श्रावण सोमवार पर कैसे करें शिव पूजा ? संपूर्ण शिव पूजन विधि, मंत्र, सामग्री और नियम
देवों के देव भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए श्रावण सोमवार का विशेष महत्व है। श्रावण मास में आने वाले प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा, जलाभिषेक और व्रत करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप, रुद्राभिषेक, शिव स्तोत्र एवं शिव पुराण का पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
इस लेख में सामान्य मंत्रों सहित संपूर्ण शिव पूजन विधि, पूजन सामग्री, आवश्यक नियम तथा पूजन के प्रत्येक चरण का विस्तार से वर्णन किया गया है।
श्रावण सोमवार का महत्व
श्रावण सोमवार का व्रत सभी स्त्री-पुरुष, युवा, वृद्ध एवं बच्चे श्रद्धानुसार कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक व्रत, शिव पूजन, रुद्राभिषेक, शिवरात्रि कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ तथा “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
व्रत के अगले दिन ब्राह्मण को यथाशक्ति वस्त्र, क्षीर (दूध), भोजन एवं दक्षिणा देकर व्रत का समापन करना चाहिए।
त्रयोदशी एवं चतुर्दशी में जल चढ़ाने का विशेष महत्व
श्रावण सोमवार के व्रत में उपवास अथवा फलाहार का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए साधक को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना चाहिए, स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए तथा भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
भगवान शिव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूर्वा, फल एवं मिठाई अर्पित करें। रात्रि में जागरण करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। शिव चालीसा, शिव पुराण तथा महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है।
श्रावण मास में त्रयोदशी एवं चतुर्दशी के संधिकाल में भगवान शिव को जल अर्पित करना अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना गया है।
शिव पूजन में ध्यान रखने योग्य बातें
- स्नान करके ही पूजा करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- कुश (दर्भ) के आसन का प्रयोग करना श्रेष्ठ माना गया है।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करें।
- खंडित बिल्वपत्र कभी अर्पित न करें।
- बिल्वपत्र का चिकना भाग शिवलिंग पर रखें।
- शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा न करें। जहाँ से अभिषेक का जल निकलता है, वहीं से वापस लौट आएँ।
- चंपा के पुष्प भगवान शिव को अर्पित न करें।
- बिल्वपत्र के साथ आक का पुष्प, धतूरा एवं नीलकमल भी अर्पित किए जा सकते हैं।
- भगवान शिव के प्रसाद का कभी अनादर न करें।
पूजन सामग्री
- शिवलिंग अथवा भगवान शिव की प्रतिमा
- गंगाजल
- सफेद चंदन
- अबीर एवं गुलाल
- अगरबत्ती एवं धूप (गुग्गुल)
- बिल्वपत्र एवं बिल्वफल
- धतूरा एवं आक के पुष्प
- दूर्वा
- तुलसी
- अक्षत (चावल)
- पुष्प एवं पुष्पमाला
- फल एवं मिठाई
- पान एवं सुपारी
- जनेऊ
- पंचामृत
- आसन
- कलश
- दीपक
- शंख
- घंटी
- आरती की सामग्री
प्रारंभिक पूजन विधि
श्रावण सोमवार के दिन शिव अभिषेक के लिए एक पात्र में स्वच्छ जल भरें। उसमें बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प एवं अक्षत डालकर भगवान शिव को अर्पित करें। व्रत के दिन शिवपुराण का पाठ अथवा श्रवण करें तथा मन को सात्त्विक रखें।
प्रातःकाल नित्यकर्म पूर्ण करके पूर्व अथवा ईशान दिशा की ओर मुख करके बैठें। सबसे पहले आचमन करें, तिलक लगाएँ तथा निम्न शिखा मंत्र का उच्चारण करें।
शिखा मंत्र
ह्रीं ऊर्ध्वकेशी विरूपाक्षी मांसशोणित भक्षणे।
तिष्ठ देवि शिखा मध्ये चामुण्डे ह्यपराजिते॥
आचमन मंत्र
ॐ केशवाय नमः।
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ माधवाय नमः।
