श्रावण मास 2026: तिथि, पूजा विधि, व्रत नियम, शुभ मुहूर्त, कथा, मंत्र और महत्व
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में माना जाता है। इस पूरे महीने में आने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि श्रावण सोमवार का व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
साल 2026 में श्रावण मास के दौरान 4 श्रावण सोमवार पड़ रहे हैं। इन दिनों शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व रहता है।
सावन 2026 कब से शुरू है ?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण मास के कृष्ण प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई को रात 8:05 बजे से प्रारंभ हो रही हैं, जो 30 जुलाई को रात 9:30 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से सावन माह का आरंभ 30 जुलाई 2026, गुरुवार से होगा।
श्रावण सोमवार 2026 की तिथियां
| क्रम | श्रावण सोमवार | तिथि |
|---|---|---|
| 1 | पहला श्रावण सोमवार | 3 अगस्त 2026 |
| 2 | दूसरा श्रावण सोमवार | 10 अगस्त 2026 |
| 3 | तीसरा श्रावण सोमवार | 17 अगस्त 2026 |
| 4 | चौथा श्रावण सोमवार | 24 अगस्त 2026 |
श्रावण मास 2026 कब से कब तक है ?
- श्रावण मास प्रारंभ : 30 जुलाई 2026 (गुरुवार)
- श्रावण मास समाप्त : 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
सावन मास का प्रत्येक दिन भगवान शिव की उपासना के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और शिवलिंग का अभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
श्रावण सोमवार का महत्व
हिंदू धर्म में श्रावण मास भगवान शिव का अत्यंत प्रिय महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी माह में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है।
श्रावण सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए तथा विवाहित दंपत्ति सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखते हैं।
इस दिन गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के पुष्प तथा चंदन अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है।
श्रावण सोमवार 2026 पूजा विधि
श्रावण सोमवार के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें तथा भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। यदि संभव हो तो शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक करें, अन्यथा घर में स्थापित शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन करें।
पूजा की संपूर्ण विधि
- सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें।
- शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें।
- इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
- पुनः शुद्ध जल से शिवलिंग का स्नान कराएं।
- चंदन, अक्षत, भस्म और सफेद पुष्प अर्पित करें।
- बेलपत्र अर्पित करें। ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ, अखंड और तीन पत्तियों वाला हो।
- धतूरा, भांग, आक के पुष्प और मौसमी फल अर्पित करें।
- धूप और दीप प्रज्वलित करें।
- महामृत्युंजय मंत्र, पंचाक्षरी मंत्र तथा शिव चालीसा का पाठ करें।
- भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
श्रावण सोमवार व्रत के नियम
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- पूरे दिन भगवान शिव का स्मरण करें।
- व्रत का संकल्प लेकर नियमपूर्वक पूजा करें।
- यदि स्वास्थ्य अनुमति दे तो निर्जल या फलाहार व्रत रखें।
- सात्विक भोजन करें।
- मांस, मदिरा, तामसिक भोजन, लहसुन और प्याज का सेवन न करें।
- क्रोध, झूठ और कटु वचन से बचें।
- जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें।
- दिनभर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
- शाम को भगवान शिव की आरती करके व्रत का पारण करें।
श्रावण सोमवार पूजा सामग्री
- शुद्ध जल या गंगाजल
- दूध
- दही
- घी
- शहद
- शक्कर
- पंचामृत
- बेलपत्र
- धतूरा
- भांग
- आक के पुष्प
- चंदन
- अक्षत
- भस्म
- सफेद पुष्प
- धूप
- दीपक
- रुई की बत्ती
- शुद्ध घी या तिल का तेल
- मौसमी फल
- मिठाई या नैवेद्य
- नारियल
- कलावा
Must Read श्रावण मास महात्म्य: जानें श्रावण मास महात्म्य पहला अध्याय से दसवां अध्याय तक
सावन सोमवार पर क्या चढ़ाना चाहिए ?
श्रावण सोमवार के दिन भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के पुष्प, चंदन, भस्म तथा सफेद पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धा और भक्ति से किया गया साधारण जलाभिषेक भी भगवान शिव को प्रिय होता है।
श्रावण सोमवार पर क्या नहीं करना चाहिए ?
