम है।

यह स्थान भी तो सुखधाम है।।

हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी।

कही योगेश्वरी महिमा न्यारी।।

हर जगह उत्सव होते रहते।

हर मंदिर में भगत है कहते।।

कत्यानी रक्षक काया की।

ग्रंथि काटे मोह माया की।।

झूठे मोह से छुडाने वाली।

अपना नाम जपाने वाली।।

ब्रेह्स्पतिवार को पूजा करिए।

ध्यान कात्यानी का धरिये।।

हर संकट को दूर करेगी।

भंडारे भरपूर करेगी।।

जो भी माँ को ‘चमन’ पुकारे।

कात्यानी सब कष्ट निवारे।।

माँ दुर्गा की आरती

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…

कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।

भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।

> मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…

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निष्कर्ष

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
माता की कृपा से सफलता, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

FAQ

Q1. माँ कात्यायनी की पूजा कब की जाती है ?

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है।

Q2. माँ कात्यायनी का वाहन क्या है ?

माँ कात्यायनी का वाहन सिंह है।

Q3. माँ कात्यायनी की पूजा से क्या लाभ होता है ?

माँ कात्यायनी की पूजा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और सफलता मिलती है।

Q4. माँ कात्यायनी किसकी पुत्री मानी जाती हैं ?

माँ कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री मानी जाती हैं।

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