तीन बार जल ग्रहण करें। इसके बाद ॐ गोविन्दाय नमः बोलकर हाथ धो लें। फिर बाएँ हाथ में जल लेकर दाएँ हाथ से मुख, कान, नेत्र, नाक, नाभि, हृदय एवं मस्तक का स्पर्श करें।
ह्रीं नमो भगवते वासुदेवाय।
इस मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने चारों ओर जल का छिड़काव करें। तत्पश्चात—
ह्रीं नमो नारायणाय।
का जप करते हुए प्राणायाम करें।
स्वयं एवं पूजन सामग्री का पवित्रीकरण
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
इस मंत्र का उच्चारण करते हुए अपने ऊपर तथा संपूर्ण पूजन सामग्री पर जल का छिड़काव करें। इसके बाद न्यास से पूजन का अगला क्रम प्रारंभ करें।
न्यास
न्यास: नीचे दिए गए मंत्र बोलकर बाजू में लिखे गए अंग पर अपने दाएँ हाथ से स्पर्श करें।
- ह्रीं नं पादाभ्यां नमः। (दोनों पैरों पर)
- ह्रीं मों जानुभ्यां नमः। (दोनों जंघाओं पर)
- ह्रीं भं कटिभ्यां नमः। (दोनों कमर पर)
- ह्रीं गं नाभ्यै नमः। (नाभि पर)
- ह्रीं वं हृदयाय नमः। (हृदय पर)
- ह्रीं ते बाहुभ्यां नमः। (दोनों कंधों पर)
- ह्रीं वां कण्ठाय नमः। (गले पर)
- ह्रीं सुं मुखाय नमः। (मुख पर)
- ह्रीं दें नेत्राभ्यां नमः। (दोनों नेत्रों पर)
- ह्रीं वां ललाटाय नमः। (ललाट पर)
- ह्रीं यां मूर्ध्ने नमः। (मस्तक पर)
- ह्रीं नमो भगवते वासुदेवाय नमः। (संपूर्ण शरीर पर)
- तत्पश्चात भगवान शंकर की पूजा करें।
तिलक मंत्र
स्वस्ति तेस्तु द्विपदेभ्यश्चतुष्पदेभ्य एव च।
स्वस्त्यस्तु पादकेभ्यः श्रीः सर्वेभ्यः स्वस्ति सर्वदा॥
नमस्कार मंत्र
हाथ में अक्षत एवं पुष्प लेकर निम्न मंत्र बोलकर नमस्कार करें—
श्री गणेशाय नमः।
इष्टदेवताभ्यो नमः।
कुलदेवताभ्यो नमः।
ग्रामदेवताभ्यो नमः।
स्थानदेवताभ्यो नमः।
सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः।
गुरवे नमः।
मातृ-पितृभ्यो नमः।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
गणपति स्मरण
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
संकल्प
दाहिने हाथ में जल, अक्षत एवं द्रव्य लेकर संकल्प करें। संकल्प में अपने नगर, ग्राम, गोत्र एवं नाम का उच्चारण करें तथा भगवान शिव की पूजा का संकल्प लें।
संकल्प पूर्ण होने पर हाथ का जल किसी पात्र में छोड़ दें।
दिग्रक्षण मंत्र
यदत्र संस्थितं भूतं स्थानमाश्रित्य सर्वतः।
स्थानं त्यक्त्वा तु तत्सर्वं यत्रस्थं तत्र गच्छतु॥
मंत्र बोलकर अक्षत चारों ओर छोड़ें।
वरुण पूजन
अपां पतये वरुणाय नमः।
सकलोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पैः सम्पूजयामि॥
कलश में चन्दन एवं पुष्प डालें तथा उसी जल से स्वयं एवं पूजन सामग्री का शुद्धिकरण करें।
दीप पूजन
दीपस्त्वं देवरूपश्च कर्मसाक्षी जयप्रदः।
साज्यश्च वर्तिसंयुक्तं दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक पर चन्दन एवं पुष्प अर्पित करें।
शंख पूजन
लक्ष्मीसहोदरस्त्वं तु विष्णुना विधृतः करे।
निर्मितः सर्वदेवैश्च पाञ्चजन्य नमोऽस्तुते॥
शंख पर चन्दन एवं पुष्प अर्पित करें।
घंट पूजन
देवानां प्रीतये नित्यं रक्षसां च विनाशने।
घण्टानादं प्रकुर्वीत ततः घण्टां प्रपूजयेत्॥
घंटी बजाकर चन्दन एवं पुष्प अर्पित करें।
ध्यान मंत्र
ध्यायामि दैवतं श्रेष्ठं नित्यं धर्मार्थप्राप्तये।
धर्मार्थकाममोक्षाणां साधनं ते नमो नमः॥
भगवान शिव का ध्यान करें।
आवाहन मंत्र
आगच्छ देवेश तेजोराशे जगत्पते।
पूजां मया कृतां देव गृहाण सुरसत्तम॥
भगवान शिव का आवाहन करें।
आसन मंत्र
सर्वकाष्ठमयं दिव्यं नानारत्नसमन्वितम्।
सुवर्णसमायुक्तमासनं प्रतिगृह्यताम॥
भगवान शिव को आसन अर्पित करें।
पाद्य (पाद प्रक्षालन)
उष्णोदकं निर्मलं च सर्वसौगन्धसंयुतम्।
पादप्रक्षालनार्थाय दत्तं ते प्रतिगृह्यताम॥
अर्घ्य मंत्र
जलं पुष्पं फलं पत्रं दक्षिणासहितं तथा।
गन्धाक्षतयुतं दिव्यमर्घ्यं दास्ये प्रसीद मे॥
पंचामृत स्नान
पयो दधि घृतं चैव शर्करा मधुसंयुतम्।
पञ्चामृतं मयानितं गृहाण परमेश्वर॥
स्नान मंत्र