- बेलपत्र खंडित या कीड़े लगे हुए न चढ़ाएं।
- शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और केतकी का फूल अर्पित न करें।
- तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- किसी का अपमान या अनावश्यक विवाद न करें।
- पूजा बिना स्नान किए न करें।
- शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद पुनः ग्रहण करने से पहले स्थानीय परंपरा का पालन करें।
Must Read नाग पंचमी 2026 कब है ? जानें सही तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय
श्रावण सोमवार व्रत कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है। इस माह में श्रद्धा और नियमपूर्वक सोमवार का व्रत रखने वाले भक्तों पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा बनी रहती है।
एक प्राचीन कथा के अनुसार एक निर्धन ब्राह्मण अत्यंत कष्टमय जीवन व्यतीत कर रहा था। उसने श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को उपवास रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया, बेलपत्र अर्पित किए और पूरे मन से ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप किया। उसकी निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसके सभी दुख दूर किए तथा उसे धन, सुख, सम्मान और समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
तभी से यह मान्यता प्रचलित है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक श्रावण सोमवार का व्रत रखता है और भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता का आगमन होता है।
श्रावण सोमवार के प्रमुख मंत्र
1. शिव पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥
2. महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
3. शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे।
महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
भगवान शिव की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥
दो भुज, चार चतुर्भुज, दशभुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
अक्षमाला, वनमाला, मुण्डमाला धारी।
चंदन, मृगमद सोहै, भाले शशिधारी॥
श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगे।
सनकादिक, गरुणादिक, भूतादिक संगे॥
कर में श्रेष्ठ कमंडल, चक्र त्रिशूल धारी।
जगकर्ता, जगहर्ता, जगपालनकारी॥
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका॥
त्रिगुणस्वामी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
पूजा के अंत में श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आरती करें और सभी भक्तों में प्रसाद वितरित करें।
श्रावण सोमवार व्रत के लाभ
- भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
- योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है।
- वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ती है।
- घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव कम होता है।
- आध्यात्मिक उन्नति तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- रोग, भय और बाधाओं से रक्षा की भावना मजबूत होती है।
श्रावण सोमवार व्रत का उद्यापन
यदि किसी श्रद्धालु ने लगातार श्रावण सोमवार का व्रत रखने का संकल्प लिया है, तो अंतिम सोमवार अथवा संकल्प पूर्ण होने पर उद्यापन किया जाता है।
उद्यापन की विधि
- भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष पूजन करें।
- रुद्राभिषेक या शिवाभिषेक कराएं (यदि संभव हो)।
- महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
- ब्राह्मणों अथवा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।
- वस्त्र, अन्न, फल और दक्षिणा का दान करें।
- भगवान शिव की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
- सभी के कल्याण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
श्रावण सोमवार का आध्यात्मिक महत्व
श्रावण मास केवल व्रत और पूजा का समय नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति, सेवा और सदाचार का भी पर्व है। इस दौरान भगवान शिव की आराधना के साथ दान, जप, ध्यान और सत्कर्म करने से आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
Must Read सावन शिवरात्रि 2026: तिथि, जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, चार प्रहर पूजा समय और महत्व
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. श्रावण सोमवार 2026 कब है ?
साल 2026 में श्रावण सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को पड़ेंगे।
Q2. श्रावण मास 2026 कब से कब तक है ?
उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार श्रावण मास 30 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा।
Q3. श्रावण सोमवार के दिन क्या चढ़ाना चाहिए ?
भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, सफेद पुष्प और मौसमी फल अर्पित किए जा सकते हैं।
Q4. क्या महिलाएं श्रावण सोमवार का व्रत रख सकती हैं ?
हाँ, अविवाहित और विवाहित दोनों महिलाएं श्रद्धा और नियमपूर्वक श्रावण सोमवार का व्रत रख सकती हैं।
Q5. क्या श्रावण सोमवार पर फलाहार किया जा सकता है ?
हाँ। श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक उपवास रख सकते हैं।
Q6. श्रावण सोमवार व्रत का क्या महत्व है ?
मान्यता है कि इस व्रत से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
निष्कर्ष
श्रावण सोमवार भगवान शिव की आराधना का अत्यंत शुभ अवसर है। इस दिन श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक व्रत रखकर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मंत्र-जप तथा दान-पुण्य करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सच्ची श्रद्धा, सात्विक जीवन और सदाचार ही श्रावण सोमवार व्रत का वास्तविक संदेश है।
हर-हर महादेव! भगवान भोलेनाथ आप सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करें।
Leave A Comment