गङ्गा रेवा तथा क्षिप्रा पयोष्णी सहितास्तथा।
स्नानार्थं ते प्रदास्यामि प्रसीद परमेश्वर॥
भगवान शिव को स्वच्छ जल से स्नान कराएँ तथा चन्दन एवं पुष्प अर्पित करें।
अभिषेक मंत्र
सहस्राक्षी शतधारं ऋषिभिः पावनं कृतम्।
तेन त्वामभिषिञ्चामि पावमान्यः पुनन्तु माम्॥
शंख में जल भरकर शिवलिंग का अभिषेक करें। तत्पश्चात स्वच्छ जल से पुनः स्नान कराकर शिवलिंग को उनके स्थान पर विराजमान करें।
वस्त्र अर्पण
वस्त्र मंत्र
सोवर्णतन्तुभिर्युक्तं रजतं वस्त्रमुत्तमम्।
परिधेय ददामि ते देव प्रसीद परमेश्वर॥
(मंत्र बोलकर भगवान शिव को वस्त्र अर्पित करने की भावना करें।)
जनेऊ अर्पण
जनेऊ मंत्र
नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्।
उपवीतं प्रदास्यामि गृह्यतां परमेश्वर॥
(मंत्र बोलकर जनेऊ अर्पित करें।)
चंदन अर्पण
चंदन मंत्र
मलयाचलसंभूतं देवदारुसमन्वितम्।
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥
(भगवान शिव को चंदन का तिलक एवं लेप करें।)
अक्षत अर्पण
अक्षत मंत्र
अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कुमाक्ताः सुशोभिताः।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥
(अक्षत अर्पित करें।)
पुष्प अर्पण
पुष्प मंत्र
नानासुगन्धि पुष्पाणि ऋतुकालोद्भवानि च।
मयानितानि प्रीत्यर्थं गृहाण परमेश्वर॥
(भगवान शिव को पुष्प एवं पुष्पमाला अर्पित करें।)
तुलसी अर्पण
तुलसी मंत्र: तुलसी हेमवर्णा च रत्नवर्णा च मञ्जरी।
प्रीत्यर्थं सम्प्रदास्यामि हरिप्रियां नमोऽस्तु ते॥ (तुलसी दल अर्पित करें।)
बिल्वपत्र अर्पण
बिल्वपत्र मंत्र
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्॥
(बिल्वपत्र भगवान शिव को अर्पित करें।)
दूर्वा अर्पण
दूर्वा मंत्र
दूर्वाकुरान् सुहरितान् अमृतान् मंगलप्रदान्।
आनीतांस्तव पूजार्थं प्रसीद परमेश्वर॥
(दूर्वा अर्पित करें।)
सौभाग्य द्रव्य
मंत्र
हरिद्रां सिन्दूरं चैव कुमकुमेन समन्वितम्।
सौभाग्यारोग्यप्रीत्यर्थं गृहाण परमेश्वर॥
(अबीर, गुलाल तथा अन्य सौभाग्य द्रव्य अर्पित करें। इच्छानुसार आभूषण भी अर्पित कर सकते हैं।)
धूप अर्पण
धूप मंत्र
वनस्पतिरसोत्पन्नो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः।
देवप्रीतिकरो नित्यं धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
(भगवान शिव को धूप अर्पित करें।)
दीप अर्पण
दीप मंत्र
त्वं ज्योतिः सर्वदेवानां तेजसां तेज उत्तमम्।
आत्मज्योतिः परं धाम दीपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
(भगवान शिव के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।)
नैवेद्य अर्पण
नैवेद्य मंत्र
नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिर्मे ह्यचला कुरु।
इप्सितं च वरं देहि परां च परमां गतिम्॥
(भगवान शिव को नैवेद्य अर्पित करें।)
भोजन (मिष्ठान) मंत्र
ॐ प्राणाय स्वाहा।
ॐ अपानाय स्वाहा।
ॐ समानाय स्वाहा।
ॐ उदानाय स्वाहा।
ॐ व्यानाय स्वाहा॥
इन पाँच मंत्रों के साथ भगवान को नैवेद्य अर्पित करें तथा तीन बार जल समर्पित करें। इसके बाद चंदन अर्पित करें।
मुखवास
मुखवास मंत्र
एलालवङ्गसंयुक्तं पूगीफलसमन्वितम्।
नागवल्लीदलोपेतं मुखवासं प्रतिगृह्यताम्॥
(पान, सुपारी एवं मुखवास अर्पित करें।)
दक्षिणा अर्पण
दक्षिणा मंत्र
ह्रीं हेमं वा रजतं वापि पुष्पं वा पत्रमेव च।
दक्षिणां देवदेवेश गृहाण परमेश्वर॥
(अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा अर्पित करें।)
आरती
आरती मंत्र
सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं देवानां प्रीतिदायकम्।
नीराजनमहं कुर्वे प्रसीद परमेश्वर॥
भगवान शिव की आरती करें। आरती के बाद उसके चारों ओर जल की धारा दें, पुष्प अर्पित करें तथा सभी श्रद्धालुओं को आरती दें। अंत में स्वयं भी आरती ग्रहण कर हाथ धो लें।
अथवा भगवान गंगाधर की आरती का पाठ करें।
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🕉 भगवान गंगाधर की आरती 🕉
ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा॥ हर…॥
कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रुमविपिने।
गुञ्जति मधुकरपुञ्जे कुञ्जवने गहने॥
कोकिलकूजित खेलत हंसावन ललिता।
रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता॥ हर…॥
तस्मिंल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता।
तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता॥
क्रीडा रचयति भूषारञ्चित निजमीशम्।
इन्द्रादिक सुर सेवत नमयते शीशम्॥ हर…॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत नमयते मुदसहिता।
किन्नर गायन कुरुते सप्तस्वर सहिता॥
धिनकत थै थै धिनकत मृदंग वादयते।
क्वण क्वण ललिता वेणुं मधुरं नाटयते॥ हर…॥
रुण रुण चरणे रचयति नूपुरमुज्ज्वलिता।
चक्रावर्ते भ्रमयति कुरुते तां धिक तां॥
तां तां लुप चुप तां तां डमरू वादयते।
अंगुष्ठांगुलिनादं लासकतां कुरुते॥ हर…॥
कर्पूरद्युतिगौरं पञ्चाननसहितम्।
त्रिनयनशशिधरमौलिं विषधरकण्ठयुतम्॥
सुन्दरजटाकलापं पावकयुतभालम्।
डमरुत्रिशूलपिनाकं करधृतनृकपालम्॥ हर…॥
मुण्डै रचयति माला पन्नगमुपवीतम्।
वामविभागे गिरिजारूपं अतिललितम्॥
सुन्दरसकलशरीरे कृतभस्माभरणम्।
इति वृषभध्वजरूपं तापत्रयहरणम्॥ हर…॥
शंखनिनादं कृत्वा झल्लरि नादयते।
नीराजयते ब्रह्मा वेदऋचां पठते॥
अतिमृदुचरणसरोजं हृत्कमले धृत्वा।
अवलोकयति महेशं ईशमभिनत्वा॥ हर…॥
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा।
रामस्त्रिजटानाथं ईशमभिनत्वा॥
संगतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते।
शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः शृणुते॥ हर…॥
पुष्पांजलि मंत्र
पुष्पांजलिं प्रदास्यामि मन्त्राक्षरसमन्विताम्।
तेन त्वं देवदेवेश प्रसीद परमेश्वर॥
(मंत्र बोलकर भगवान शिव को पुष्पांजलि अर्पित करें।)
प्रदक्षिणा मंत्र
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे पदे॥
भगवान शिव की यथाविधि प्रदक्षिणा करें। ध्यान रखें कि शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा न करें। जहाँ से अभिषेक का जल प्रवाहित होता है, वहीं से वापस लौट आएँ।
शिव स्तोत्र एवं नामस्मरण
प्रदक्षिणा के पश्चात भगवान शिव के किसी भी प्रिय स्तोत्र, शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र अथवा ॐ नमः शिवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। इससे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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पूजन में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना
पूजा के अंत में भगवान शिव से पूजन में हुई भूल-चूक एवं अशुद्धियों के लिए विनम्रतापूर्वक क्षमा याचना करें।
॥ देवापराध क्षमापन स्तोत्रम् ॥
न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो।
न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः॥
न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं।
परं जाने देव त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्॥
विधेरज्ञानद्रविणविरहेणालसतया।
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत्॥
तदेतत् क्षन्तव्यं सकलोद्धारक महादेव।
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति॥
मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि।
एवं ज्ञात्वा महादेव यथायोग्यं तथा कुरु॥
पूजन समापन
क्षमा प्रार्थना के पश्चात भगवान शिव को साष्टांग प्रणाम करें। प्रसाद ग्रहण करें तथा परिवार एवं उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित करें। श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ की गई शिव आराधना अवश्य ही भगवान भोलेनाथ की कृपा प्रदान करती है।
हर हर महादेव ॥ ॐ नमः शिवाय ॥
टंकण अशुद्धियों के लिए क्षमा प्रार्थी।
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